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1250 से अधिक बूथ के मतदाताओं में से 50 प्रतिशत दूसरे बूथों में शिफ्ट

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रिपोर्टर: Author August 5, 2026

 1250 से अधिक बूथ के मतदाताओं में से 50 प्रतिशत दूसरे बूथों में शिफ्ट 

निर्वाचन आयोग द्वारा प्रति उम्मीदवार  30 लाख 80 हजार तक की धनराशि व्यय करने का प्रावधान 

कलालघाटी पोलिंग बूथ में 1250 से अधिक मतदाता होने के चलते  50 प्रतिशत मतदाता दूसरे बूथ में शिफ्ट 

आचार सहिंता लागू होने के बाद कोई भी राजनैतिक दल सरकार सम्पतियों पर चुनाव संबंधी सामाग्री नही लगा सकता 

निजी संपत्ति पर चुनाव सामाग्री लगानी हेतु सम्बंधित मालिक से सहमति लेना जरूरी

आगामी विधान सभा सामान्य निर्वाचन-2022 को स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं सफलतापूर्वक संचालन हेतु जिला मजिस्ट्रेट/जिला निर्वाचन अधिकारी गढ़वाल डॉ. विजय कुमार जोगदण्डे की अध्यक्षता में शनिवार को कलेक्ट्रेट कक्ष पौड़ी में राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बूथों का परिवर्तन तथा चुनाव सामाग्री दर के संबंध में बैठक आयोजित की गई। जिला निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि 1250 से अधिक बूथ के मतदाताओं को 50 प्रतिशत दूसरे बूथों में शिफ्ट किया गया है। जिससे लोगों को मतदान हेतु परेशानियों का सामना नही करना पड़ेगा। उन्होंने उपस्थित राजनैतिक पार्टी के प्रतिनिधियों को कहा कि अपने ओर से भी मतदाताओं को बूथों की जानकारी देने हेतु जागरूक करें। जिससे उन्हें अपने-अपने बूथों की जानकारी मिल सकेगी। साथ ही उन्होंने चुनाव सामाग्री पर चर्चा करते हुए कहा कि निर्वाचन आयोग द्वारा प्रति उम्मीदवार हेतु 30 लाख 80 हजार तक की धनराशि व्यय करने का प्रावधान किया गया है, इससे ज्यादा प्रत्याशी खर्च नही कर सकता है।

       जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. जोगदण्डे ने आयोजित बैठक में राजनैतिक दलों के पदाधिकारियों को जानकारी देते हुए कहा कि जनपद में 05 बूथों का परिवर्तन किया गया है। कहा कि चौबट्टाखाल के प्राथमिक विद्यालय खालयूंडांडा पोलिंग बूथ में पेड़ गिरने से उच्चतर माध्यमिक खालयूंडांडा शिफ्ट किया गया है। साथ ही लैंसडाउन के जीजीआईसी लैंसडाउन बूथ को परिसर में ही दूसरे जगह शिफ्ट तथा कोटद्वार के पदमपुर पंचायत भवन में बूथ को 100 मीटर दूर स्थित बनाया गया है। इसके साथ ही गुरु राम रॉय पब्लिक स्कूल पदमपुर कोटद्वार तथा राजकीय प्राथमिक विद्यालय कलालघाटी पोलिंग बूथ में 1250 से अधिक मतदाता होने के चलते परिसर में ही दूसरे कक्षो में 50 प्रतिशत मतदाता शिफ्ट किये गए हैं।  कहा कि जो मतदाता शिफ्ट किये गए हैं उनकी सूची भी तैयार की गई है। साथ ही उन्होंने चुनाव सामाग्री में चर्चा करते हुए कहा कि रूल 90 में प्रत्याशियों के खर्चे का विवरण समलित है। साथ ही उन्होंने कहा कि  आदर्श आचार सहिंता लागू होने के बाद कोई भी राजनैतिक दल सरकार सम्पतियों पर चुनाव संबंधी सामाग्री नही लगा सकता है। उन्होंने राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों को कहा कि निजी संपत्ति पर चुनाव सामाग्री लगानी हेतु सम्बंधित मालिक से सहमति लेना जरूरी है। 

इस अवसर पर मुख्य कोषाधिकारी गिरीश चंद्रा, सहायक निर्वाचन अधिकारी विजय तिवारी, राजनैतिक पार्टी से ओमप्रकाश जुगरण, राजेंद्र सिंह रावत, त्रिलोक सिंह रावत, अनिल कुमार सहित अन्य उपस्थित रहे।


राज्य के 29 नए सहकारिता बैंकों तथा हल्द्वानी डाटा सेंटर का लोकार्पण 



प्रदेश के उच्च शिक्षा, सहकारिता, प्रोटोकॉल, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने शनिवार को एनआईसी कक्ष पौड़ी से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से राज्य के 29 नए सहकारिता बैंकों तथा हल्द्वानी डाटा सेंटर का लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि लोगों को पहले दूर-दूर से आ कर बैंकों के चक्कर काटने पड़ते थे, लेकिन अब राज्य सरकार ने शहर क्षेत्रों के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में भी बैंक स्थापित किये हैं। कहा कि बैंकों के साथ-साथ एटीएम मशीन भी लगाए जा रहे हैं। जिससे लोगों को बैंकों में कम से कम जाना पड़े। उन्होंने कहा कि केंद्र व राज्य सरकार ने विकास कार्यों में कोई कसर नही छोड़ी है। कहा कि स्वरोजगार अपनाने वाले किसानों को बैंक के माध्यम से कम ब्याज दर पर ऋण दिया जा रहा है। जिससे किसान स्वरोजगार से जुड़ रहे हैं।

       मा. मंत्री डॉ. रावत ने एनआईसी कक्ष से वर्चुअल माध्यम से अल्मोड़ा जिले में 2 शाखा, बागेश्वर 2, नैनीताल 4 उधम सिंह नगर 5, पौडी 1,चमोली 2, टिहरी 4, पिथौरागढ़ 4 तथा देहरादून के 04 बैंक शाखाओं का लोकार्पण किया।   कहा कि प्रदेश में पिछले 2 माह में बैंकों की 80 नई शाखाओं का शुभारंभ किया गया है। वर्तमान में राज्य सरकार ने 100 से अधिक नई शाखाओं का संचालन शुरू किया गया है। साथ ही उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कचहरी कल्याण योजना का पूरे प्रदेश में अच्छा परिणाम मिल रहा है। एक माह के भीतर प्रदेश भर में 100 नए एटीएम मशीनें स्थापित किये जायेंगे। जिससे लोगों को परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा। 

     इस अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष यशपाल बेनाम, अध्यक्ष राज्य मत्स्य सहकारी संघ अशोक वर्मा, राज्य सहकारी बैंक के प्रबंध ईरा उप्रेती, प्रबंध निदेशक यूपीएफ मंगला त्रिपाठी सहित अन्य उपस्थित रहे।


    आरक्षी पुलिसकर्मियों का ग्रेड पे सरकार की गले हड्डी बना 

 

   आरक्षी पुलिसकर्मियों का वीआरएस और इस्तीफा देने की हुई शुरुआत

 4600 ग्रेड लागू न करने पर उत्तराखंड सरकार को चुनावी समर में उठानी पड़ सकती है भारी मुसीबतें 


मुख्यमंत्री धामी का आरक्षियों पुलिस कर्मियों को दिया 2 लाख का झुनझुना काम नहीं आया 


जब किसी भी राज्य के कर्मचारियों के परिजनों को सड़कों पर उतरकर अपने परिजनों की लगाई लड़नी पडे तो समझ लेना चाहिए कि या तो सरकार निरंकुश है,सत्ता के मद में चूर है जिसे अपनी सनक के आगे सब कीड़े मकोड़े नजर आते हैं। ऐसा ही मामला उत्तराखंड में पुलिस महकमे में देखने को मिल रहा है जो राज्य औश्र पूलिंग की रुचि की हड्डी को तोड़ने का काम कर रही है। सरकार के इसी तानाशाही रवैए के खिलाफ आरक्षी पुलिस कर्मियों के परिजन कई महिनों से सड़कों पर उतरकर राज्य सरकार को चेता रहे हैं।




 कोटद्वार। सितंबर अक्टूबर 2021 से आरक्षी पुलिसकर्मियों का का वेतन विसंगति, पेंशन और प्रमोशन की मांग ने सरकार की मुसीबतें बढ़ा दी है। गौरतलब है कि अक्टूबर माह में मुख्यमंत्री धामी ने पुलिस कर्मियों की 4600 ग्रेड पे मामले को संज्ञान में लेते हुए शीघ्र शासनादेश जारी करने की बात कही लेकिन तीन माह बाद भी शासनादेश जारी न होने से  2001 में भर्ती हुए आरक्षी पुलिस कर्मियों में खासी नाराजगी होने लगी है। आरक्षी पुलिसकर्मियों के अनुसार 20 साल सेवा करने के बाद भी न प्रमोशन,,न ग्रेड पे में सुधार , जबकि अन्य राज्यों में 20 साल सेवा करने के बाद प्रमोशन और ग्रेड पे दोनों मिला है वहीं राज्य के अन्य विभागों में भी प्रमोशन और ग्रेड पे की सुविधा मिली है तो आरक्षी पुलिस कर्मियों से भेदभाव क्यों ? आरक्षी पुलिस कर्मी अपने विभाग और सरकार के सौतेले भेदभाव से नाराज़ और सेवा में आरक्षियों के साथ बंधुवा मजदूर की तरह व्यवहार से खासे नाराज़ हैं। आरक्षी पुलिस कर्मियों का कहना है कि राज्य सरकार और उनका विभाग उनकी मानसिक तनाव से भरी सेवा को कम आंकने का काम कर रहा है वहीं उनके तीज त्यौहार पर अपने परिवार से दूर रहकर ड्यूटी करते हैं रात दिन परिजनों के दुख-सुख को नजरंदाज कर सेवा देते हैं उसके वावजूद न तो सरकार ने ही विभाग उनकी पीड़ा समझ रहा। ऐसी स्थिति में अब उनके पास अपना स्तीफा देने,या वीआरएस लेने के सिवाय कोई रास्ता नहीं बचता। इसी प्रकरण को लेकर अल्मोड़ा जिले के एक आरक्षी का विभाग को दिया इस्तीफा सोसल मीडिया और विभाग में जहां चर्चाओं में हैं वहीं राज्य सरकार और विभाग के लिए ढेर सारी मुसीबत बनने का सबब। बात यहीं खत्म नहीं हो जाती राज्य की आरक्षी पुलिस कर्मियों द्वारा 8 जनवरी 20220 को काला दिवस मनाने की घोषणा ने सीधा संकेत दे दिया है, अगर आरक्षी पुलिस कर्मियों की मांग पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता तो आगे आने वाले समय में पुलिस कर्मियों की नाराजगी झेलनी सरकार को भारी पड़ सकती है। अब देखना यह है कि पहले विभाग संज्ञान लेता है या फिर राज्य सरकार।

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