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किसानों को आत्म निर्भर बनने की राह में कांटे तो नहीं बो रहा उद्यान विभाग …?

रिपोर्टर: Author August 5, 2026

 किसानों को आत्म निर्भर बनने की राह में कांटे तो नहीं बो रहा उद्यान विभाग …?
सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार उद्यान विभाग द्वारा  राज्य की राजकीय व व्यक्तिगत पंजीकृत नर्सरियों को दर-किनार कर कश्मीर से लाखों रुपए के सेब के बीजू पौधे , साइनवुड, विभिन्न किस्मों के सेव के कलमी पौधे उच्च दामों में क्रय कर मंगाये गये
तीन हजार पांच सौ से अधिक कर्मचारियों वाला उद्यान विभाग एक सौ बय्यालिस करोड़ रुपए खर्च करता है वेतन पर प्रतिवर्ष 
उद्यान निदेशालय रानीखेत चौबटिया के दिशा निर्देश पर पहाड़ी जिलों के डीएचओ कार्यालयों के कंधो पर रख दिया जुवा
विभाग के प्रशिक्षित मालियों के बावजूद कश्मीरी मजदूरों से सेव के बीजू पौधों में बंधवाये जा रहें है ग्राफ्ट
उत्तराखंड के उद्यानिकी विकास पर घुन बनकर काम कर रहा उद्यान विभाग 

    किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों को तकनीकी विभाग का दम भरने वाला उद्यान विभाग जिसमें तीन हजार पांच सौ से अधिक अधिकारियों व कर्मचारी कार्यरत हैं तथा जिस विभाग पर सरकार   प्रतिबर्ष कर्मचारियों के वेतन पर लगभग एक सौ बय्यालिस करोड़ रुपए खर्च करती है। राज्य के उद्यान विभाग को अब अपने प्रशिक्षित मालियों की योग्यता पर विश्वास समाप्त हो गया लगता है। इसका ताजातरीन मामला हाल में ही पहाड़ी जिलों के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेब के बागानों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से किसानों को सेब के बागान लगाने के लिए जो सेब की साईनवुड,बीजू पौधे मंगाए वहीं विभाग के प्रशिक्षित मालियों के बजाय कश्मीरी मजदूरों से ग्राफ्टिंग कार्य करवाए जाने पर विभाग के अधिकारियों ने ही उंगलियां उठाना शुरू कर दिया है तो राज्य के रजिस्टर नर्सरी स्वामियों,सेब के उद्यान पतियों ने भी सरकार और उद्यान विभाग की कार्यशैली पर प्रश्न चिन्ह लगाना शुरू कर दिया है। 

  उद्यान विभाग की कार्यशैली पर यह खुलासा सेब उद्यानपति और रजि. नर्सरी स्वामी बीरवान सिंह रावत देहरादून द्वारा सूचना के अधिकार अधिनियम के द्वारा मांगी गई सूचना से उजागर हुआ कि उद्यान विशेषज्ञ कोटद्वार के कार्यालय द्वारा राज्य की राजकीय व व्यक्तिगत पंजीकृत नर्सरियों को दर-किनार कर कश्मीर से लाखों रुपए के सेब के बीजू पौधे , साइनवुड, विभिन्न किस्मों के सेव के कलमी पौधे उच्च दामों में क्रय कर मंगाये गये है यही नहीं बल्कि ग्राफ्ट बंधाने हेतु मजदूर भी कश्मीर से बुलाये गये है ।

   इस प्रकरण में उद्यान निदेशालय रानीखेत चौबटिया के दिशा निर्देशन उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में स्थापित उद्यान विशेषज्ञ कार्यालयों एवं फल पौध आपूर्ति फर्मो द्वारा मिलकर संगठित भ्रष्टाचार किया गया प्रतीत होता है।

  उद्यान विभाग की घालमेल की एक रिपोर्ट-

1. उद्यान निदेशालय द्वारा बर्ष में दो बार 50 से 200% बढ़ाई गयी सेव के पौधों की दरें 

2. निदेशालय द्वारा 15 मई 2021 को सेव सीडलिंग की दरें 10 से 15, सामान्य कलमी प्रजाति के पौधे 40 – 80 , डबल ग्राफ्टेड 175 क्लोनल रूट स्टाक सामान्य किस्म एवं स्पर 80 से 100, क्लोनल रूट स्टाक 50 से 70 तक दरें बढ़ाई गई

 3.  दिसंबर 14, 2021को निदेशालय द्वारा इन्हीं पौधों की दरें पुनः बढ़ा दी गई। सेब क्लोनल रूट स्टाक 300 से 480, रूट स्टाक ग्राफ्टेड 100 – 150 सेव इन्टरस्टाक आधारित 175 से 480 कर दिये गये। 

4. सुनियोजित ढंग से कश्मीर व हिमाचल प्रदेश की चहेती व्यक्तिगत पंजीकृत नर्सरियों को निदेशालय द्वारा सूचिबद्ध किया गया साथ ही दरें अन्य नर्सरियों से कम दर्शा कर उन्हीं नर्सरियों से पौधे उढाने के निर्देश दिए गए।

5. दूसरी तरफ निदेशालय के पत्रांक 2820/फ्रुट प्लांट रजिस्ट्रेशन/ 2021-22 दिनांक दिसम्बर 30 2021द्वारा जिला स्तरीय अधिकारियों को फल पौध क्रय करने के निर्देश दिए गए हैं।

 6. जिसके अनुसार पौध क्रय करने में उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त पौधालयों में उपलब्ध फल पौधों को प्राथमिकता के आधार पर विभागीय दरों पर क्रय करने जिन फल प्रजातियों के पौधे उपलब्ध न होने पर EOI के माध्यम से क्रय करने के निर्देश है।

7. कृषकों को फल पौध स्वयं विभाग में पंजीकृत पौधशालाओं से क्रय करने का प्रावधान है साथ ही भुगतान RTGS द्वारा करने के निर्देश दिए गए हैं।

8. फल पौध उठाने से पूर्व प्रजाति की सत्यता पूर्णतः स्थापित कर लिया जाय। परन्तु किसी भी प्रकार प्रजातियों का प्रमाणीकरण नहीं किया गया।

9. किसी भी प्रकार की अनियमितता के लिए संम्बन्धति अधिकारी उत्तरदाई होंगे, परन्तु अभी तक किसी भी प्रकार की विभागी या सरकार स्तर से कार्यवाही नहीं की गई जबकि पूर्णतया नियमों को दरकिनार करने के प्रमाण हैं।

10. निदेशालय के पत्रांक 3617/उ०त०/ दिनांक चौबटिया 12 जनवरी – 2022 के अनुसार बर्ष 21 – 22 में अखरोट एवं सेव क्लोनल रूट स्टाक पर आधारित फल पौध क्रय करने के सम्बन्ध में किसी भी प्रकार की अनियमितता के लिए संम्बन्धति अधिकारी उत्तरदाई होंगे।

11. किसानों को विभाग में पंजीकृत पौधशालाओं से अपनी इच्छानुसार स्वयं फल पौध क्रय करने का प्रावधान है साथ ही अनुदान की धनराशि का भुगतान RTGS द्वारा करने के निर्देश दिए गए हैं।

12. शासनादेश संख्या 535/x।।।-2/2021 दिनांक 17 मई 2021के अनुसार कृषि एवं कृषक कल्याण विभाग की कृषकों को देय अनुदान आधारित योजनाओं का भुगतान डी वी टी के द्वारा देने के निर्देश दिए गए हैं। आपूर्ति होने वाली सामग्री की गोविंद वल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय पंतनगर के माध्यम से सामग्री/ स्टाक की Sample Testing अनिवार्य रूप से की जाय जिसका कि अनुपालन नहीं करवाया गया।

13. उद्यान विशेषज्ञ कोटद्वार द्वारा श्री कमल सिंह ग्राम सीली हेतु राज्य सैक्टर सेब मिशन योजनान्तर्गत रोपण हेतु सेव के पौधों को जावेद नर्सरी कश्मीर को सीधे आदेश कर दो लाख पच्चीस हजार का भुगतान किया गया।

 14. दिनांक दिसम्बर ,14 -2021को निदेशालय द्वारा सेव पौधों की दरें बढ़ाई गई, दिनांक दिसम्बर, 30- 2021द्वारा नर्सरियों को सूचिबद्ध किया गया 30 दिसंबर 2021 को उद्यान विशेषज्ञ कार्यालय को जावेद नर्सरी कश्मीर द्वारा सेव बीजू पौधौ का दो लाख बाइस हजार रुपए का विल भी निर्गत कर दिया गया।

15. नियमों को दरकिनार कर जिस तेजी से दरें बढ़ाई गई, नर्सरियों को सूचिबद्ध किया गया आपूर्ति के आदेश निर्गत किए गए व बिलों का भुगतान किया गया इससे लगता है कि पौधों का आपूर्ति से पूर्व सत्यापन नहीं किया गया जिससे उत्तराखंड में सेव में वीषाणु रोग आने की पूरी संभावना है।

  उद्यान विशेषज्ञ कोटद्वार द्वारा बर्ष 2021 – 22 में बड़ी हुई कीमतों पर व्यक्ति पंजीकृत नर्सरी कश्मीर से क्रय किए गए सेव के पौधे-

1.सेव बीजू पन्द्रह हजार @ 14.80 कुल धनराशि दो लाख बाइस हजार। 

2.सेव कलमी क्लोनल रूट स्टाक पांच सौ @ 450 Rs कुल धनराशि दो लाख पच्चीस हजार।

    3. कश्मीर मजदूरों से बंधवाये गये ग्राफ्ट – उन्नीस हजार कुल धनराशि एक लाख अड़तीस हजार।

  उत्तराखंड सरकार का तीन हजार पांच सौ से अधिक कर्मचारियों वाला उद्यान विभाग कर्मचारियों के वेतन पर लगभग 142 करोड़ रुपए (एक सौ बयालिस करोड़ रुपए) प्रति बर्ष खर्च करता है। विभाग द्वारा सेव के बीजू पौधे व साइन उड के साथ ही साथ ग्राफ्ट बांधाने हेतु मजदूर भी कश्मीर से बुलाना विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिन्ह खड़े करता है। जब विभाग को बाहरी राज्यों से अप्रशिक्षित मजदूरों,बाहरी राज्यों की नर्सरियों से पौध क्रय करना है तो क्यों विभाग में प्रशिक्षित कर्मचारी रखे गए क्यों राज्य की नर्सरियों को रजिस्ट्रेशन किया गया है जब मानकों को पूरा नहीं करती। ऐसे ही बहुत सवाल विभागीय अधिकारियों, कर्मचारियों और उद्यानपतियों ने उठाए हैं…! उत्तराखंड की जीरो टॉलरेंस की राज्य सरकार और विभागीय मंत्रालय व माननीय विभागीय मंत्री और सूबे के मुख्यमंत्री क्या किसान हित में कोई ठोस उठा पाएगी या विभागीय किसानों का हक और सरकार पकी योजनाओं पर कालिख पोतने वाले ब्यूरोक्रेसी के मकड़जाल में फंसे रहेंगे।

प्रथम द्रष्टया यह निदेशालय के संरक्षण में संगठित भ्रष्टाचार का मामला प्रतीत होता है जिसकी जांच राज्य के बाहर की स्वतंत्र एजेंसी या सीबीआई के माध्यम से होनी चाहिए।

 सहयोग एवं साभार 

डा. राजेन्द्र प्रसाद कुकसाल पूर्व उद्यान विशेषज्ञ, उत्तराखंड सरकार एवं पुष्कर सिंह पवार, ‘पदम’

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