जिला अधिकारी पौड़ी द्वारा 22 किमी पैदल ट्रैकिंग
यमकेश्वर के ग्राम अमोला से रवासन नदी से होते लालढांग हुए 22 किमी पैदल ट्रैकिंग
पैदल मार्ग साल्ट रुट के नाम से जाना जाता था
अमोला से लालढांग 22 किमी0 का पैदल सफर 05 घण्टे में पूरा
पौड़ी/08 जून, 2023ः उत्तराखंड के पौड़ी जिले के जिलाधिकारी अपनी कार्यशैली के लिए उत्तराखंड ही नहीं पूरे देश में खासे लोकप्रिय हैं। निरन्तर जिलाधिकारी डॉ आशीष चौहान द्वारा जिले के लोगों को प्रेरित करने तथा जिले के तमाम विभागों के कर्मचारियों को प्रेरणा और उत्साह दिलाने के लिए भी कार्य किए जाते हैं जिससे कर्मचारियों में अपने कार्यों के प्रति उत्साह बना रहता है। गुरुवार को जिलाधिकारी चौहान द्वारा विधानसभा क्षेत्र यमकेश्वर के ग्राम अमोला से लालढांग तक रवासन नदी से होते हुए 22 किमी0 की पैदल ट्रैकिंग कर कर्मचारियों में जोश भर दिया। पूर्व से ही क्षेत्र के पांच दर्जन से अधिक गांवों के लोग लालढांग, कोटद्वार व नजीबाबाद आने-जाने के लिए इस पैदल मार्ग का उपयोग करते आये हैं। हालांकि लालढांग-धारकोट-एडवासिला मोटर मार्ग व धारकोट-यमकेश्वर मोटर मार्ग की सुविधा होने के बाद इस पैदल मार्ग का उपयोग थोड़ा कम हो गया है। जिलाधिकारी ने कहा कि रवासन नदी से होकर जाने वाले 22 किलोमीटर के इस पैदल रास्ते पर वन्य जीवों से खुद को बचते-बचाते लालढाग पंहुचना चुनौतीपूर्ण है यथा किसी उपब्लिध से कम नहीं है।
जिलाधिकारी सहित 26 सदस्य ट्रैकिंग दल द्वारा अमोला से लालढांग 22 किमी0 का पैदल सफर 05 घण्टे में पूरा किया गया। दल 03 बजे ट्रैकिंग प्रारम्भ करते हुए दल सायं 8 बजे लालढांग पंहुचा। लालढांग पंहुचने पर जिलाधिकारी ने अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा कि इस पैदल मार्ग को मुख्यतया साल्ट रुट के नाम से जाना जाता है, स्थानीय लोगो बताया कि वे इस रास्ते से नमक के लिए लालढांग जाते थे। जिलाधिकारी ने कहा कि बिना वन्य जीव संर्घष के रवासन नदी होते हुए लालढांग पंहुचना वन्य जीवों व मनुष्य के बीच तालमेल व क्षेत्रीय लोगो की जागरुता को दर्शाता है। उन्होने कहा कि वन्य जीव और मानुष एक ही परिवेश में रह सकते है बशर्ते एक-दूसरे से नियमित दूरी हो। उन्होने कहा कि क्षेत्र के पांच दर्जन से अधिक गांवों के उपयोग में आने वाले इस पैदल मार्ग का इतिहास बहुत पुराना है जिसका उपयोग क्षेत्र के लोग दैनिक जीवन में उपयोग होने वाली चीजों को गांवों तक पंहुचाने के लिए किया करते हैं। उन्होने कहा कि राजाजी नेशनल पार्क के किनारें बहने वाली रवासन नदी का यह मार्ग क्षेत्र के लोगों द्वारा शार्टकट के रुप में उपयोग में लाया जाताा रहा है लेकिन मार्ग पर चलते समय स्वयं को जंगली जीवों से बचाने के लिए सतर्कता अति आवश्यक है। उन्होने कहा कि लोगो की मुश्किलों को जानने का सबसे कारगर तरीका स्वयं को उनके स्थान पर रखते हुए मुल्यांकन करने से होता है। इससे पता चलता है कि क्षेत्र के लोगों का कितना मेहनती व संर्घशील व्यक्तित्व है। इस दौरान जिलाधिकारी ने राजाजी नेशनल पार्क में वन गुज्जरों से मुलाकात करते हुए उनकी समस्याओं को सुना तथा उनकी समस्याओं के हर सम्भव समाधान का भरोसा दिया।
दैनिक रुप से उपयोग में आने वाली चीजो को क्षेत्र के गांवों तक पंहुचाने के लिए इस मार्ग का व्यापक रुप से उपयोग होता आया है। रवासन नदी राजाजी नेशनल पार्क के एक छोर से होकर बहती है, इस पैदल मार्ग पर जंगली जीवों हाथी, बाघ, तेंदुआ, बार्किंगडियर, स्पॉटेड डियर, बारहसिंघा, जंगली सुअर आदि का दिखना आम बात है। इस दौरान एसडीएम यमकेश्वर आकाश जोशी, एसडीएम श्रीनगर आजयवीर सिंह, बीडीओ यमकेश्वर दृष्ठि आनन्द, एडीआईओ सूचना सुनील तोमर सहित राजाजी नेशनल पार्क के क्षेत्रीय विशेषज्ञ व वन विभाग के कार्मिक मौजूद थे।
वनाग्नि घटनाओं की रोकथाम के लिए बैठक
सूचना/पौड़ी/09 जून, 2023ः वनाग्नि घटनाओं की रोकथाम हेतु जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान ने एनआईसी कक्ष में समीक्षा बैठक ली। उन्होंने ब्लाक स्तर पर नामित नोडल अधिकारियों व अन्य संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि अपने-अपने क्षेत्रों में निगरानी बनायें रखें। कहा कि जंगलों में आग लगने पर तत्काल कंट्रोल रूम को उसकी जानकारी दें।
वनाग्नि घटनाओं की रोकथाम की बैठक में जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को प्रतिदिन वनाग्नि की रिपोर्ट जिला आपदा प्रबंधन कंट्रोल रूम को देने के निर्देश दिये। उन्होेंने समस्त उपजिलाधिकारियों को निर्देश दिये कि समय-समय पर संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक करें। कहा कि जो अधिकारी-कर्मचारी वनाग्नि के प्रति गंभीरता से कार्य नहीं करता है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्यवाही करें। जिलाधिकारी ने कहा कि जो व्यक्ति आग लगाते हुए पकड़ा जाता है उसपर तत्काल कार्यवाही करें।
बैठक में एसएसपी श्वेता चौबे, मुख्य विकास अधिकारी अपूर्वा पाण्डे, उपजिलाधिकारी सदर मुक्ता मिश्रा, मुख्य शिक्षाधिकारी डॉ0 आनंद भारद्वाज, मुख्य कोषाधिकारी गिरीश चंद्र, मुख्य कृषि अधिकारी अमरेंद्र चौधरी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।


