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यह कैसा इंसाफ…? मोदी सरकार एक तरफ बेघरों के लिए बना रही घर, वहीं दशकों से घर में रह रहे लोगों को कर रही बेघर….!

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रिपोर्टर: Author August 5, 2026

 यह कैसा इंसाफ…? मोदी सरकार एक तरफ बेघरों के लिए बना रही घर, वहीं दशकों से घर में रह रहे लोगों को कर रही बेघर….!

कोटद्वार में से गुजर रहे एन एच भूमिधरों के घरों को बिना मुवावजे किया जा रहा धरासाई 

 राष्ट्रीय दलों ने एन एच में बेघर हुए लोगों की पीड़ा से झाड़ा पल्ला 
बेघर हुए लोगों में बेघर हुए लोगों में देश की सीमाओं पर डटे सैनिक, पूर्व सैनिक और किसान 

  कोटद्वार। मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी एन एच योजना जो आल वेदर रोड के नाम से कोटद्वार से गुजर रही है उसके एलाईमेंट से लगभग 250 से अधिक लोग बेघर हो रहे हैं। इस प्रक्रिया में कई लोग तो सरकारी पट्टे की भूमि पर सरकारी धन से बने घरों में दशकों से रह रहे हैं तो कुछ लोग आजादी के बाद से वहीं कुछ सत्तर के दशक से निवास करते आ रहे हैं। कई लोगों की पुस्तैनी भूमिधरी भूमि भी है। अनेकों परिवारों ने तो दो तीन पीढ़ियों का सफर भी तय कर लिया है।

 आजकल सरकार के दबाव में एन एच की टीम बुलडोजर लेकर घरों को सड़क के विकास के नाम पर राजस्व व पुलिस प्रशासन को लेकर ध्वस्तीकरण में जुटी है। बेघर हो रहे लोगों की मुख्य पीड़ा यह है कि एक तरफ तो केन्द्र सरकार प्रधानमंत्री आवास के नाम पर बेघरों को घर बनवा रही है वहीं दूसरी तरफ आबंटित बने सरकारी आवास,भूमिधरी पुस्तैनी आवासों बिना मुवावजे के जमीदोज कर रही है। केंद्र सरकार के दोहरे मापदंड ने आल वेदर सड़क निर्माण में मध्यम वर्गीय परिवारों सहित जवान और किसानों को भी बिना व्यस्था किए सड़क पर बिठा दिया है। 

  गुरुवार को एन एच का बुलडोजर ग्रास्टनगंज में तहसीलदार व कोटद्वार पुलिस की निगरानी में गरज रहा था। खबर लिखे जाने तक तीन मकानों का ध्वस्तीकरण किया गया वह भी बिना मुवावजे दिए बिना…! बेघर पीड़ितों ने बताया कि उनके साथ घोर अन्याय किया जा रहा है,एन एच जैसा मार्ग घनी आबादी से बनाया जा रहा है इससे भविष्य में गंभीर दुर्घटनाओं की संभावनाएं भी बनी रहेगी, वहीं सड़क का अलाईमेंट पूर्व में मुख्य बाजार में था सरकार ने व्यापारियों के दबाव में जवानों व किसानों को मोहरा बनाया है। वहीं बेघर हुए लोगों ने राष्ट्रीय दलों के दोहरे नकाब पहने जनप्रतिनिधियों को भी खूब कोसा…! उनके अनुसार राष्ट्रीय राजनीतिक दल केवल अपने निजी स्वार्थ तक सीमित हैं उन्हें बेघरों की पीड़ा से कोई लेना-देना नहीं…! कहीं साम्प्रदायिक मामला या उनके दलों के राष्ट्रीय नेताओं, जनप्रतिनिधियों के साथ किसी भी प्रकार का आरोप प्रत्यारोप होता तो ये दलके कार्यकर्ता जमीन आसमान एक कर देते, कहीं सड़कों पर जाम, रेलें रोक दी जाती आगजनी, सरकारी सम्पत्तियों को नुक़सान पहुंचाने से गुरेज नहीं करते…! परन्तु मेहनतकश किसानों जान हथेली पर रखकर देश की सुरक्षा रात-दिन एक करने वाले जवानों को यह केवल वोटबैंक की तरह देखते हैं जब जरूरत तब इस्तेमाल करो। …!

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