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पैथोलॉजी लेब की गलत रिपोर्ट पर हंगामा, एडीशनल सीएमओ ने शुरू की जांच

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रिपोर्टर: Author August 5, 2026

 पैथोलॉजी लेब की गलत रिपोर्ट पर हंगामा, एडीशनल सीएमओ ने शुरू की जांच 

लैब संचालक के खिलाफ पुलिस में दी तहरीर 

लैब संचालक रिपोर्ट में  टाइपिंग की गलती बता रहा 

 पीड़ित अविभावक लैब बंद करवाने पर दे रहे जोर 

कोटद्वार। चिकित्सा को व्यवसायिक बनाने की होड़ ने किस तरह कुछ कुत्सित मानसिकता के चिकित्सकों द्वारा चिकित्सकीय पेशे को दागदार और आम जनमानस की जान का दुश्मन बना दिया है उसका एक जीता-जागता उदाहरण कोटद्वार में एक निजी पैथोलॉजी लेब में देखने को मिला।
पीड़ित परिजनों सुदीमा देवी द्वारा मिली जानकारी के अनुसार शुक्रवार 8 मई को वे अपने 8 वर्ष के बीमार बेटे का ब्लड टेस्ट करवाने देवी रोड स्थित माही पैथोलॉजी लेब में पहुंची जहां उन्होंने बच्चे का ब्लड टेस्ट करवाया वहीं लैब कर्मचारी द्वारा उन्हें शाम को स्कूल टेस्ट करवाने को कहा। शाम को लैब द्वारा उन्हें रिपोर्ट भेज दी गई। भेजी गई रिपोर्ट जब परिजनों ने देखी और बच्चे की मां से पूछा तो उन्होंने बताया कि केवल ब्लड टेस्ट हुआ है और शाम को स्कूल टेस्ट के लिए कहा गया है। रिपोर्ट देखने के बाद परिजन तब  भौचक्के रह गए जब उन्होंने बच्चे की रिपोर्ट में ब्लड के साथ स्कूल रिपोर्ट भी देखी। बिना स्टूल टेस्ट किए कैसे रिपोर्ट बना दी…..? 
 परिजन रिपोर्ट के साथ लैब पहुंचे तो लैब में मौजूद चिकित्सक ने गलती स्वीकारी और सारी गलती का टोकरा लैब में मौजूद टाइपिस्ट के सिर पर डाल दिया। रविवार को सीएमओ द्वारा लैब का औचक निरीक्षण किया गया और रविवार को एडीशनल सीएमओ डा. विश्व कुमार त्यागी द्वारा पुनः लैब की जांच विस्तार से शुरू कर दी है डा. त्यागी का मानना है मामला गंभीर है व लैब में कुछ खामियां भी नजर आई हैं शेष पूरी जांच के बाद ही पता लग पाएगा।
 वहीं लैब संचालक डा. एम पी सिंह टेस्ट रिपोर्ट में गलती तो स्वीकारते हैं परन्तु स्वयं की नहीं वरन टाइपिस्ट की। टाइपिस्ट की गलती पर उसे नौकरी से भी हटा दिया गया है। इस मामले में डा. का कहना है कि दो टेस्ट के नामों के मिलते-जुलते कारण के वजह से टाइपिस्ट ने गलती की होगी। लेकिन डा. की रिपोर्ट पर लोक संवाद टुडे भी सवाल करता है कि अगर टाइपिस्ट ने गलती की थी तो रिपोर्ट फाइनल होने के बाद भी चिकित्सक जांचता है कि जो रिपोर्ट बनी है उसमें किसी प्रकार टाइपिंग या अन्य गलतियां तो नहीं? रिपोर्ट सही होने के बाद ही बीमार या जांच करवाने वाले व्यक्ति को रिपोर्ट भेजी जाती है…!
 लैब संचालक की गलती से जहां जागरूक अविभावक ने लैब रिपोर्ट की खामियों को उजागर किया है वहीं इस गंभीर और अक्षम्य गलती पर कोटद्वार कोतवाली में तहरीर देकर सराहनीय कार्य किया है। अब देखना यह होगा कि लैब की गंभीर लापरवाही पर पुलिस और पौड़ी जिला चिकित्सालय बीमारी की सही जानकारी लेने के लिए कुकुरमुत्तों की तरह फ़ैल रहे वैध अवैध लैबों किस तरह की कठोर कार्रवाई करते हैं..? या फिर जांच रिपोर्ट एक बार फिर फाईलों में घूमते हुए लीपा-पोती कर किसी फाईलों की ढेर में धूल बांटेगी…?

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