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घरेलू उपचार(Home Remedies)

रिपोर्टर: Author August 5, 2026

 रोजाना की ढेरों खबरों जिसमें, क्राइम, राजनीति, धोखाधड़ी, सरकारी कामकाज, कर्मचारियों की अच्छी बुरी  कार्यशैली से लेकर आमजन की दैनिक समस्याओं से लेकर समाधान की खबरें प्रकाशित करते आ रहे हैं. आज लोक संवाद टुडे ने निर्णय लिया है कि माह में एक बार अपने पाठकों, दर्शकों को कुछ हल्का फुल्का बनाने के लिए स्वास्थ्य से संबंधित घरेलु उपाय व उत्तराखण्ड के स्थानीय भाषा में साहित्य और बोली पर काम कर रहे कवि व लेखकों की रचनाओं से परिचित करवाया जाए. लोक संवाद टुडे के इस प्रयास के विषय में अपनी प्रतिक्रिया अवश्य जाहिर करें. धन्यवाद. संपादक- पुष्कर सिंह पवार

घरेलू उपचार(Home Remedies)

जुकाम से नाक बंद हो जाना : ठंड या बारिश के मौसम में जुकाम के कारण नाक बंद हो जाती है। ऐसे मौसम में यह समस्या एक आम बात है। इससे बचाव के लिए अजवाइन को भून कर पीस ले। उसे एक सूती कपड़े में बांधकर इनहेलर बना लें। इसे बच्चों को सुघांते रहे इससे निकलने वाली सुगंध नाक को खोलने में सहायता करती है।

रात को सोते समय रोज आंवले का चूर्ण शहद या पानी से लेने से पेट साफ रहता है और आंखों से संबंधित रोगों में लाभ मिलता है। सूखे आंवले को शुद्ध घी में तलकर पीस लें, इस चूर्ण का सिर पर लेप करने से नकसीर में लाभ मिलता है।

पपीते के छिलकों को सुखाकर और पीसकर चूर्ण बना लीजिए। इस चूर्ण में ग्लिसीरीन मिलाकर दिन में दो बार फटी हुई एड़ियों में लगाने से बहुत शीघ्र लाभ होता है।

भोजन करने से पहले दो या तीन पके टमाटरों को काटकर उसमें पिसी हुई कालीमिर्च, सेंधा नमक एवं हरा धनिया मिलाकर खाएं। इससे चेहरे पर लाली आती है व पौरूष शक्ति बढ़ती है।

पेट में कीड़े होने पर प्रातः खाली पेट टमाटर में पिसी हुई कालीमिर्च लगाकर खाने से लाभ होता है।या उसमे हींग का छौंका लगा दीजिये ,अब उसे पी जाइए, सारे कीड़े मर जायेंगे.

बालों को स्वस्थ रखने और उनको बीमारी इत्यादि से बचाने के लिए नारियल तेल का इस्तेमाल करना चाहिए। इससे ना सिर्फ आपके बालों में चमक आएगी बल्कि आपके बाल किसी भी होने वाली बीमारी से भी बच पाएंगे।

त्वचा पर कहीं भी फुंसी उठने पर, काली मिर्च जल के साथ पत्थर पर घिस कर अनामिका अंगुली से सिर्फ फुंसी पर लगाने से फुंसी बैठ जाती है।

सिरदर्द होने पर दालचीनी को जल के साथ महीन पीसकर माथे पर पतला लेप कर लगा लीजिए। लेप सूख जाने पर उसे हटा लीजिए। 3-4 लेप लगाने पर सिरदर्द होना बंद हो जाएगा।

चेहरे की झांई- कुछ दिनों तक चेहरे पर मटर के आटे का उबटन मलते रहने से झांई और धब्बे समाप्त हो जाते है।

आंवला का सेवन करने से शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है।

प्रातःकाल अल्पाहार(नाश्ते) में आंवले का मुरब्बा खाने आपका शरीर स्वस्थ बना रहता है।

तनाव(टेंशन )…..

जब आप घर में हों तो बच्चों के साथ खूब मस्ती करें, उछल-कूद करें, यह क्रिया आपको ऊर्जा(एनर्जी) देगी और मन प्रफुल्लित रखेगी। वैसे भी बच्चों के साथ सारे तनाव दूर हो जाते हैं।

मुँहासे ……

हल्दी, बेसन का उबटन बनाकर चेहरे पर लगाने से भी मुँहासे दूर होते हैं।

नीम की पत्तियों के चूर्ण में मुलतानी मिट्टी और गुलाबजल मिलाकर पेस्ट बना लें व इसे चेहरे पर लगाएँ।

नीम की जड़ को पीसकर मुँहासों पर लगाने से भी वे ठीक हो जाते हैं।

जिन व्यक्तियों को निरंतर जुकाम की समस्या रहती है उनके लिए दालचीनी एक बहुत ही उपयोगी औषधि है। दालचीनी पाउडर को 2 चुटकी 1 कप गर्म जल में मिलाकर प्रातःकाल खाली पेट पीने से बहुत लाभ होता है। जल के साथ दालचीनी पाउडर लेने के 2 घण्टे बाद ही कुछ खाएं।

       गढ़वाली कविता 
       डांड्यूं की खैरी

    मि खैरि सुणादु डांड्यूं की,

विपदा लगांदु कांठ्यूं की।

पिड़ा बिगांदु धार खाळ,

रौला पाखा अर घाट्यूं की।

बिना बरखा की टुटणी छन,

जख तख देखा रड़नी छन।

फाड़ा पड़िन तौंकि छात्यों पर,

गाड़ गदन्यूं मा बगणी छन।

टप्प टप्प आंसू छोडणी छन,

डांडी कांठी अब र्‌वोणी छन।

तौं पर मनखी निर्दयी वयां,

अत्याचार कन लग्यां छन।

कष्टा दिनों मा ज्यूंणी छन सि,

खैरी खिरगिटि सौंणी छन सि।

असंद आयीं तौं पर अति भारी,

नफरत सी अब होंणी छन सि।

बणाग लगौणा तौंका गात मा,

धोखा रंचणा ऊंका साथ मा।

डाळि ब्वटळि भसम कैर्‌याली,

पाप धर्‌यूं च सभ्यूं कु हाथ मा।

गाड़ गदनि रौलि पाखि हत्येलि,

मनख्यून तख कूड़ि बाड़ि बणैलि।

नौ पर लगैलिन गदन्यां अपणा,

प्रकृति भी अब खूब छकैलि।

वळ्तिर पळ्तिर छ्‌योंडा बणैल्या,

डांडा कांठा सैरा सूखा करैल्या।

पाणि चुंवैलि तौंका तन कु सैरु,

खड़ खड़ा नागा बणैक धरैल्या।

क्य व्हालु यों पाड़ौ कु जरा बोला,

मन मा बात बिचार बणैक तोला।

भविष्य उजड़नु हमारा मुल्को कु,

जब कुछ नि रालु तब क्य खौला।

बींगा यूं डांड्यू की विपदा खैरी,

ना बणा यूं पाड़ों का तुम बैरी।

सराफ दे द्योला तब क्या कैल्या,

भुगतणा रैल्या जिन्दगी भर सैरी।

साभार

      गढ़वाली कवि

राजपाल सिंह पंवार

     रुद्रप्रयाग

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