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महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग में करोड़ों का मोबाइल खरीद में बड़ा घोटाला

रिपोर्टर: Author August 5, 2026

  

  

      

 जय हो घोटालों की सरकार

महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग में मोबाइल खरीद में बड़ा गड़बड़झाला 

 बिना यूज़ किए कबाड़ हो गए 13 करोड़ के मोबाइल फोन

   विभाग की साड़ी खरीद में भी बड़े घोटाले की आशंका

उत्तराखंड सरकार और घोटालों का लगता है आपस में ब्लड रिलेशन है। जब से उत्तराखंड राज्य का उद्गम हुवा है तब से ऐसे ऐसे घोटाले राज्य में आए दिन उजागर हो रहे हैं। कि आम जनता तो शर्मशार हो रही है लेकिन विभाग के मंत्रियों से लेकर संत्रियो पर इसका कोई असर दिखाई नहीं देता।हों भी क्यों नहीं जब भी कोई अधिकारी मंत्री लपेटे में आता है वह कानून को अपनी जेब में लेकर फाइव स्टार होटलों में पार्टी करता नजर आने लगता है। राज्य बनने के बाद से ढेंचा घोटाला,एन एच घोटाला, श्रम कल्याण विभाग का घोटाला,वन विभाग घोटाला, पटवारी नियुक्ति घोटाला,एन आर एच एम घोटाला, उद्यान विभाग का पाली हाउस,अदरक हल्दी बीज, सब्जियों के हाईब्रिड बीज व रासायनिक कीटनाशक दवाईयां और अब मोबाइल खरीद तथा साडी सूट खरीद ने सरकारों की कार्यशैली की पोल खोल कर रख दी है। आज हम यहां पर बाल विकास एंव महिला सशक्तिकरण द्वारा खरीदे गए मोबाइल और साडियों की खरीद अनियमितताओं की कर रहे हैं। अफसोस की बात ये है कि करोड़ों खर्च कर खरीदे गए ये फोन आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के काम नहीं आ सके।महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग में मोबाइल खरीद  का है जहां 13 करोड़ के मोबाइल कबाड़ बन गए।देहरादून: सरकारी पैसे को कैसे ठिकाने लगाया जाता है, ये देखना हो तो उत्तराखंड चले आइए। यहां दूसरे विभागों पर जब-तब घोटाले के आरोप लगते रहे हैं।

उत्तराखंड इम्पावरमेंट डेवलपमेंट मोबाइल स्कीम के तहत खरीदे गए मोबाइल प्रकरण

एक खबर के मुताबिक इस बार महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग में मोबाइल खरीद में बड़ा गड़बड़झाला सामने आया है। आरोप है कि विभाग ने आंगनबाड़ी वर्कर्स के लिए 22 हजार मोबाइल फोन और इतने ही पावर बैंक खरीदे थे। जिसकी कुल लागत 13 करोड़ रुपये बताई गई। विभाग ने बल्क में खरीद के बावजूद एक फोन आठ हजार 46 रुपए में खरीदा, जबकि इसी फोन की ऑनलाइन कीमत साढ़े पांच हजार से भी कम है। खैर ये तो हुई खरीद की बात, लेकिन अफसोस की बात ये है कि करोड़ों खर्च कर खरीदे गए ये फोन आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के भी काम नहीं आ सके।

          उत्तराखंड मोबाइल स्कैम

मामला साल 2018 और 2019 का है। सरकार ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को देने के लिए 22 हजार मोबाइल फोन और इतने ही पावर बैंक खरीदे, ताकी वो टीकाकरण, टेक होम राशन का वितरण जैसी गतिविधियों को ऑनलाइन अपडेट कर सकें। इसमें एक विशेष सॉफ्टवेयर भी था, जिसका नाम है पोषण ट्रैकर ऐप, लेकिन ज्यादातर मोबाइल में ये ऐप खुला ही नहीं। आंगनबाड़ी वर्कर्स का कहना है कि उन्होंने छह महीने के भीतर ही ये फोन वापस विभाग को जमा कर दिए। क्योंकि फोन में न तो डाटा फीड हो पा रहा था और न ही ऐप खुल रहा था। मोबाइल की प्रोसेसिंग कैपासिटी बहुत कम थी। खबर के मुताबिक आरटीआई एक्टिविस्ट रघुनाथ नेगी ने इस मामले में विभाग से जानकारी मांगी तो कई गड़बड़ियां सामने आईं।  उनका कहना है कि खरीदे गए मोबाइल बेहद कम दो जीबी रैम के थे, इंटनरल स्टोरेज कैपासिटी भी मात्र 16 जीबी थी। जबकि, इसके लिए कम से कम छह जीबी रैम का मोबाइल होना चाहिए था। इस तरह 13 करोड़ के फोन कबाड़ हो गए। रघुनाथ नेगी ने आंगनबाड़ी वर्कर्स के लिए की गई साड़ियों की खरीद में भी घोटाले का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि विभाग ने 2021 में आंगनबाड़ी वर्कर्स के लिए 66 हजार छह सौ साड़ियां व सूट खरीदे। जिनकी कीमत दो करोड़ साठ लाख रुपये आई। बल्क में हुई इस खरीद में एक साड़ी की कीमत 393 रुपए तो सूट की कीमत 398 रुपए दिखाई गई है, लेकिन इनकी गुणवत्ता इतनी खराब है कि कोई शायद ही इन्हें पहनना चाहे। कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना का कहना है कि ये बड़ा करप्शन है। मुख्यमंत्री को इस पर तत्काल संज्ञान लेकर कार्रवाई करनी चाहिए। 

सभी मुस्लिम मित्रों, सहयोगियों और देश भर के मुस्लिम समुदाय के लोगों को कुर्बानी पर्व ईद की ढेरों शुभकामनाएं और बधाइयां।


   लोक संवाद टुडे परिवार सभी देशवासियों से त्यौहार को अमन शांति और खुशियों से मनाने और भाईचारा अपनाने की कामना करता है।

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