रिपोर्टर: Author
August 5, 2026
संदिग्ध परिस्थितियों में युवक का शव बरामद
कोटद्वार – कोटद्वार थाना क्षेत्र के अंतर्गत गिवईश्रोत नदि में एनएच 534 से दो सौ मीटर की दूरी पर एक युवक का संदिग्ध परिस्थितियों में शव बरामद हुआ है। सूचना मिलने पर पुलिस ने मौके पर पँहुच कर शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। थाना प्रभारी नरेंद्र बिष्ट के अनुसार प्रथम दृश्यता युवक के मौत का कारण एक्सीडेंट या पैर फिसलने कारण हुई है। वंही मृतक के जेब से आईडी कार्ड मिला है जिसमे मंसूफ अहमद लिखा हुआ है और दिल्ली का एड्रेस है।
शिनाख्त के लिए स्थानीय मौलवी और मुस्लिम समुदाय के लोगो को बुलाया गया है। मौत के कारणों को जानने के लिए शव का पंचायतनामा भर कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
कोटद्वार नगर निगम द्वारा गाड़ीघाट में नदी किनारे व आबादी वाले क्षेत्र के निकट कूड़ा डाले जाने के विरोध में संस्कार कला केंद्र के अध्यक्ष सुधीर बहुगुणा के साथ विरोध जताते हुए धरना प्रदर्शन किया और कूडे के वाहनों को ट्रेचिंग ग्राउंड नहीं फेंकने दिया। स्थानीय निवासियों और सुधीर बहुगुणा के अनुसार काफी समय से नदी किनारे कूड़ा डाले जाने का और ट्रेचिंग ग्राउंड के बाहर कूड़ा डालने का नगरनिगम ने कोई ठोस उपाय नहीं किया है। और न ही इस समस्या का अब तक कोई हल नही निकाला गया।
ट्रेचिंग ग्राउंड के बाहर फैले कूडे के कारण कई तरह की बीमारियां फैलने, पूरे गाडीघाट क्षेत्र,कुम्भीचौड, रतनपुर,ग्रास्टनगंज मे बदबू से लोगों का जीवन दूभर हो गया वहीं खोह नदी का जल प्रदूषित होने की आशंका हमेशा बनी रहती है। सुधीर के अनुसार जब तक नगर निगम इस सम्बंध में ठोस कार्रवाई नही करता तब तक इस स्थान पर कूड़ा नही डालने दिया जाएगा। मंगलवार सुबह भी कूड़ा डालने आयी गाड़ियों को स्थानीय निवासियों ने सुधीर बहुगुणा के नेतृत्व मे रोक रोक दिया।
कूड़ा डालने के दौरान कूड़ा डालने वाले वाहन चालक ने विरोध करने वाले लोगों पर वाहन चडाने का प्रयास किया तो पुलिस प्रशासन ने भी विरोध करने वालों पर मुकदमा करने की कार्यवाही का भय दिखाया, परन्तु विरोध करने वालों के तेवर देख पुलिस प्रशासन को पीछे हटना पड़ा। विरोध करने वालों में बच्चे, बूढ़े, महिलाएं और यवाओ ने पुरजोर विरोध किया। गौरतलब है कि कोटद्वार नगर निगम की इस गंभीर समस्या पर क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियो, राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठन की उपेक्षा समझ से परे है।ये राजनीतिक जनप्रतिनिधि दिल्ली, मुम्बई में हुई घटनाओं पर कैंडल मार्च, धरना प्रदर्शन से लेकर भूख हड़ताल तक कर जाते हैं लेकिन स्थानिय गंभीर समस्याओं पर ईनकी चुप्पी स्वार्थ से जुड़ी नजर आती है।


