विकास के सवालों पर भाजपा को डर लगता है : उविपा
विधानसभा में विपक्ष के सवालों से पल्ला छुड़ाने के लिए चार दिन में ही कर दिया सत्रावसान।
नवनिर्वाचित विधायकों को पिकनिक मनाने के उद्देश्य से किया वर्तमान सत्र।
उत्तराखंड की नवनिर्वाचित धामी सरकार का चार दिनों तक विधानसभा सत्र लगता है नवनिर्वाचित विधायकों के लिए पिकनिक बनाने के उद्देश्य से आयोजित हुवा। जिस तरह इन चार दिनों के सत्र में सरकार ने राज्य की गंभीर समस्याओं पर खानापूर्ति कर सत्रावसान किया वह राज्य सरकार की राज्य को अंधेरे में में ले जाने की मानसिकता को दर्शाता है। उत्तराखण्ड विकास पार्टी ने मात्र चार दिन में विधानसभा सत्र का सत्रावसान कर दिए जाने पर खेद जताया है। उत्तराखण्ड विकास पार्टी के उपाध्यक्ष राजपाल सिंह रावत ने कहा कि मात्र चार दिन में विधानसभा का सत्रावसान कर दिया जाना बताता है कि भाजपा उत्तराखण्ड के सवालों से डर रही है, यह भाजपा की राज्य के प्रति गैर जिम्मेदारी को दर्शाता है।
रावत ने कहा कि कई विभागों के बजट बिना कटौती प्रस्ताव के ही स्वीकार कर लिए गए हैं, और 48 हजार करोड रुपए बिना विधानसभा की स्वीकृति के जो पिछले कुछ सालों में खर्च किए गए हैं उस पर ना तो चर्चा हुई और ना ही उन 48 हजार करोड रुपए को विनियमित करने के लिए विधानसभा ने कुछ किया है। 73 हजार करोड़ से ऊपर का कर्ज और ऊपर से राज्य की वित्तीय स्थिति डांवाडोल होने पर जरूरी था कि सत्र पर इन सब विषयों पर चर्चा होती।
उत्तराखण्ड क्रिकेट एसोसिएशन के घोटाले पर भी चर्चा होनी चाहिए थी और जांच होने तक क्रिकेट बोर्ड भंग या वित्तीय अधिकार सीज होने चाहिए थे,। उत्तराखंड क्रिकेट बोर्ड के कृत्य से पूरे देश में उत्तराखंड बोर्ड और सरकार की थू थू हो रही है, वहीं जिस तरह उत्तराखण्ड अधीनस्थ चयन सेवा आयोग पर विधायक भुवन कापड़ी ने मय सबूतों के सवाल उठाए हैं, उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के द्वारा की गई भर्तियों की सीबीआई जांच होनी चाहिए। उन्होंने उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष और सचिव को तुरंत हटाने की मांग की। उन्होंने कहा कि लोक सेवा आयोग पर इतने सवाल क्यों नहीं उठते हैं , और मात्र अस्सी हजार लोगों की भर्ती 18 पारियों में कराने की क्या मजबूरी है, जबकि दो लाख अठावन हजार लोगों की परीक्षा लोक सेवा आयोग ने मात्र एक दिन में निपटा दी है।
राजपाल सिंह रावत ने कहा कि भाजपा को सदन में उत्तराखण्ड के विकास सवालों पर चर्चा कराने में डर लगता है। सरकार अपनी खामियों से पल्ला छुड़ाकर राज्य की जनता को गुमराह कर रही है।
