रिपोर्टर: Author
August 5, 2026
हाथों से दिव्यांग भारती की चित्रकला बेमिसाल
रिपोर्ट – पुष्कर सिंह पवार
प्रतिभा और हौसला किसी को भी बुलंदियों तक पहुंचा सकती है, चाहे उसके सामने कैसी भी कठिनाई या कहें अनहोनी क्यों न हो. आज के युग में दिव्यांगता को पछाडकर अपने सपनों को पूरा करने का हौसला जिस किसी में भी हो उसे कैसी भी कठिनाई, विपदा और समस्या सफल होने से रोक नहीं सकती.
आज लोक संवाद टुडे अपने पाठकों और दर्शकों को एक ऐसी जीवट, सशक्त युवा बालिका से रुबरु करा रहा है जिसके पास हुनर, प्रतिभा, हौसला और समाज को आईना दिखाने की हिम्मत है. अपनी दिव्यांगता को कमजोरी न मानते हुए मां और गुरुजनों के आशीर्वाद से चित्रकला के क्षेत्र में बुलंदियों को छूने लगी है.
बात कर रहे हैं रामनगर, पीरुमदारा ग्रामीण कस्बे की रहने वाली दिव्यांग चित्रकार युवा बालिका स्व. पिता डोरी लाल सैनी व माता बीना गृहणी सैनी की की सुयोग्य पुत्री भारती सैनी की, जो दोनों हाथों की कलाईयों से मरहूम है. परन्तु चित्रकला में माहिर कलाकार है. वर्तमान में भारती अल्मोड़ा पीजी कालेज से ड्राइंग में स्नातक की पढ़ाई कर रही है.
भारती की प्रतिभा को पहचान कराई उधमसिंह जिले/रुद्रपुर की सामाजिक संस्था ‘भाईचारा एकता मंच’ ने. संस्था द्वारा भारती सैनी को महिला दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में सम्मानित किया गया, जहाँ लोक संवाद टुडे को भारती की प्रतिभा का संज्ञान हुवा.
भारती ने बताया कि उनकी दोनों कलाईयां बचपन में दुर्घटना वश काटनी पडी़. पिता ने बचपन में ही परिवार का साथ छोड़ दिया. मां ने मेहनत मजदूरी कर पढाने के साथ हिम्मत और हौसला अफ़ज़ाई की. प्राथमिक से बारहवीं तक पीरुमदारा के निजी विद्यालय में शिक्षा दिलवाई. स्कूली शिक्षा के दौरान चित्रकला का शौक हुवा वाद में वह जुनून बन गया. मेरी चित्रकला के प्रति जुनून को शिक्षकों और माता ने समझा और प्रोत्साहित किया. भारती ने बताया कि वह दिल्ली के हैबीटेट सेंटर में अपनी प्रदशर्नी लगा चुकी है जहाँ उसे बहुत अच्छा रिस्पांस मिला. भारती ने बताया कि भविष्य में वह चित्रकला क्षेत्र में उत्राखंड की धरोहर ऐंपड़ चित्रकला पर शोध और कार्य करना चाहती है. लोक संवाद टुडे भारती को उसकी प्रतिभा और हौसले पर शुभकामनाएँ देता है.