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August 5, 2026
शिक्षा विभाग के मातहत का तुगलगी फरमान, सेवा नियमावली के नियम कानून ताक पर
जिला शिक्षा अधिकारी के तुगलगी पत्र से महकमे में भूचाल
जब कोई सरकार निरंकुश और तानाशाह हो जाती है तो वह ऐसे ऐसे काम करने लगती है कि संबिधान से से लेकर सारे नियम कानून उन्हें कूढे़ का ढेर नजर आने लगता है. सरकारी मशीनरी का दुरूपयोग करना, सरकारी मातहतों को घर के ढोर डंगर की तरह इस्तेमाल करना ऐसी सरकारों का अनैतिक हथियार बन जाता है. ऐसा ही कुछ वर्तमान उत्तराखण्ड सरकार के कार्यकाल में देखने को मिल रहा है. वाकया शिक्षा विभाग से जुडा होने से काफी गंभीर और अनुशासनहीनता का दिखाई पढ़ रहा है. मामला कुमाऊँ के अल्मोड़ा जिले से सम्बन्धित है जहाँ जिला शिक्षा अधिकारी के विद्यालयों को भेजे सरकारी पत्र ने बबाल मचा दिया है.
जिला शिक्षा अधिकारी के पत्र का संज्ञान लेकर शिक्षकों और विद्यार्थियों को असमंजस की स्थिति से गुजरना पड़ा, जिसको लेकर भाकपा, भाकपा माले व माकपा ने संयुक्त रूप में नाराजगी जताते हुए जिला शिक्षा अधिकारी को बर्खास्त करने को लेकर महामहिम राज्यपाल और राज्य के शिक्षा निदेशक को पत्र लिखकर शिकयत दर्ज काराई है.
शिकायत पत्र में अल्मोड़ा जिले के मुख्य शिक्षा अधिकारी सत्य नारायण द्वारा 13 फरवरी 2023 को जारी पत्र, जिसका पत्रांक 13519-26/ विविध/ प्रबंध- 03 / जिला सम्मेलन / 2022.23 है, अल्मोड़ा शहर के सभी इंटर कॉलेजों के प्रधानाचार्य / प्रधानाचार्याओं को भेजा. उक्त पत्र में मुख्य शिक्षा अधिकारी श्री सत्य नारायण द्वारा निर्देश जारी किया गया कि 16 फरवरी को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के जिला सम्मेलन में कक्षा 09 एवं कक्षा 11 के छात्र / छात्राओं को दो अध्यापकों के साथ प्रतिभाग करवाने का निर्देश जारी किया है .
कोई छात्र संगठन अपना सम्मेलन करे और उसकी यह इच्छा हो कि उसमें छात्र- छात्राओं की अधिकतम भागीदारी हो, यह वाजिब है. लेकिन किसी जिले के मुख्य शिक्षा अधिकारी, किसी छात्र संगठन के सम्मेलन के लिए भीड़ जुटाने का काम अपने हाथों में ले लें और इसके लिए अपने अधीनस्थों को लिखित आदेश जारी करें, यह किसी हाल में सही नहीं ठहराया जा सकता है.
मुख्य शिक्षा अधिकारी का काम, किसी राजनीतिक पार्टी के छात्र संगठन के लिए भीड़ जुटाना नहीं बल्कि उनका काम है कि वे अपने प्राधिकार में आने वाले विद्यालयों में नियमित पठन-पाठन करवाएँ. लेकिन अल्मोड़ा के मुख्य शिक्षा अधिकारी ने ऐसे समय में छात्र-छात्राओं को एक छात्र संगठन के सम्मेलन में भेजने का आदेश किया है, जबकि परीक्षाएं सिर पर हैं.ब
राज्य की बोर्ड परीक्षाओं के प्रतियोगात्मक परीक्षाएं विद्यालयों में चल रही हैं. भाकपा के समर भंडारी, भाकपा माले के इंद्रेश मैखुरी और माकपा के राजेन्द्र सिंह के संयुक्त शिकायती पत्र के अनुसार-
महोदय / महोदया, अल्मोड़ा जिले के मुख्य शिक्षा अधिकारी का यह कृत्य अनैतिक तो है ही, यह विधि विरुद्ध भी है. उत्तराखंड में लागू राज्य कर्मचारी आचरण नियमावली 2002 की धारा 5 (1) कहती है कि “कोई सरकारी कर्मचारी किसी राजनीतिक दल या किसी ऐसी संस्था का, जो राजनीति में हिस्सा लेती हो, सदस्य न होगा और न अन्यथा उससे संबंध रखेगा और न वह किसी ऐसे आंदोलन में या संस्था में हिस्सा लेगा या किसी अन्य रीति से उसकी मदद करेगा……….”
उपरोक्त से स्पष्ट है कि छात्र-छात्राओं को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सम्मेलन में भेजने का आदेश जारी करके अल्मोड़ा के मुख्य शिक्षा अधिकारी सत्य नारायण ने अपने पद का दुरुपयोग किया है और साथ ही राज्य कर्मचारी आचरण नियमावली का भी उल्लंघन किया है.
अतः उन्हें तत्काल निलंबित करते हुए, उनके पद से हटाया जाये और यह सुनिश्चित किया जाये कि भविष्य में जिम्मेदार पद पर बैठा कोई अधिकारी इस तरह का कृत्य न करे.
