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कोटद्वार में गणपति विसर्जन की धूम

रिपोर्टर: Author August 5, 2026

 कोटद्वार में गणपति विसर्जन की धूम

  गणेश उत्सव को लेकर कोटद्वार में भी गणपति बप्पा के भक्तों ने पूरी श्रद्धा, भक्ति के साथ रविवार को खूब धूमधाम के साथ भगवान गणेश की प्रतिमा विसर्जन सिद्ध बली मंदिर के समीप खोह नदी में मंत्रोपचार के साथ अगले बरस राज्य और देश की समृद्धि की कामना व आशीर्वाद मांगकर किया।

फोटो और वीडियो धीरेन्द्र गुसाईं 

कोटद्वार में कुमाऊं सांस्कृतिक मंच का गठन 

  कोटद्वार गढ़वाल में कुमाऊं के लोगों की उपेक्षा के चलते वना मंच

 कोटद्वार निर्माण में कुमाऊं के लोगों का बुनियाद की तरह योगदान रहा है। कुमाऊं के पूर्वज कोटद्वार गढ़वाल में लकड़ी के ठेकेदारों और मजदूर के रूप में काम करने आए थे। कुमाऊं के पूर्वज अंग्रेजी शासन काल में 18वी सदी में कोटद्वार आए थे और उनके द्वारा कोटद्वार को गढ़वाल का प्रमुख शहर बनाने के लिए खून पसीने के साथ अपनी ज़मीन जायदाद का बलिदान करने में कोई कोताही नहीं बरती। कोटद्वार में कुमाऊं के लोगों को अपने बलबूते ही अपनी पहचान बनानी पड रही है। गढ़वाल में लगातार  उपेक्षा का शिकार कुमाऊं के लोगों ने अपनी सांस्कृतिक विरासत और अपनी नई पीढ़ी को कुमाऊं की संस्कृति, बोली, त्यौहारों से परिचित कराने को लेकर सांस्कृतिक मंच का गठन किया है। कुमाऊं सांस्कृतिक मंच के गठन करने के लिए हुकुम नेगी, सुधीर पांडे, प्रेरणा रावत, ममता नैलवाल, अश्विनी,देवेश कडाकोटी, जगदीश पांडेय, शंकरदत्त जोशी, बालकृष्ण,पूरन पांडेय और पुष्कर पवार ने अपना सहयोग दिया। सभी सदस्यों ने शीघ्र ही कार्यकारिणी का विस्तार पूरे गढ़वाल मंडल में करने का निर्णय लिया है।

विना अनुमति के भवन तोड़ने पर विवाद 

कोटद्वार में भू माफिया सरकार पर भारी

कोटद्वार उत्तराखंड के उन शहरों में गिना जाता है जो राज्य की राजनीतिक और सामाजिक बदलाव का अग्रिम पंक्ति में स्थान रखता है। चाहे सरकार में उलट-पुलट करवाना हो, बड़े से बड़े राजनीतिक को अर्श से फर्श पर लाना हो,या फिर किसी बड़े अधिकारियों को बली का बकरा बनाना हो। कोटद्वार के लोग हमेशा लगता है विवादों में रहना पसंद करते हैं। ऐसा ही एक मामला कोटद्वार में फिर देखने को मिला जब एक ठेकेदार द्वारा एन एच नजीबाबाद रोड पर बिना अनुमति के जीर्ण शीर्ण भवन को रात के अंधेरे में जेसीबी से थोड़ा जाने लगा तो लोगों और व्यापारियों का विरोध ठेकेदार को झेलना पड़ा।







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