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सिद्धबलि जनशताब्दी एक्सप्रेस रेल सेवा शुरू

रिपोर्टर: Author August 5, 2026

 सिद्धबलि जनशताब्दी रेल सेवा शुरू

कोटद्वार। कोटद्वार से दिल्ली के लिए सिद्धबलि जनशताब्दी एक्सप्रेस ट्रेन का केन्द्रीय रेल मंत्री पियूष गोयल ने वीसी के माध्यम से हरी झंडी दिखाकर रवाना कर शुभारंभ कर दिया है। रेलवे स्टेशन में आयोजित सिद्धबलि जनशताब्दी एक्सप्रेस के शुभारंभ के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में वीडियो कॉफ्रेसिंग के माध्यम से अपने संबोधन में केन्द्रीय रेल मंत्री पियूष गोयल ने कहा कि धार्मिक आस्था के प्रतीक बाबा सिद्धबलि ने नाम से चलने वाली सिद्धबलि जनशताब्दी एक्सप्रेस के संचालन से गढ़वाल क्षेत्र वासियों को खासा लाभ होगा, उन्होंने देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में केन्द्र सरकार के द्वारा उत्तराखंड के लिए रेल सेवाओं के विस्तारीकरण, एवं ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल लाइन का भी जिक्र करते हुए कहा कि रेल मंत्रालय के द्वारा उक्त रेल परियोजना के लिए पर्याप्त मात्रा में धनराशि स्वीकृत करवा दी है, जिसका कि तेज गति से निर्माण कार्य चल रहा है, कहा कि इस परियोजना के पूर्ण हो जाने से दुर्गम पर्वतीय क्षेत्र में रेल सेवा शुरू हो जाने से आवागमन सुगम हो जायेगा। वीसी के माध्यम से राज्य सभा सांसद अनिल बलूनी ने भी संबोधित करते हुए सिद्धबलि जनशताब्दी एक्सप्रेस के संचालन से पर्यटन की दृष्टिकोण से उपयुक्त बताया, उन्होंने उक्त जनशताब्दी एक्सप्रेस के संचालन में समय परिवर्तन करने की व्यापारियों की मांग को जायज बताते हुए आने वाले समय में रेल मंत्री से मुलाकात कर व्यापारियों की मांग को पूरा करने का भी भरोसा दिया है। केन्द्रीय शिक्षा मंत्री डा0 रमेश पोखरियाल निशंक ने भी वीसी के माध्यम से जनता को संबोधित करते हुए सिद्धबलि जनशताब्दी एक्सप्रेस को भाजपा की ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। कहा कि केन्द्र एवं राज्य में डबल इंजन की सरकार जनअपेक्षाओं के अनुरूप राज्य के समग्र विकास का अपना वादा पूरा करने में लगी हुई है। रेलवे स्टेशन में आयोजित कार्यक्रम में गढ़वाल सांसद तीरथ सिंह रावत, काबीना मंत्री डा0 हरक सिंह रावत, लैंसडौन विधायक दलीप सिंह रावत में संबोधित करते हुए सिद्धबलि जनशताब्दी एक्सप्रेस के संचालन को राज्य सभा सांदस अनिल बलूनी एवं केन्द्रीय रेलमंत्री का आभार व्यक्त किया। इस मौके पर भाजतीय जनता पार्टी के पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं रेलवे के अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद थे। इससे पूर्व रैलवे के अधिकारियो ने सिद्धबलि शताब्दी एक्सप्रेस के संचालन एवं सुविधाओं के बारे में पूरी जानकारी दी गयी।

सिद्धबली एक्सप्रेस रेल सेवा के समय को लेकर व्यापारियों का अनोखा विरोध

कोटद्वार। कोटद्वार से दिल्ली के लिए आज से शुरू होने वाली सिद्ध बली जनशताब्दी एक्सप्रेस के शुरू होने से पहले ही कोटद्वार के व्यापारियों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया दरअसल व्यापारी इसका समय परिवर्तन की मांग को लेकर विरोध कर रहे हैं व्यापारियों का कहना है कि व्यापारिक दृष्टिकोण को देखते हुए ही ट्रेन का समय निर्धारित होना चाहिए था जिससे बाहर से आने जाने वाले लोगों को सहूलियत से पहाड़ों के लिए बसें भी मिल पाती हालांकि राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी की इस पहल की हर तरफ सराहना हो रही थी वही व्यापारी तब का अब इसका विरोध करता दिखाई दे रहा है व्यापारियों ने आज सड़कों पर उतर कर इसका विरोध किया व रेलवे स्टेशन पहुंचकर पुलिस के साथ उनकी तीखी नोकझोंक भी हुई व्यापारियों के इस प्रदर्शन के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। माना जा रहा था कि कोटद्वार से ट्रेनों का संचालन होने से इलाके क का भी विकास होगा लेकिन व्यापारी अपनी मांग को लेकर ही ट्रेनों के संचालन पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

 सिद्धबली एक्सप्रेस नाम होने से सुप्रसिद्ध सिद्धबली धाम को मिलेगी नई पहचान

कोटद्वार । बुधवार से सिद्धबली जनशताब्दी एक्सप्रेस का संचालन होने जा रहा है इससे पूर्व एजीएम उत्तर रेलवे नवीन गुलाटी ने प्रेस वार्ता की इसमें उन्होंने बताया कि सिद्धबली जनशताब्दी एक्सप्रेस आरामदायक पूर्णतया वातानुकूलित है । सिद्धबली जनशताब्दी एक्सप्रेस 3:45 पर कोटद्वार से प्रारंभ होगी व 10:20 पर दिल्ली पहुंचेगी । गाड़ी में द्वितीय श्रेणी चेयर कार के 8 कोच के साथ 2 वातानुकूलित कोच व जनरेटर कार के दो कोच लगाए गए हैं। गढ़वाल एक्सप्रेस में 11 स्टॉपेज होते थे वहीं सिद्धबली जनशताब्दी एक्सप्रेस में नौ स्टॉपेज होंगे । सभी कोच एलएचबी हैं। गौरतलब है कि कोटद्वार से दिल्ली के लिए सीधी ट्रेन सेवा शुरू होने से यात्रियों को काफी सहूलियत होगी। ये ट्रेन गढ़वाल, उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए लाइफ लाइन साबित होगी। इससे व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा। ट्रेन का नाम सिद्धबली एक्सप्रेस किए जाने से उत्तर भारत के सुप्रसिद्ध सिद्धबली धाम को भी नई पहचान मिलेगी।

कोटद्वार का नाम बदलने की घोषणा, कोटद्वार वासियों का महत्व घटाया

क्या कोटद्वार का नाम बदलने से होगा कोटद्वार का भला….?

कोटद्वार। काफी लम्बे समय से चली आ रही कोटद्वार का नाम कण्वनगरी रखने की मांग को बुधवार को मुख्यमंत्री ने स्वीकृति प्रदान कर दी है। अब गढ़वाल का द्वार कोटद्वार अब कण्वनगरी कोटद्वार के नाम से जाना जायेगा।

आपको बता दें कि वर्ष 1952 में कोटद्वार को नगर पालिका बनाया गया था। जिसके बाद कोटद्वार का विकास होना शुरू हुआ। कोटद्वार खोह नदी के किनारे बसा है जिस कारण इसे खोह द्वार के नाम से भी जाना जाता है। लगभग 2017 में नगर पालिका का उच्चीकरण कर उसे नगर निगम में तब्दील कर दिया गया था। बता दें कि चक्रवर्ती भरत की जन्म भूमि तथा कण्व ऋषि की तपस्थली कण्वाश्रम ही है। कण्वाश्रम को विश्व पटल पर प्रसिद्ध करने के लिए कई सामाजिक संगठन द्वारा कोटद्वार का नाम बदलकर कण्वनगरी किये जाने की मांग काफी समय से की जा रही थी। जिससे बुधवार को मुख्यमंत्री ने स्वीकृति दे दी है। अब कोटद्वार को कण्वनगरी कोटद्वार के नाम से जाना जायेगा।

कोटद्वार का नाम बदला जाना कुंठित मानसिकता- लोक संवाद टुडे

कोटद्वार का नाम बदलने के पीछे बड़ी कुंठित मानसिकता देखने को मिल रही है। जो कोटद्वार भगवानों का द्वार कहा जाता था,उसका स्तर घटाकर ऋषि मुनियों के स्तर पर कर दिया गया है। जिन लोगों के कहने पर कोटद्वार का नाम बदला जा रहा है निश्चित ही उनकी मानसिकता कुंठित लग रही है क्योंकि उन्हें भगवान और ऋषि मे अंतर नहीं मालूम। लोक संवाद टुडे कोटद्वार के नाम बदलने का घोर विरोध करता है। नाम बदलने से क्या कोटद्वार का भविष्य बदल जाएगा….? पहले ही कोटद्वार नगर निगम बनने से मुसीबतों के पहाड तले दबा पड़ा है। अब कोटद्वार का नाम बदलने से कोटद्वार अपनी पहचान भी खो देगा। जिस ऋषि के नाम पर कोटद्वार का नाम बदलने वाला है उस ऋषि का कर्मक्षेत्र केवल कलालघाटी और किशनपुरी तट सीमित है।

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