महामारी से बचाने वाले देवदूतों को उत्तराखंड सरकार ने नौकरी से खदेडा
मतलब निकल गया तो पहचानते नहीं उत्तराखण्ड सरकार पर यह गाना सटीक बैठता है । पिछले दो साल से अपनी जान की बाजी लगाकर लोगों की जिंदगियों को बचाने के लिए रात-दिन एक करने वाले कोरोरोना वालिएंटरो को उत्तराखण्ड सरकार ने तमाम मानवीयताओ को दरकिनार कर दूध मे मक्खी की तरह निकालने का तुगलगी फरमान जारी कर कई घरों और परिवारों के पेट पर लात मारने का काम किया है ।
रविवार को कोविड केयर सेंटर कोटद्वार के कर्मचारियों ने अपने प्रति हुए नाइंसाफ़ी के खिलाफ़ कार्य बहिष्कार कर राज्य सरकार को ज्ञापन सौंपा । कोविड केयर सेंटर, कोटद्वार में कोरोनाकाल में रखे गए आउटसोर्स कर्मचारियों ने रविवार से अपने खिलाफ हुई नाइंसाफ़ी के बिरोधी में बेमियादी हड़ताल शुरू कर दी है। 31 मार्च को कैराना वोलिएटर की सेवाएं समाप्त होने का सरकार ने फरमान जारी कर दिया हैं। शनिवार को कर्मचारियों ने तहसील परिसर पर कार्यबहिष्कार कर धरना दिया साथ ही पुनः बहाली की मांग को लेकर जिला प्रशासन एवं राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर ज्ञापन भी सौंपा। इस मौके पर कर्मचारियों ने कहा कि दो साल से हमलोग काम रहे हैं। अचानक से बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है जबकि कई कर्मचारी काम करने के दौरान संक्रमित हुए हैं। इसके बावजूद हम काम करते रहे। सरकार की ओर से कहा जा रहा था कि कौरोना वारियर्स को सम्मान देंगे लेकिन सरकार हम लोगों को ही बाहर का रास्ता दिखा दिया है। जबकि कोरोना काल में हम लोगों ने जान जोखिम डाल कर मरीजों की सेवा की है। कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री उत्तराखंड सरकार को भी ज्ञापन सौंपा दिए है। इस संबंध में राज्य आंदोलनकारी सामाजिक कार्यकर्ता बिक्रम रावत का भी मानना है कि जिन वोलिएटर ने जान की परवाह किए बिना निर्भीक होकर सेवा लाखों लोगों की जिंदगियों को बचाने के लिए रात-दिन एक कर दिया सरकार को भी चाहिए कि ऐसे लोगों सेवा मुक्त करने के बजाए उपनल या अन्य माध्यम से पुनः स्वास्थ्य सेवा में लिया जाए ।