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पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत 2022 में दलित राजनीति के सहारे राजतिलक की तैयारियों में जुटे

रिपोर्टर: Author August 5, 2026

  पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत 2022 में दलित राजनीति के सहारे राजतिलक की तैयारियों में जुटे

कुमाऊं मूल के वोटर को भी साधने की कोशिश


कोटद्वार। उत्तराखंड में 2022 के विधानसभा चुनावों का बिगुल बजट चुका है। सभी राजनीतिक दल अपने अपने स्टार नेताओं को 2022 के चुनावी राजनीति बनाने के लिए राज्य की विधानसभाओं में वोटरों की नब्ज टटोलने के लिए भ्रमण करवाकर धरातल पर पार्टी का वजन आंकने में जुट गए हैं। इसी रणनीति के त तो सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री, कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और पंजाब प्रभारी हरीश रावत कोटद्वार पहुंचे। पूर्व मुख्यमंत्री रावत की पूर्व घोषणा के आधार पर राज्य में दलित मुख्यमंत्री का नारा देकर दलित वोटों को लुभाने के लिए कोटद्वार में वार्ड नं.3 स्नेह कालौनी में जोकि दलित बहुल कालौनी है से शुरुआत कर अपना दांव खेला है। यही नहीं कोटद्वार के आमपडाव,ग्रास्टनगंज,,मोटाढांग के बोक्सा जनजाति क्षेत्र में जनसभा कर दलित,पिछड़ा व रिजर्व बोट बैंक को साधने का प्रयास भी किया है। अपने संबोधन में रावत द्वारा जिस तरह अपने कार्यकाल में दलित, पिछड़ा वर्ग के लिए पेंशन, महिलाओं के लिए चलाई गई योजनाओं का उल्लेख किया उससे पता चलता है रावत का दूसरा टारगेट महिलाएं होंगी।

   रावत  के कोटद्वार दौरे की एक विशेष बात और रही वह है कोटद्वार विधानसभा में कुमाऊं के लोगों को कांग्रेस से जोड़ना। जिस प्रकार से कोटद्वार में कुमाऊं सांस्कृतिक मंच के तहत कुमाऊं के लोगों का संगठन मजबूत होता जा रहा है और कोटद्वार में कुमाऊं के लोगों को दोहरे दर्जे का बर्ताव सहना पड़ रहा है। कुमाऊं के लोगों का लगातार कोटद्वार में हर क्षेत्र में सौतेला व्यवहार सहना पड़ रहा है,यह। बात कुमाऊं सांस्कृतिक मंच के लोगों ने पीड़ा के साथ उजागर की तो राजनीति दलों के माथे पर बल पड़ गए। इसी बात का संज्ञान लेकर कांग्रेस के रावत ने राजनीति दलों में बाजी मारते हुए स्नेह जोकि कुमाऊं के लोगों का क्षेत्र माना जाता है से शुरुआत की और सिगड़डी कुमाऊं क्षेत्र में अपने दौरे की समाप्ति रात्रि विश्राम कुमाऊं परिवार में कर की तथा कुमाऊं के वोटरों पर अपना हक जताने का प्रयास किया है।

हरीश रावत वर्तमान में उत्तराखंड में राजनीति के वह खिलाड़ी हैं जो हमारी बाजी को जीत में बदलने का दम रखते हैं। इसका एक उदाहरण वे अपने मुख्यमंत्री काल में दे चुके हैं। कांग्रेस के केंद्रीय संगठन से लेकर राज्य संगठन में उनका कोई सानी नहीं। कोटद्वार को लेकर रावत इस बार कुछ ज्यादा संजीदा भी नजर आए। कोटद्वार में उन्होंने जीत की उस नब्ज को पकड़ है जो कांग्रेस के लिए जीत की राह तैयार करने में आ

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