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21 जून का भारतीय खगोल और ज्योतिष में महत्व

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रिपोर्टर: Author August 5, 2026

   21 जून के खगोलीय महत्व को जाने

21 जून का भारतीय खगोल और ज्योतिष में महत्व 

21 जून (ग्रीष्म अयनांत या कर्क संक्रांति) को कर्क रेखा पर सबसे बड़ा दिन और सबसे छोटी रात होती है

 21 जून का महत्व विश्व खगोल और ज्योतिष में बहुत महत्वपूर्ण है। 21जून के ही दिन सूर्य की किरणें कर्क रेखा पर लम्बवत पड़ती हैं। यह घटना ग्रीष्म अयनांत (Summer Solstice) कहलाती है। संक्रांति या अयनांत (Solstice) की घटना वर्ष में 2 बार ही होती हैं। इन्हें हम ग्रीष्म अयनांत (21 जून) और शीत अयनांत (22 दिसंबर) के नाम से जानते हैं। तो आइए बच्चों विस्तार से चर्चा करते हैं *अयनांत और विषुव* पर और जानते हैं कि अयनांत और विषुव क्या होते हैं?

संक्रांति या अयनांत (Solstice):-

 यह वर्ष की वे तिथियां हैं जिनमें दिन एवं रात की लंबाई में अंतर सर्वाधिक होता है। जैसे- 21 जून (ग्रीष्म अयनांत या कर्क संक्रांति) को कर्क रेखा पर सबसे बड़ा दिन और सबसे छोटी रात होती है इसी प्रकार 22 दिसंबर(शीत अयनांत या मकर संक्रांति ) को मकर रेखा पर सबसे बड़ा दिन और सबसे छोटी रात होती है।

   कर्क संक्रांति या ग्रीष्म अयनांत (Summer Solstice):-

21 जून को सूर्य कर्क रेखा पर लंबवत चमकता है परिणाम स्वरूप उत्तरी गोलार्ध में सबसे बड़ा दिन होता है और ग्रीष्म ऋतु होती है। जबकि दक्षिणी गोलार्ध में इस समय सूर्य तिरछा चमकता है। इससे वहां रातें बड़ी और दिन छोटे होते हैं और गर्मी कम होने से जाड़े की ऋतु होती है। क्यों कि 21 जून को सूर्य कर्क रेखा (साढ़े तेईस डिग्री उत्तरी अक्षांश) पर लम्बवत चमकता है और कर्क रेखा भारत के बीच से गुजरती है, इसीलिए भारत में 21 जून सबसे बड़ा दिन है। 21 जून का दिन कर्क रेखा पर स्थित अन्य देशों जैसे- माली, अल्जीरिया, नाइजर, लीबिया, चाड, मिस्र, सऊदी अरब, ओमान, भारत, बांग्लादेश, म्यांमार आदि (कुल 16 देश) सहित सम्पूर्ण उत्तरी गोलार्ध के लिए भी सबसे बड़ा दिन होगा।

वहीं 21 जून मकर रेखा (साढ़े तेईस डिग्री दक्षिणी अक्षांश) पर स्थित देशों  जैसे- अर्जेन्टीना,बोत्सवाना,दक्षिण अफ्रीका,आस्ट्रेलिया,नामीबिया,मोजाम्बिक,मेडागास्कर,चिली आदि (कुल 11 देश) सहित सम्पूर्ण दक्षिणी गोलार्ध के लिये सबसे छोटा दिन होगा।

 मकर सक्रांति या शीत अयनांत (Winter Solstice):-

22 दिसंबर को सूर्य मकर रेखा पर लंबवत पड़ता है जिससे दक्षिणी गोलार्ध में ग्रीष्म ऋतु होती है अर्थात दिन बड़े और रातें छोटी होती हैं जबकि उत्तरी गोलार्ध में सूर्य तिरछा चमकता है जिससे दिन छोटे और रात बड़ी होती हैं और गर्मी कम होने से जाड़े की ऋतु होती है।

क्यों कि 22 दिसंबर को सूर्य मकर रेखा (साढ़े तेईस डिग्री दक्षिणी अक्षांश) पर लम्बवत चमकता है और मकर रेखा ऑस्ट्रेलिया के बीच से गुजरती है, इसीलिए ऑस्ट्रेलिया में 22 दिसंबर सबसे बड़ा दिन होता है। और 22 दिसंबर का दिन मकर रेखा (साढ़े तेईस डिग्री दक्षिणी अक्षांश) पर स्थित देशों- अर्जेन्टीना,बोत्सवाना,दक्षिण अफ्रीका,नामीबिया,मोजाम्बिक,मेडागास्कर,चिली आदि (11 देश) सहित सम्पूर्ण दक्षिणी गोलार्ध के लिए भी सबसे बड़ा दिन होगा। वहीं 22 दिसंबर कर्क रेखा (साढ़े तेईस डिग्री उत्तरी अक्षांश) पर स्थित देशों जैसे- माली, अल्जीरिया, नाइजर, लीबिया, चाड, मिस्र, सऊदी अरब, ओमान, भारत, बांग्लादेश, म्यांमार आदि (कुल 16 देश) सहित सम्पूर्ण उत्तरी गोलार्ध के लिये सबसे छोटा दिन होगा।

           विषुव या Equinox:-

*विषुव* वह घटना है जब सूर्य की किरणें भूमध्य रेखा या शून्य डिग्री अक्षांश पर लंबवत पड़ती हैं। विषुव की घटना  21 मार्च व 23 सिंतबर को घटित होती है। 21 मार्च व 23 सितंबर को दोनों गोलार्द्धों में दिन रात बराबर होते हैं। वह इसलिए कि सूर्य ठीक भूमध्य रेखा या पृथ्वी के मध्य भाग में लम्बवत चमकता है।  21 मार्च को पड़ने वाले विषुव को *बसन्त विषुव (Vernal Equinox)* जबकि 23 सितंबर को पड़ने वाले विषुव को *शरद विषुव (Autumanal Equinox)* कहते हैं।

सूर्य 21 मार्च को भूमध्य रेखा या विषुवत रेखा या शून्य डिग्री अक्षांश पर लम्बवत चमकने के बाद धीरे-धीरे कर्क रेखा की ओर सरकता है और 21जून को कर्क रेखा पर लम्बवत चमकता है। इस प्रकार सूर्य 21 मार्च/बसंत विषुव को भूमध्य रेखा पर लम्बवत होने के बाद 22 मार्च को भूमध्य रेखा से 21 जून को कर्क रेखा तक पहुंचने में लगभग 3 माह लेता है। तथा 21 जून या कर्क संक्रांति या ग्रीष्म अयनांत को कर्क रेखा पर लम्बवत चमकने के बाद 22 जून से भूमध्य रेखा की ओर सरकने लगता है और 23 सितंबर/शरद विषुव के दिन पुनः भूमध्य रेखा/विषुवत रेखा पर 3 माह में पहुंच जाता है। 

साभार- हिंदी साहित्य भारती उत्तराखंड

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