रिपोर्टर: Author
August 5, 2026
रविवार को उत्तराखण्ड विकास पार्टी ने मूल निवास 1950 और भूमि सुधार कानून की मांग को लेकर तहसील कोटद्वार में धरना दिया।
उत्तराखंड की राज्य स्थापना की मुख्य मांग जल जंगल जमीन पर उत्राखंडियों का अधिकार। परन्तु जब से राज्य बना है राज्य की प्रमुख मांग को दरकिनार कर राज्य की सरकारों का उत्राखंडियों को झुनझुना पकड़ा देने से वर्तमान युवा उत्राराखंडी अपने को ठगा महसूस कर रहा है।
उत्तराखंड की राज्य सरकार के उत्राखंडियों की मूल भावनाओं को दरकिनार कर बाहरी राज्यों के लोगों को लाभ पहुंचाने की सरकारी नीतियों के खिलाफ कोटद्वार के समाजसेवियों ने आवाज उठानी शुरू कर दी है।
रविवार को कोटद्वार तहसील परिसर में धरना देकर राज्य आंदोलनकारियों में कोटद्वार के निवर्तमान पार्षद परवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि जिस राज्य निर्माण का सपना लेकर हमने राज्य आंदोलन की लड़ाई लड़ी थी उस राज्य की प्राप्ति अभी तक नहीं हो पाई है यही वजह है कि यहां के मूल निवासी को आज सड़कों पर उतरना पड़ रहा है।
दीपक सिंह रावत ने कहा कि मूल निवास 1950 हम गढ़वालियों की पहचान है अपनी अस्मिता की लड़ाई में हमें लड़नी ही पड़ेगी।
इस अवसर पर सुभाष चंद्र नौटियाल ने कहा कि यूपी जेड ए एल आर एक्ट 1950 में उत्तराखण्ड बनने के बाद जो अमेंडमेंट किए गए हैं उनमें बदलाव किए जाने चाहिए और जेड ए एल आर की धारा 143 के पूर्व प्रावधान यथावत रहने चाहिए। उन्होंने कहा कि धारा 143 का उत्तराखण्ड में दुरुपयोग हो रहा है। अनूप थपलियाल ने कहा कि भू कानून की विस्तृत रूप रेखा बनाई जानी चाहिए। किसी भी भूमि विक्रय पर सहखातेदारों को वरीयता का प्रावधान है मगर अधिकारी एक्ट का दुरुपयोग कर रहे हैं जिससे मूल निवासियों के लिए स्थिति जटिल हो गई है।सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की भी रजिस्ट्रार कार्यालय अवहेलना कर रहे हैं।
धरना देने वालों में एडवोकेट पंकज भट्ट, एडवोकेट जगदीश चंद्र जोशी, आशीष मेंदोला, अतुल भट्ट, आशीष किमोठी, राजू मैंदोला, राजेंद्र सिंह, राजेंद्र कपटियाल, दीपक सिंह रावत, अनूप थपलियाल, अनिल जदली, महेंद्र बिष्ट, उम्मेद सिंह रावत, मुजीब नैथानी आदि शामिल थे
मूल निवास कानून लागू करने के लिए हजारों की संख्या में कुमाऊं में प्रदर्शन
मूल निवास लागू करने के लिए जनता के प्रदर्शन ने सरकार की उड़ाई नींद
हल्द्वानी। उत्तराखंड में मूल निवास कानून लागू करने और इसकी कट ऑफ डेट 26 जनवरी 1950 घोषित किए जाने और प्रदेश में सशक्त भू-कानून लागू किए जाने की मांग को लेकर हल्द्वानी में महारैली निकाली गई। उत्तराखंड मूल निवास स्वाभिमान महारैली में कुमाऊं भर से भारी संख्या में युवाओं समेत तमाम सामाजिक संगठन हजारों की संख्या में जुटकर बुद्ध पार्क में जुटे। मूल निवास, भू-कानून समन्वय संघर्ष समिति के तत्वावधान में आयोजित महारैली में सामाजिक और अधिकांश राजनीतिक संगठनों ने अपना समर्थन दिया।
बुद्ध पार्क में प्रदर्शन के दौरान विभिन्न संगठन कार्यकर्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड राज्य बनने के बाद भी स्थानीय लोगों को कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। उल्टा राज्य के मूल निवासियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। साथ ही खुद के घर में ही नौकरों के लिए तरसना पड़ रहा है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जल, जंगल और जमीन हमारी पूंजी हैं। उस पर बाहरी तत्व कब्जा कर रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि हिमाचल की तर्ज पर प्रदेश में सशक्त भू-कानून लागू किया जाए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि प्रदेश में काफी समय से भू-कानून की मांग की जाती रही है। नियमों की अनदेखी कर यहां औने-पौने दाम में जमीनों को खरीद कर उसमें होटल-रिजॉर्ट बनाए जाते रहे हैं। विधानसभा चुनाव के दौरान युवाओं ने सशक्त भू-कानून और मूल निवास की मांग जोरशोर से उठाई थी। जनता के भारी प्रदर्शन ने सरकार की नींद उड़ाकर रख दी है।
उत्तराखंड में मूल निवास कानून लागू करने और इसकी कट ऑफ डेट 26 जनवरी 1950 घोषित किए जाने और प्रदेश में सशक्त भू-कानून लागू किए जाने की मांग को लेकर देहरादून के बाद हल्द्वानी में महारैली का आयोजन किया गया है। जिसे लोगों का भारी समर्थन मिला है। महारैली को लेकर सुरक्षा की दृष्टि से भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई। इसके अलावा जुलूस प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने वाहनों के रूट को डायवर्ट भी किया।