हर बीमारी का ईलाज आपकी रसोई में
आयुर्वेद और घरेलु मशाले, तंदुरुस्ती का खजाना।
मित्रों लोक संवाद टुडे आज आपको खबरों की दुनिया से अच्छे स्वास्थ्य की ओर लिए चलता है। आज हम आपको आपकी रसोई में छुपे बेहतरीन स्वास्थ्य करने के बुजुर्गों के अनुभव आधारित नुस्खों से परिचित करा रहा है। मित्रों वर्षा ऋतु में कफ, पित्त और वात का प्रकोप खानपान और मौसम की अनिमितता के कारण बढ़ जाता है।
वात, पित्त, कफ को सम रखने के एवं ठीक करने के सरल प्राकृतिक उपाय:-
➡️ जीवन में वात पित्त और कफ के बिगड़ने पर ही रोग आते है.
➡️ वात शरीर मे प्रातः को बढ़ता है।
➡️ पित्त शरीर मे दोपहर को बढ़ता है और
➡️ कफ शरीर मे रात को बढ़ता है।
➡️ नाभि से लेकर पैरों तक वात कर रोग है।
➡️ नाभि से लेकर छाती तक पित्त के रोग है।
➡️ छाती से लेकर सिर तक कफ के रोग है।
➡️ इन तीनो दोषों को सम पर रखने के सरल उपाय
यदि कोई खानपान में थोड़ा सा बदलाव करे तो जीवनपर्यंत निरोगी रह सकता है!
➡️ वात:-
➡️ तेल शुद्ध खाएं, सबसे अच्छा सरसों है।
➡️ दूध देशी गाय का पियें ।
➡️ संतरा, मौसमी, गन्ने का जूस, टमाटर, अंगूर आदि खाये।
➡️ पित्त:-
➡️ देशी गाय का शुद्ध घी खायें।
➡️ छाछ का सेवन करे।
➡️ दोपहर को भोजन में अजवाइन अवश्य डालें।
➡️ अजवाइन नही डालते हो तो भोजन के बाद एक चुटकी अजवाइन काले नमक के साथ खाएं।
➡️ काले जीरे का प्रयोग करे।
➡️ हींग का प्रयोग करे
➡️ धनिया का प्रयोग करें, हरा हो या सूखा।
➡️ कफ:-
सेवनीय पदार्थ :-
➡️ गुड़
➡️ मधु
➡️ सोंठ
➡️ सौंफ
➡️ पान का पत्त्ता
➡️ आवंला इन तीनो दोषों को अकेला ही ठीक रखता है।
➡️ देशी गाय का गौमूत्र, वात और कफ के रोग एव कुछ आयुर्वेदिक उपाय के साथ पित्त के रोग, इन तीनों दोषों से होने वाले 148 रोगों को अकेला ही ठीक कर देता है।