उत्तराखण्ड में बदला राजनीतिक परिदृश्य
धुरन्धर राजनीतिज्ञों को आखिर में जनता ने क्यों नकारा?
क्या 2022 के विधानसभा चुनाव में युवा मतदाता को और महिलाओं मतदाताओं को पुराने राजनीतिक धुरन्धरों की कार्य शैली पसंद नहीं आई ?
बीजेपी से नाराजगी के बावजूद उत्तराखंडियो का दुबारा सत्ता में बैठा देना राजनीतिक परिदृश्य पर क्या गुल खिलाने वाला है ?
बीजेपी के उत्तराखंड मुखिया को जनता ने नकार कर क्या संदेश दिया ?
विपक्ष विशेषकर कांग्रेस क्यो जनता की भावनाओं को जान पाई ?
विपक्ष उत्तराखंड में भाजपा की गलतियों को और भाजपा सरकार की कमजोरियों को जनता तक पहुँचाने में कामयाब क्यों नहीं हो पाया ?
उत्तराखंड 2022 विधानसभा चुनाव एकबार फिर से जनता ने एग्जिट पोल एजेंसियों के अनुमानों को नकारते हुए भाजपा को दोबारा से सत्ता के सिंहासन पर बैठाकर जता दिया है कि जिस प्रकार जनप्रतिनिधि या र अपने स्वार्थपूर्ति के लिए जनता को अंधेरे में रखता है ठीक उसी तरह जनता ने चुनाव में चुप्पी साध कर अपनी भड़ास निकाली।
उत्तराखंड के चुनाव में जिस प्रकार महिलाओं और युवाओं ने विश्वास जताया वह निःसंदेह मोदी मैजिक ही रहा ।भाजपा के राष्ट्रवाद और हिन्दुत्व पर विश्वास कर दोबारा सत्ता सौपी है उससे साफ पता चलता है कि उत्तराखंड का युवा और मातृ शक्ति को विपक्ष विशेषकर कांग्रेस पर भरोसा नहीं ।
वही उत्तराखंड में 2017 में भाजपा से पराजित विपक्ष का पूरे पांच साल जनता से दूरियां बनाकर रखना, अपने निजी व्यक्तित्व को महत्व देना, सरकार की खामियों को जनता तक पहुँचाने में नाकामयाब होना, अपने निजी संगठनों की उपेक्षा करना,संगठनों को अपनी निजी कंपनियों की तरह उपयोग करना, अस्तित्व की लड़ाई में उलझे रहना और सबसे घातक साबित हुआ अनुशासन हीनता ।
बिना संगठित संगठनों और अनुशासित कार्यकर्ताओं के सहारे चुनाव के दंगल में ताल ठोकना,शराब माफियाओ, भूमाफिया,खनन माफियाओ के धन-बल के सहारे व चेहरों को मंचों पर प्राथमिकता देना,टिकट वितरण की खामियों ने विपक्ष को उबरने का मौका नहीं दिया ।
सबसे महत्वपूर्ण जिस प्रकार उत्तराखंड की जनता सरकार के मुखियाओं को नकार रही है उसका स्पष्ट संकेत है कि सरकार कोई भी बनाओ परन्तु अगर मुखिया के पास राज्य को मजबूत बनाने का सही विजय नहीं है या कहें राज्य की आवश्यक जरूरतों के अनुसार कार्ययोजनाए नही हैं तो सरकार का दोबारा मुखिया तो क्या जनप्रतिनिधि बनने लायक भी नहीं हो।राज्य की जनता को हवाई और फेकू घोषणाए करने वाला मुखिया नही बल्कि बुलडोज़र के दिल वाला मुखिया चाहिए ।