केंद्र सरकार की ओर से 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज में किसानों को फिर से सूखा सहन करना होगा। क्योंकि जिस प्रकार से केंद्र सरकार ने किसानों के लिए जो 30 हजार करोड़ का विशेष फंड जारी किया है, उसमें सरकार के अनुसार उससे 3 करोड़ किसानों को फायदा मिलेगा, परंतु बताते चलें कि सवा सौ करोड़ की आबादी मैं किसान 50% से अधिक है और उसे मात्र 3000 करोड़ का पैकेज मिला है। अगर 50% किसान भी मान लिया जाए तो लगभग 65 करोड़ की आबादी देश में किसानों की है अब एक किसान तक कितना रेन पहुंचेगा यह सरकार ही बता सकती है। ऊपर से किसान बारिश ओलावृष्टि आंधी तूफान और प्राकृतिक आपदा के चलते तो भारी नुकसान उठा ही रहा है, वही लाक डाउन के दौरान किसानों की फसलें खेतों में ही बर्बाद हो रही हैं। कई राज्यों के किसान अपनी फसलों को दूसरे राज्यों में लाक डाउन के कारण नहीं पहुंचा पा रहे। यही नहीं किसान की हालत लाकडाउन के दौरान सबसे ज्यादा बदतर हुई है। जो किसान खेत में काम कर रहा है सरकार ने कोई विशेष सहायता पूरी तन्मयता से नहीं पहुंचाई लगता है। सरकार के अनुसार छोटे किसानों के लिए कर्ज पर ब्याज की छूट की स्कीम 31 मई तक बढ़ाई गई है जबकि व्यापारी वर्ग, रियल स्टेट तथा अन्य कारोबारियों के लिए और नौकरी पेशा लोगों के लिए पांच 5 माह से लेकर 6 माह तक की सुविधा दी गई है। और किसानों को मात्र 15 दिन की। किसानों के साथ कहां का न्याय कैसी सुविधा। सरकार के अनुसार ढाई करोड़ किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड दिए जाएंगे अब आबादी के हिसाब से यह ढाई करोड किसान पूरे 50% का कितना होंगे इसी से अंदाजा लग सकता है कि वास्तविक किसान तक मदद पहुंचेगी भी या नहीं।यही नहीं सरकार द्वारा किसानों को बीज खाद कृषि यंत्रों पर छूट दी जा रही है लेकिन अगर राज्यों के कृषि विभागों और उद्यान विभाग के कार्यालय में पहुंचकर देखा जाए तो यह सारी चीजें वर्तमान में नदारद मिलेंगी विभाग के कर्मचारियों के अनुसार लाख डाउन के कारण उनके यहां सामान नहीं पहुंच पा रहा जब सरकारी विभागों में सामान नहीं पहुंच रहा है तो मार्केट में कैसे उम्मीद की जा सकती है।और कैसे किसानों को इसका लाभ मिल पाएगा यह तो सरकार ही बता पाएगी। मनरेगा में सरकार ने मजदूरी ₹182 से ₹200 की है, लेकिन प्राइवेट कर्मचारियों और दूसरे कर्मचारियों का पीएफ तक सरकार 12% तक दे रही है। जो किसान पूरे देश के लिए मर मर कर अन्न पैदा कर रहा है, भोजन पैदा कर रहा है उसके पास वास्तव में क्या पहुंचा। न तो उसे कर्ज की समय सीमा में वृद्धि हुई न कर्ज की ब्याज की दर कम की। अब ऐसे में किसान कैसे दोगुनी आय प्राप्त कर पाएगा, एक ज्वलंत प्रश्न सरकार के सामने हैं। किसान तो खैर हमेशा पिसता ही रहा है इस लाक डाउन में भी पीसेगा और पीसेगा और पिसेगा।
बीस लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज में किसान फिर भी सूखा
रिपोर्टर: Author
August 5, 2026