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कोटद्वार नगर निगम मेयर दावेदार चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबला

रिपोर्टर: Author August 5, 2026

 कोटद्वार नगर निगम मेयर दावेदार चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबला 

कोटद्वार। नगर निकाय चुनावों में कोटद्वार नगर निगम के दूसरे चुनाव में महापौर पद पर मुकाबला रोमांचक त्रिकोणीय बन बन गया है। दो राष्ट्रीय दलों के बीच सैनिक पृष्ठभूमि के निर्दलीय प्रत्याशी ने मुकाबले को रोमांचक मोड़ पर लाकर राष्ट्रीय दलों की नींद उडा़ दी है। इस रोमांचक त्रिकोणीय मुकाबले मुकाबले में सत्ताधारी डबल इंजन यानि भाजपा को तो लोहे के चने चबवाने पर विवश कर दिया है। राष्ट्रीय नेताओं से लेकर राज्य के मुख्यमंत्री से लेकर कैबिनेट मंत्रीयों की परेड भले ही कोटद्वार में हुई हो, विपक्षी दलों पर दबाव बनाने का भरसक प्रयास किया गया परन्तु कोटद्वार जनता की मौन प्रतिक्रिया ने भाजपा की नींद उड़ाकर रख दी है।
  बात करते हैं त्रिकोणीय मुकाबले के दावेदारों की…! सबसे पहले भाजपा के दावेदार पूर्व भाजपा कोटद्वार विधायक उसके बाद दो बार के यमकेश्वर विधानसभा के कांग्रेस विधायक के पराजित और वर्तमान में कोटद्वार से भाजपा के मेयर प्रत्याशी शैलेन्द्र रावत की। पिछले दस वर्षों से कांग्रेस के समर्पित सेवक और वर्तमान में भाजपा के निष्ठावान कार्यकर्ता सेवक के रूप में मेयर पद पर दावेदारी कर रहे शैलेन्द्र रावत का राजनीतिक कैरियर कोटद्वार में सर्वविदित है यानि कि उन्हें किसी राजनीतिक दल से परहेज़ नहीं वह तो सत्ता के सेवक हैं। शैलेन्द्र की यह भूमिका कोटद्वार में कितना कारगर होगी….! वैसे शैलेन्द्र रावत की कार्यशैली और व्यवहार आज भी भी कोटद्वार की जनता पर बना हुआ है शायद यही कारण रहा कि भाजपा  सरकार को लगा कि भाजपा की नैया अगर कोई पार लगा सकता है तो वह शैलेन्द्र रावत ही है।
 केन्द्रीय भाजपा नेतृत्व और भाजपा की राज्य सरकार की कोटद्वार की उपेक्षा को छिपाने के लिए भाजपा ने जातिगत और क्षेत्रीय फार्मूले के तहत शैलेन्द्र रावत को उम्मीदवार बनाया है परन्तु भाजपा के कुछ क्षत्रपों का राजनीतिक कैरियर शैलेन्द्र रावत के मेमर बनने से हमेशा के लिए गर्त में जाने की संभावना से इस चुनाव में शैलेन्द्र रावत के साथ बहुत बड़ा खेल खेला जा रहा है। राज्य के के मुख्यमंत्री से लेकर कैबिनेट मंत्रियों के सार्वजनिक भाषण और मिडिया में दी गई प्रतिक्रिया शैलेन्द्र रावत को बहुत बड़ा नुक्सान पहुंचा रही है।
  कांग्रेस की मेयर प्रत्याशी रंजना रावत महिला उम्मीदवार होने के साथ कांग्रेस की राजनीतिक तिकड़म से उम्मीदवार बनी है। सबसे बड़ी खामी रंजना रावत के साथ यह है कि उसे गढ़वाल मंडल और कांग्रेस के कद्वावर व कोटद्वार के विकास पुरुष पूर्व कैबिनेट मंत्री की नाराज़गी के बाद उम्मीदवार बनाया गया है। वैसे रंजना रावत कोटद्वार व लैंसडाउन में बहुत सक्रिय रही पूर्व में उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व को चुनौती देते हुए विरोध स्वरूप तथाकथित कांग्रेसियों के साथ कांग्रेस का विधानसभा चुनाव में विरोध किया था। रंजना रावत की कोटद्वार की जनता से व अंकिता भंडारी हत्याकांड में विरोध के लिए सहभागिता व नशा मुक्ति के संघर्ष के लिए कोटद्वार में पहचान है।
 त्रिकोणीय संघर्ष के तिसरे उम्मीदवार सैनिक पृष्ठभूमि और कोटद्वार के ट्रैचिंग ग्राउंड, किसानों की सिंचाई व्यवस्था,मालनपुल संघर्ष के साथ कोटद्वार की सड़कों,सीवर लाइनें के लिए निरंतर संघर्ष के साध पूर्व सैनिकों की ओआरपी समस्याओं सहित कई सामाजिक समस्याओं पर संघर्ष के बलबूते पहचान बनाने वाले महेंद्र पाल सिंह रावत ने जो अपने सैनिक संगठन के माध्यम से संघर्ष किया है वह कोटद्वार की सैनिक पृष्ठभूमि की जनता भली-भांति जानती है।
  उपरोक्त विवरणों के आधार पर कोटद्वार की जनता को निर्णय करना है कि भाजपा ने कोटद्वार की जनता को कितना समृद्ध बनाना डबल इंजन में।व कांग्रेस की पहली नगरनिगम सरकार ने कोटद्वार को क्या क्या तोहफे दिए…..?

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