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August 5, 2026
सार्थक निर्णय – निर्दोष और निरपराध लोगों पर धारा 107/116 , उत्तराखण्ड में हाईकोर्ट की रोक
दुरूपयोग नहीं कर सकते धारा 107/116 का – उत्तराखण्ड हाईकोर्ट
कोटद्वार के आलोक रावत की कानूनी लड़ाई से उत्तराखण्ड के निरपराध और निर्दोष लोग भयमुक्त होकर चुनाव में होंगे शामिल
आलोक रावत
माननीय उच्च न्यायालय के निर्णय की फोटो प्रतिलिपि
कोटद्वार. भा.द.सं. की धारा 107/116 का चुनाव के दौरान स्थानीय प्रशासन और पुलिस द्वारा अधिकांशतः दुरूपयोग होता देखा गया है, यही नहीं सत्ताधारी दलों द्वारा स्थानीय प्रशासन व पुलिस पर दवाब बनाकर भी अक्सर धारा का दुरूपयोग किया जाता है. विशेषकर भाजपा शासित सरकारों में धारा 107/116 का दुरूपयोग कर आमजनमानस को जिनका न कोई अपराधिक रिकॉर्ड नहीं होता है, न किसी राजनीतिक दल के कार्यकर्ता के रूप में विवादित कार्य होता उसके वावजूद निरपराध लोगों पर धारा का दुरूपयोग कर चुनावी माहौल में भय का वातावरण तैयार करने का कुचक्र स्थानीय प्रशासन, पुलिस और सत्ताधारी दलों द्वारा किया जाता है.
भा.दं.सं. के अनुसार किन लोगों पर लगता है आईपीसी की धारा 107/116 का नियम
आईपीसी की धारा 107/116 के पुलिस और स्थानीय प्रशासन द्वारा दुरुपयोग से नाराज कोटद्वार शिवराजपुर, मोटाढांग निवासी, पूर्व जिला पंचायत सदस्य, सामाजिक व्यक्ति व किसान आलोक रावत ने उत्तराखण्ड हाईकोर्ट में राष्ट्रीय, राजकीय और स्थानीय चुनावों के दौरान 107/116 के दुरुपयोग और निर्दोष लोगों को जबरन अपराधिक श्रेणी में खड़ा करने के खिलाफ याचिका दाखिल की. आलोक रावत की याचिका का जनहित में दाखिल याचिका का हाईकोर्ट के माननीय न्यायधीश एस के मिश्रा की खंडपीठ ने गंभीरता से संज्ञान लेते हुए आलोक रावत के पक्ष में निर्णय देते हुए माना कि स्थानीय प्रशासन और पुलिस धारा का दुरूपयोग करती है. भविष्य में स्थानीय प्रशासन और पुलिस को धारा 107/116 के दुरूपयोग पर बचने और अवांछित लोगों पर ही धारा का इस्तेमाल करने का निर्णय दिया.
आलोक रावत का कहना है कि स्थानीय प्रशासन, पुलिस और सत्ताधारी दल के लोग चुनावों के दौरान अपनी निजी खुन्नस निकालने, चुनावों में अपनी पावर का प्रभाव जमाने तथा विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं, आमजनमानस को कानून का भय दिखाकर चुनाव परिणामों को सत्ताधारी दल के पक्ष में करने का कुक्षित प्रयास करते हैं. आईपीसी की धारा 107/116 अपराधिक प्रवृत्ति के लोगों को रोकने के लिए है न कि आमजनमानस को. मुझ जैसे कई निरपराध, निर्दोष लोगों को जब चुनाव के दौरान 107/116 के बार बार नोटिस आने लगे तो उन्होंने निरपराध व निर्दोष लोगों को भयमुक्त करने के लिए कानून का सहारा लिया. मैं उत्तराखण्ड हाईकोर्ट, निर्णायक विद्वान न्यायधीशों, पैरवी में सहयोग करने वाले वकीलों और ईश्वर का धन्यवाद करता हूँ कि उच्च न्यायालय के इस निर्णय से भविष्य में राज्य के निर्दोष और निरपराध लोगों को चुनाव के दौरान भय के माहौल से छुटकारा मिलेगा.


