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सिद्धबली मंदिर समीति द्वारा अतिक्रमण के नाम पर उजाडी़ दुकानों के नाम पर बड़ा खेला तो नहीं…..? ‌‌

रिपोर्टर: Author August 5, 2026

  सिद्धबली मंदिर समीति  द्वारा अतिक्रमण के नाम पर उजाडी़ दुकानों के नाम पर बड़ा खेला तो नहीं…..? ‌‌

 क्या सिद्धबली बाबा तमाशा देखते रहे….? 

 सिद्धबली मंदिर समीति की धर्मशाला क्या वैध जगह पर है… ? 

 कोटद्वार। आजकल पौड़ी जिले में अतिक्रमण को लेकर हाईकोर्ट के कंधे पर उसके निर्णय को लेकर पौड़ी के स्वरोजगार से जुड़े लोगों, रिजोर्टों, धार्मिक मठाधीशों व जिले के कुछ जनप्रतिनिधियों की सत्ता के हनक और लालच की प्रवृत्तियों ने सैकड़ों परिवारों की रोजीरोटी छीन ली है। 

  गौरतलब है कि उत्तराखण्ड के पौड़ी जिले में कोटद्वार से लेकर श्रीनगर, लक्ष्मणझूला से लेकर नैनीडांडा विकास खंड तक वन विभाग लोनिवी, राजस्व विभाग की अधिकांश भूमि पर धर्म के ठेकेदार मठाधीशों, बाहरी राज्यों के होटलौर रिजोर्टों के स्वामियों सहित भूमाफिया द्वारा अवैध अतिक्रमण सत्ता के सहयोग से किया हुआ है। 

  आजकल पौड़ी जिले में में अतिक्रमण के नाम पर उत्तराखण्ड के पहाड़ी स्वरोजगार से जुड़े लोगों को डबल इंजन की सरकार हाईकोर्ट के निर्दैशों की आड़ में बमुश्किल परिवार का गुजर बसर करने वाले व्यवसायियों को निशाना बना कर उजाड़ रही है। कोटद्वार, गुमखाल, सतपुली, फाडींसैड, के सड़क के किनारे आजादी से पहले से लेकर राज्य स्थापना से पूर्व जलपान, पहाडी उत्पादों व रोजमर्रा की दैनिक जरूरतों की दुकानें चला रहे हैं लेकिन डबल इंजन की सरकार व उनके विभागों को पहाडि़यों का यह रोजगार सहन नहीं हुवा। 

  कोटद्वार के कौडिया से लेकर सिद्धबली तक, कोटद्वार बाजार के व्यापारियों का गोखले मार्ग बाजार, गंगादत्त जोशी मार्ग बाजार स्टेशन रोड बाजार, देवी रोड मार्ग बाजार सहित समस्त बाजार अतिक्रमण का शिकार है लेकिन अतिक्रमण हटाने के नाम पर फड ठेली और रेहड़ी व छोटे दुकानदार वाले ही नजर आते हैं। 

  कोटद्वार के विश्व प्रसिद्ध सिद्धबली धाम के निकट बसाए गए मंदिर समीति के दुकानदारों को लोनिवी के अतिक्रमण पर उजाड़ दिया, सिद्धबली मंदिर समीति वर्षों से दुकानदारों से दाननामें के नाम से लोनिवी की सम्पत्ति का किराया/दान ले रही थी यह कितना सच और कितना झूठ है….? यह तो मंदिर समीति और दुकानदार ही बता सकते हैं । सिद्धबली बाबा मंदिर समीति का खेला दिन के उजाले में देख रहे थे। देखना यह होगा कि बाबाजी किसके साथ होंगे….? 

  एक महत्वपूर्ण जानकारी सूत्रों से मिल रही है कि दुकाने उजाड़ने के बाद खोह नदी के तट पर हाथु कारीडोर वाली जगह पर सिंचाई विभाग व वन विभाग को दबाब बनाकर पार्किंग के लिए भूमि उपलब्ध कराने का दबाव भी बनाया जा रहा है। बात यहीं खत्म नहीं होती सिंचाई विभाग द्वारा वन विभाग के सहयोग से पार्किंग का सर्वे सहित नापजोख तक हो चुकी है। यह कौन करवा रहा है….? क्यों करवा रहा है….? किसे लाभ पहुंचाया जा रहा है यह तो कुछ दिनों में जग जाहिर ही जाएगा….! 

 सिद्धबली मंदिर के निकट बने जंगल/हाथी कारीडोर  में बने दो ढाबे, मंदिर समीति की अतिक्रमण की जद बनी धर्मशाला कैसे बची, किसने बचाई‌ क्यों बचाई यह सवाल आम आदमी के जहन में कुलबुला रहा है देखना होगा कि डबल इंजन की सरकार कितनी ईमानदार है…..? 

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