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मासूम बच्चे का मोह छोड़ कोरोना में ड्यूटी कर रही है महिला सिपाही श्रीयंका

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रिपोर्टर: Author August 5, 2026

 वरिष्ठ अधिवक्ता, समाजसेवी और पूर्व विधी एवं परिसीमन आयोग के अध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी ने छोड़ा संसार 

मिडिया जगत सहित कांग्रेसियों में दुःख की लहर 

निस्वार्थ भाव से गरीबों और जरूरतमंदों की मदद मे सबसे आगे होते थे एड.जगमोहन सिंह नेगी

 कोटद्वार। वरिष्ठ  प्रतिष्ठित अधिवक्ता, समाजसेवी और कांग्रेस के उत्तराखंड के समर्पित सेनापतियों में से एक एड. जगमोहन सिंह नेगी ने भी इस निष्ठूर संसार से विदाई लेकर अपने परिजनों, मित्रों, सहयोगियों और अपने शिष्यों को असमर संसार से विदाई लेकर अचम्भित कर दिया। निस्वार्थ समाजसेवी, मृदुभाषी अधिवक्ता और कांग्रेस के मजबूत स्तम्भों में से एक एडवोकेट जगमोहन सिंह नेगी के निधन से पूरे कोटद्वार क्षेत्र मे शोक की लहर  दौड़ गई है। बेहद शालीन, मृदुभाषी और विनम्र व्यक्तित्व के धनी एडवोकेट जगमोहन सिंह नेगी जहां कांग्रेस के वफादार सिपाहसालारों में एक थे वहीं निस्वार्थ भाव से गरीबों और जरूरतमंदों की सहायता में भी सबसे आगे होते थे। ताउम्र कांग्रेस से जुड़े रहे, कांग्रेस ने उन्हें सम्मान भी दिया। हरीश रावत सरकार में उन्हें विधी और परिसीमन आयोग के अध्यक्ष पद से नवाजा।स्व.नेगी ने पौडी जिले के सहकारी बैंक के अध्यक्ष पद भी अपनी भूमिका निभाई। स्व. जगमोहन सिंह नेगी के दुःखद खबर की जानकारी उनके भतीजे तथा नगर निगम कोटद्वार में बलभद्रपुर से पार्षद अनिल नेगी (डब्बू भाई) ने दी। वरिष्ठता अधिवक्ता स्वर्गीय जगमोहन सिंह नेगी के असामयिक निधन से कोटद्वार के मिडिया जगत में शोक की लहर फैल गई।स्व.नेगी कोटद्वार की मिडिया में काफी लोकप्रिय रहे।

कोटद्वार क्षेत्र के मिडिया जगत, गणमान्य लोगों, अधिवक्ताओं तथा सामाजिक सरोकारों से जुड़े लोगों ने स्वर्गीय जगमोहन सिंह नेगी के निधन पर शोक व्यक्त किया है तथा उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए हैं। लोक संवाद टुडे भी अपनी पूरी टीम के साथ स्व. नेगी जी को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके परिजनों को इस दुःख की घड़ी में दुःख सहने की शक्ति प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना करते हैं। ईश्वर स्व. नेगी जी को अपने चरणों में स्थान दे। ओम् शांति ओम।

 दो साल की मासूम बच्ची को पड़ोसियों की जिम्मेदारी पर छोड़ कोरोना में ड्यूटी कर रही है महिला सिपाही प्रियंका

कोटद्वार। कोरोना महामारी से हर कोई डरा हुआ है, वहीं पुलिस महकमे में नारी शक्ति योद्धा की तरह मैदान में डटी हुई हैं। मां,बहन, बेटी,बहु और अर्धांगिनी की भूमिका में रहने वाली नारी शक्ति की भूमिका अपने कार्यक्षेत्र में भी बेमिसाल है। ऐसी एक महिला की बेमिसाल कार्यप्रणाली से लोकसंवाद टुडे अपने पाठकों को रूबरू करा रहा है।

कोटद्वार कोतवाली में तैनात महिला पुलिसकर्मी प्रियंका जो वर्तमान में दोहरी जिम्मेदारी का निर्वहन कर रही हैं। पूरा दिन कोरोना से लोगों को बचाने के लिए लॉकडाउन की ड्यूटी और इसके बाद बच्चों को इस संक्रमण से बचाने की जद्दोजहद। कोई दूध पीते बच्चे को तो कोई किशोरावस्था में पहुंच चुके बच्चों को छोड़कर अपने फर्ज को पूरा कर रही हैं। उनके इस समर्पण को हर कोई सलाम कर रहा है। कोरोना से भयभीत इस महिला के परिवार वालों ने लाख समझाया कि, वो पुलिस से छुट्टी लेकर घर बैठ जाये। घर वालों ने दो साल के मासूम बेटी की दुहाई और उसकी जिंदगी का भी वास्ता दिया। अपनी पर अड़ी और मजबूत जज्बे वाली जांबांज महिला सिपाही ने मगर दो टूक सबको बता दिया, ‘कोरोना जैसी मुसीबत में भी मैं पुलिस की ड्यूटी से छुट्टी लेकर घर बैठ जाऊंगी तो, फिर कब के लिए पुलिस की वर्दी पहनी है?

महिला सिपाही प्रियंका अपनी दो वर्ष की मासूम बच्ची के साथ गोविंद नगर स्थित किराये के मकान पर रहती है । प्रियंका के पति प्राइवेट सेक्टर में नौकरी करते हैं वो हरिद्वार में रहते हैं । ऐसे में पड़ोस में रहने वाले परिवार के भरोसे बच्ची को छोड़कर ड्यूटी करती है । वहीं प्रियंका के पड़ोसियों को भी साबासी मिलनी चाहिए जो उसकी दो साल की बच्ची की देखभाल कर प्रियंका को बेफिक्र होकर ड्यूटी करने की ताकत दे रहे हैं।

 फिलहाल तमाम दुनियादारी से बेखबर अब पौड़ी के कोटद्वार थाने में तैनात यह महिला सिपाही कोरोना से बेखौफ होकर कौड़ियां चैकपोस्ट पर प्रवासियों का डाटा तैयार कर रही है । जोकि सबसे डेंजर जोन है ।महिला कांस्टेबल प्रियंका बताती है कि कोरोना महामारी को रोकने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा। मुझे ऐसे कठिन हालात में देशसेवा का मौका मिला है। मेरी दो वर्ष की छोटी बेटी है । बेटी की देखभाल के साथ ही पुलिस की ड्यूटी का फर्ज पूरी शिद्दत से निभा रही हूं। सुबह साढ़े पांच बजे उठकर घर का काम निपटाती हूं ‌। उसके बाद ड्यूटी के लिए निकल जाती हूं । ड्यूटी से घर जाने के बाद खुद को सैनिटाइज कर और वर्दी धोकर ही बेटियों से दुलार कर पाती हूं। कर्त्तव्य का निर्वाह मेरी प्राथमिकता है।

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