टेक होम राशन योजना का ई टेंडर जारी होने के बाद उत्तराखंड के किसानों और स्वयं सहायता समूहों के पेट पर पड़ी लात
ई-टेंडर में बहुत बड़े घोटाले की संभावना- पूर्व मंत्री सुरेंद्र नेगी
उत्तराखंड में किसानों की दुदर्शा दिन पर दिन बढ़ती ही जा रही हैैं। उत्तराखंड का किसान पहले से ही प्राकृतिक आपदाओं, भौगोलिक विषमता, बिखरी कृषि भूमि और सबसे बड़ी समस्या कृषि उत्पादन और उसके विपणन की। पूर्व में कांग्रेस की हरीश रावत सरकार द्वारा इन्हीं समस्याओं को देखते हुए उत्तराखंड के किसानों के हितों की रक्षा के लिए उत्तराखंड में पैदा होने वाले पहाड़ी अनाजों और कृषकों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार के द्वारा सरकारी कार्यों में दिया जाने वाले भोजन, सरकारी कैंटीन, स्कूली मिड-डे-मील योजना में पहाड़ी अनाज कोदा(मडुवा);गहत भट्ट,झंगोरा,चौलाय जैसे कई पौष्टिकता से भरपूर अनाजों से भोजन की अनिवार्यता कर दी थी। साथ ही इन अनाजों की विपणन की व्यवस्था उत्तराखंड की महिला स्वयं सहायता समूहों, संगठनों को सौंप दी थी जो गांव-गांव में अपने अपने समूहों में थोड़ी थोड़ी मात्रा में एकत्र कर अपने विकास खंडों, जिले में पहुंचाती थी जहां से स्थानीय प्रशासन इन अनाजों व अनाजों से बने उत्पादों को स्कूलों के मिड डे मील, आंगनबाड़ी केन्द्रों में तथा स्थानीय व राज्य स्तर के मेलों,हाट बाजारों व उत्तराखंड के सरकारी बाजारों में पहुंचता था। इस योजना से उत्तराखंड के पहाड़ी अनाजों और उत्पादों ने राष्ट्रीय स्तर से लेकर अन्तर्राष्ट्रीय स्तर अपनी विषेश पहचान बनाई। पहाड़ी उत्पादों और अनाजों की मांग दिनों दिन बढ़ने लगी। मडुवे के बिस्किट और लड्डुओं ने अन्तर्राष्ट्रीय स्तर धूम मचा दी। हरीश रावत सरकार की यह पहल जहां उत्तराखंड के किसानों के लिए आत्मनिर्भरता का साधन बनी वहीं उत्तराखंड के महिला स्वयं सहायता समूहों, संगठनों को भी स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलने लगा जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होने लगा।
भाजपा सरकार को किसानों की आत्मनिर्भरता, स्वयं सहायता समूहों को मिलने वाला रोजगार तथा उत्तराखंड के पहाड़ी अनाजों और उत्पादों की बढ़ती लोकप्रियता से शायद बीजेपी के गोदी उद्योगपतियों या खाद्य बाजार में कब्जा जमाए उद्योगपतियों को यह रास नहीं आया और भाजपा सरकार ने किसानों व उत्तराखंड की महिला स्वयं सहायता समूहों सहित कई युवा बेरोजगारों के पेट में लात मारते हुए प्राथमिक स्कूलों व आंगनवाड़ी केन्द्रों में टेक होम योजना से बांटे जाने वाली खाद्य सामग्री और अनाजों को पहुंचाने के लिए ई-टेंडर जारी कर जहां बच्चों के पौष्टिक भोजन से खिलवाड़ करने का का किया है उत्तराखंड के पहाड़ी अनाजों की अनिवार्यता को महत्व न देकर उत्तराखंड के किसानों को फिर आदमी युग में भेजने और वापस राज्य में पहाड़ी खेती से आत्मनिर्भरता का सपना संजोए युवा किसानों को पलायन के लिए विवश करने, स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को चूल्हे चौके तक सीमित करने का काम किया है। क्योंकि ई-टेंडर की शर्तों के अनुसार ई-टेंडर में भाग लेने के लिए 100 करोड़ का टर्नओवर होना आवश्यक है जो उत्तराखंड जैसे राज्य के स्वयं सहायता समूहों के लिए लोहे के चने चबवाने या कहें आकाश से तारे तोड़ने जैसा होगा। टेक होम योजना ई टेंडर से नाराज़ उत्तराखंड की स्वयं सहायता से रोजगार की प्रेरणा स्त्रोत बनी तिलूं रौतेली पुरुस्कार से पुरुस्कृत होने वाली श्यामा देवी और गीता मौर्य द्वारा नाराजगी जताते हुए उत्तराखंड सरकार को अपना पुरुस्कार तक लौटा दिया है।
टेक होम योजना के ई-टेंडर की विज्ञप्ति जारी होने के बाद कोटद्वार में का बिना मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी ने लोनिवि कोटद्वार के गेस्टहाऊस में पत्रकार वार्ता कर इसे उत्तराखंड के किसानों, महिला स्वयं सहायता समूहों, बेरोजगारों को छलने और कुठाराघात करने की योजना बताई। पत्रकारों से रूबरू होते हुए नेगी ने कहा भाजपा सरकार अपने चहेते उद्योगपति मित्रों को लाभान्वित करने का काम कर रही चाहे उसे किसी की भी बली लेने पड़े। 560 करोड़ का ई-टेंडर जारी भाजपा ने जताई दिया कि वह जनता की सरकार है या उद्योगपतियों की! भाजपा की इस टेक होम योजना के ई-टेंडर में बहुत बड़े घोटाले की संभावना नजर आ रही है। कांग्रेस पार्टी इस ई-टेंडर की प्रक्रिया को लेकर सड़क से विधानसभा तक आवाज उठाएगी। आगामी 23 अगस्त से होने वाले विधानसभा सत्र में इस प्रकरण में प्रतिपक्ष नेता के नेतृत्व में कांग्रेस सहयोगियों के साथ सरकार से ई-टेंडर को समाप्त करने का दबाव बनाएगी।
