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महासू देवता का जागरा (हरियाली ) मेला राजकीय घोषित

रिपोर्टर: Author August 5, 2026

  महासू देवता का जागरा (हरियाली ) मेला राजकीय घोषित

   नागर शैली में विशाल शाशिलाखंडों से बना है मंदिर 
  हिमाचल, उत्तरकाशी और जौनसार क्षेत्रों के भक्तों की आस्था का केंद्र है महासू देवता
 न्याय का लोकदेवता के लिए जाने जाते हैं महासू देवता

  उत्तरकाशी के हनोल में स्थित पांडव-कौरव कालीन भोटिया समुदाय के न्याय के कुलदेवता माने जाने वाले महासू देवता महापर्व को मंगलवार को उत्तराखंड सरकार ने राजकीय घोषित कर महासू देवता के भक्तों को शानदार तोहफा दिया है।

   उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के हनोल गांव में स्थित महासू देवता का भव्य मंदिर जो की पत्थरों की विशाल शिलाखंडों से नागर शैली में बना है। महासू देवता के बारे में कहा जाता है कि वे लोकदेवता के रूप में अपने भक्तों और अनुयायियों को न्याय दिलाते भे। असल में लोकदेवता महासू चार भाई थे जो अपनी प्रजा को अन्याय से बचाने के लिए अपनी प्राणों की बाजी लगा देते थे जिससे उनकी प्रजा ने उन्हें लोकदेवता के रूप में मान्यता दी। महासू देवता मे आस्था केवल उत्तराखंड ही नहीं हिमाचल प्रदेश व कश्मीर के लोग भी हैं। मेले में भव्य भंडारे का आयोजन होता है।भक्तगण मेले में भव्य अग्नि की परिक्रमा नाचते गाते करते हुए महासू देवता की पूजा अर्चना कर मेले के लोकदेवता का प्रसाद ग्रहण कर आशीर्वाद लेते हैं। मेले में रातभर महासू देवता का गुणगान हजारों लोग पूरी तरह अनुशासित करते हैं।

  उत्तराखंड संस्कृति एवं पर्यटन मंत्रालय के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने मंगलवार को मेले में प्रतिभाग करते हुए मेले की भव्यता और लोगों की आस्था को देखते हुए महासू देवता के लोकपर्व जागरा (हरियाली) को राजकीय मेला बनाने की घोषणा की।इस मौके पर बोलते हुए महाराज ने कहा कि महासू देवता समाज में नकारात्मकता को दूर कर सकारात्मकता का संदेश देते हैं। मेले में मानव मानव की सेवा कर अनोखा उदाहरण प्रस्तुत करता है।

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