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विधानसभा अध्यक्ष खंडूरी क्या उत्तराखण्ड और भाजपा संगठन के लिए आस्तीन के सांप की भूमिका में तो नहीं……..?

रिपोर्टर: Author August 5, 2026

 विधानसभा अध्यक्ष खंडूरी क्या उत्तराखण्ड और भाजपा संगठन के लिए आस्तीन के सांप की भूमिका में तो नहीं……..? 

  लोक संवाद टुडे/ 28/11/22. पुष्कर पवार “पदम”

  वर्तमान समय में उत्तराखण्ड, उत्तराखण्ड सरकार और उत्तराखंडियों के लिए एक के बाद एक अपशकुन की खबरों से दो चार होना पढ रहा है. यह अपशकुन उत्तराखण्ड और उत्तराखंडियों पर बहुत भारी पड़ रहा है. यह सब हो रहा है उत्तराखण्ड की पहली महिला विधानसभा अध्यक्ष के अटपटे और अनुभवहीन पालिटिक्स के निर्णयों के चलते. कोटद्वार विधानसभा की विधायक बनने से पहले यमकेश्वर विधानसभा को विकास के मामले में दशकों पीछे धकेलने के बाद कोटद्वार विधानसभा में सफलता मिलने के बाद सूबे में मुख्यमंत्री के बाद सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने के बाद उत्तराखण्ड और उत्तराखंडियों पर जो कहर विधानसभा अध्यक्ष खंडूरी ने ढाया वह उत्तराखण्ड ही नहीं पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है.

 उत्तराखण्ड विधानसभा अध्यक्ष के कुछ कारनामे जिन्हें उत्तराखंडी कभी नहीं भूल पाएंगे….. 

1. अपनी टीम में उत्तराखंडियों को ठेंगा दिखाना.

2. बैकडोर से हुई नियुक्तियों में केवल उत्तराखण्ड के लोगों पर कार्यवाही करना.

3. बैकडोर से हुई नियुक्तियों में एकतरफा कार्यवाही करना, नियुक्ति देने वाले और नियुक्ति पर दवाब वनाने वाले जनप्रतिनिधियों पर कार्यवाही न करना.

4. बैकडोर नियुक्ति मामले में सरकार को कोर्ट में पार्टी न वनाना.

5. राज्य सरकार की कानून व्यवस्था पर सीधे हस्तक्षेप करना, यानि स्वयं को मुख्यमंत्री से सुपर दर्शाना.

संगठन को प्रभावित करने और फजीहत में डालने वाले कार्य 

1. ताजातरीन फैसला- विधानसभा सत्र तय करना सरकार का निर्णय होता है जबकि राज्य के बाईस साल के इतिहास में यह निर्णय विधानसभा अध्यक्ष ने लिया है कि सत्र कब और कहाँ होगा.

2. राजस्व पुलिस मामले में गोपनीयता भंग कर मुख्यमंत्री तक सूचना पहुचने से पहले मिडिया में जारी हो जाना.

3. बैकडोर से नियुक्ति मामले में सीएम के विचलन अधिकार के निर्णय को मिडिया में समयपूर्व लीक करना.

  विधानसभा अध्यक्ष रितु खंडूरी के निर्णय निसंदेह उनकी टीम में शामिल राज्य से बाहर के नियुक्त कर्मचारी और उनके आका है जो येन केन प्रकेण सीएम की कुर्सी पर नजर गढाए हैं. विधानसभा अध्यक्ष खंडूरी को यह नहीं भूलना होगा कि वह भी उत्तराखण्ड की राजनीति में बैकडोर से शामिल हुई है और जिस तरह उन्होंने बैकडोर से नियुक्ति पाए कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाने काम किया है, संगठन भी उन्हें उनके कार्यो की शैली को लेकर उन्हें भी बाहर का रास्ता दिखाने में देर नहीं करेगा. खंडूरी को हमेशा याद रखना होगा कि जो दूसरों के लिए कुंवा खोदता है पहले वही उसमें गिरता है.

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