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लायंस क्लब कोटद्वार डिग्निटी ने बांटे सीड बाल

रिपोर्टर: Author August 5, 2026

  

      लायंस क्लब कोटद्वार डिग्निटी ने बांटे सीड बाल

  


   रविवार को कोटद्वार में लायंस क्लब कोटद्वार डिग्निटी के सदस्यो द्वारा पर्यावरण संरक्षण के लिए सीडबाल बनाकर यात्रियों के माध्यम से वितरित करने का कार्यक्रम शुरू किया। क्लब के सदस्यों ने  कौड़िया चेक पोस्ट पर कोटद्वार आने और जाने वाले टूरिस्ट को पहले दिन 1000 सीड बॉल  बांटी गई। क्लब के सदस्यो द्वारा बताया गया कि यह सीड बॉल में नीम,जामुन, इमली के बीज डाले गए हैं। जोन चेयरपर्सन ला. रोहित बत्ता ने बताया कि इस अनोखी पहल से क्लब द्वारा पर्यावरण के लिए लोगों को जागरुक किया गया और सभी लोगों को पर्यावरण संरक्षण में आगे आने की बात कही। इस मौके पर क्लब के सचिव ला. रोहित बत्ता, प्रोजेक्ट चेयरमैन ला. प्रशान्त रस्तोगी, क्लब पीआरओ ला. हुकम सिंह नेगी, ला.अशीष अग्रवाल,ला. अवधेश चमोली, ला. अरविन्द बंसल, ला. ब्रिजेश आदि मौजूद रहे।

गढ़वाल शेर पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत का एक और चौंकाने वाला कारनामा 

 नकली मां पुत्र तैयार कर 107 बीघा जमीन हडपी हरक सिंह ने : रघुनाथ सिंह नेगी।


विकासनगर (देहरादून) – उत्तराखंड राज्य पर घोटालों का दाग छूटने का नाम नहीं ले रहा। राज्य के मंत्रियों से लेकर उनके अनुयायियों ने उत्तराखंड में घोटालों की जो चैन बनाकर रखी हुई है, उसकी कड़ियां एक एक कर खुलती नजर आने लगी हैं। राज्य के विवादों के शेर,का एक ऐसा मामला आरटीआई से उजागर हुआ कि पढ़ने सुनने और देखने वाले दांतो तले उंगली दबाकर रह गए। मामला जन संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा कि वर्ष 2002 में श्री हरक सिंह रावत ने राजस्व मंत्री बनते ही मात्र एक साल के भीतर ही शंकरपुर, सहसपुर की 107 बीघा जमीन पर ऐसी नियत भरी कि फर्जी सुशीला रानी के नाम से फर्जी हस्ताक्षरित पत्र स्वयं के नाम लिखवाया, जिसमें 7/4/2003 को इनके द्वारा जिलाधिकारी को सुशीला रानी के नाम दाखिल खारिज कराने के निर्देश दिए, जिसके क्रम में माल कागजात में सुशीला रानी का नाम दर्ज हो गया | सुशीला रानी का नाम दर्ज कराने से पहले ही बड़ी चालाकी से श्री हरक सिंह ने अपने करीबी पीए/ पीआरओ श्री वीरेंद्र कंडारी (समीक्षा अधिकारी) के नाम 5/12 /2002 को फर्जी महिला एवं फर्जी बेटा (जोकि विकासनगर ब्लॉक का रहने वाला है) प्रस्तुत कर नई दिल्ली में पावर ऑफ अटॉर्नी संपादित करा ली , जबकि सुशीला रानी की मृत्यु वर्ष 1974 में हुई, ऐसे साक्ष्य मिले हैं |हैरानी की बात यह है कि पावर ऑफ अटॉर्नी से मात्र 3 माह पहले सुशीला रानी उर्फ सावित्री देवी वर्मा ने अपने पुत्र भीमसेन वर्मा के नाम वसीयत संपादित कराई थी, जिसमें उन्होंने हस्ताक्षर के रूप में सावित्री देवी वर्मा लिखा था, लेकिन पावर ऑफ अटॉर्नी में सुशीला रानी लिखा था, इस प्रकार दोनों दस्तावेजों में विरोधाभास था | सवाल यह है कि क्या दो नाम से प्रचलित व्यक्ति अपने हस्ताक्षर अलग-अलग नाम से कर सकता है ! पावर ऑफ अटॉर्नी हासिल करते ही श्री हरक सिंह ने अपने खास राजदार श्री वीरेंद्र कंडारी के जरिए अपनी पत्नी श्रीमती दीप्ति रावत के नाम 4.663 हेक्टेयर यानी 60 बीघा भूमि का बैनामा (रजिस्ट्री) करा दिया ,जिसमें बड़ी चालाकी से पति हरक सिंह के नाम की जगह पिता का नाम दर्शाया गया तथा पता भी गढ़वाल का दर्शाया गया तथा इसी प्रकार अपनी करीबी सुश्री/ श्रीमती लक्ष्मी राणा के नाम 3.546 हेक्टेयर यानी 47 बीघा भूमि का बैनामा करा दिया, जिसमें पता गढ़वाल का दर्शाया गया, जिससे किसी को कोई संदेह पैदा न हो। उक्त फर्जीवाड़े के चलते कई विवाद उत्पन्न हुए एवं उक्त विवादों के चलते वर्ष 2009 में अपर जिलाधिकारी (प्रशा) द्वारा उक्त भूमि को सरकार के पक्ष में अधिग्रहित करने हेतु उप जिलाधिकारी, विकासनगर को निर्देश दिए थे तथा उक्त फर्जीवाड़े के मामले में थाना सहसपुर में वर्ष 2011 में भी मुकदमा कायम किया गया था। अन्य कई घोटाले भी उनके नाम दर्ज हैं।मोर्चा सरकार से मांग करता है कि उक्त जमीन को सरकार के पक्ष में अधिग्रहित कर जालसाजों के खिलाफ कार्रवाई करे अन्यथा भ्रष्टाचार रोधी ऐप एवं बड़ी-बड़ी बातें करना बंद करे।

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