पौड़ी गढ़वाल के पुलिस विभाग में फेरबदल, वर्षों से कोटद्वार में टिके पुलिस कर्मियों पर फिर मेहरबानी,
पुलिस अधिकारियों की कथनी और करनी में अंतर
जनप्रतिनिधियों की शिकायत पर भी नहीं हुई कार्यवाही
कोटद्वार । पौड़ी गढ़वाल में सोमवार को पुलिस विभाग में हुए फेरबदल ने पुलिस अधिकारियों की कथनी और करनी पर फिर से सवालिया निशान लगा दिया । एएसपी मनीषा जोशी ने कई सालों से एक ही जगह जमे 58 पुलिसकर्मियों का ट्रांसफर तबादला किया। इसमें आफिसों में तैनात आठ सिपाहियो को भी हटाया गया। माना जा रहा है कि डीजीपी के फरमान के बाद जिले में बड़े पैमाने पर ट्रांसफर किए गए हैं।
सोमवार को हुए फेरबदल के आदेश होने के बाद पुलिस कर्मियों में खलबली मच गई। एक ही जगह पर तीन साल से अधिक समय से जमे पुलिसकर्मियों को चिन्हित कर पुलिस कर्मियों को अधीक्षक ने इधर-उधर किया। लम्बी जद्दोजहद के वावजूद भी जिले के 58 पुलिस कर्मियों के तबादले किए गए। लेकिन कोटद्वार कोतवाली के अधीन विवादित और लम्बे समय से तैनात पुलिसकर्मियों को फिर से जीवनदान देने से जिले के पुलिस अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा है वहीं अधिकारियों की कथनी और करनी पर से कोटद्वार के जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने ट्रांसफर लिस्ट नामंजूर करते हुए वर्षों से जमे पुलिसकर्मियों और अवैध धंधो के कारोबारियों के दबाब में ट्रांसफर करने की बात कही है। वहीं कोटद्वार की स्थानीय जनता ने भी ट्रांसफर लिस्ट पर सवालिया निशान खड़े किए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जो सिपाही कोटद्वार कोतवाली से स्थानांतरण हो कर जिले के ही अन्यत्र थानो या पुलिस चौकियों में जाते हैं और कुछ समय बाद किसी किसी न किसी बहाने से पुनः कोटद्वार कोतवाली से जुड़े महत्वपूर्ण चौकियों,एस ओ जी या फिर चीता पुलिस से सम्बद्ध हो जाते हैं और एक साल बाद पुनः अपनी नियुक्ति यही करवा देते हैं । उनकी गिनती अभी तक 03 साल वाले सिपाहियों में नहीं हो पा रही है जबकि उन्हें यहां पर कम से कम 8 से 10 साल हो गए हैं । वहीं उन्होंने कहा कि पुलिस कोतवाली एवं सीओ कार्यालय में तैनात सिपाहियों का भी स्थानांतरण करना चाहिए । बाजार पार्षद विपिन डोबरियाल ने तो इस स्थानांतरण के खिलाफ न्यायालय की शरण लेने की बात कही है तथा कोटद्वार के जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, मिडिया कर्मियों,व पुलिस से त्रस्त जनता का आह्वान किया है कि उनकी मुहिम में एकजुट होकर तब संघर्ष के लिए तैयार हो जब तक विवादित और वर्षों से जमे पुलिसकर्मियों का जिले से बाहर स्थानांतरण नहीं होता।
उत्तराखण्ड पुलिस बाल भिक्षावृत्ति की रोकथाम हेतु आम जनता से अपील 1. बच्चों को भिक्षा नही , शिक्षा दें । 2. बच्चों को भीख ना देकर , शिक्षा के लिए प्रेरित करें । 3. बच्चों का भविष्य कटोरे में नही बल्कि किताबों में है । 4. भीख को बढ़ावा देना , बाल अपराध को बढ़ावा देना है । 5. बच्चों को भीख देकर उसके भविष्य के अपराधी ना बनें । 6. भीख देने को दान – पुण्य ना समझे । 7. आपके द्वारा भीख में दिये चन्द रूपयों के कारण मासूम बच्चे आज सड़क पर हैं । 8. बच्चों को भीख देना बन्द करो , बच्चे चोरी होना बन्द हो जायेंगे । 9. कोई बच्चा भीख मांगता हुआ मिलता है तो नजदीकी थाने पर उसकी सूचना दें । * ” अब ना करो अज्ञानता की भूल , हर बच्चे को भेजो स्कूल ” ” शिक्षा जीवन का आधार , इसके बिना है सब बेकार ” ” 21 वीं सदी की यही पुकार , शिक्षा है सबका अधिकार ” ” मम्मी – पापा हमें पढ़ाओ , स्कूल चलकर नाम लिखवाओ ” ” सभी समस्याओं का हल , शिक्षा देगा बेहतर कल ” .।







