रिपोर्टर: Author
August 5, 2026
पत्रकारों और उनके प्रतिषठानों को समर्पित उद्गगार
अखबार का यह हाल बना रखा है,
अख़बार टीवी मीडिया ने यह अजब हाल बना रखा है
चौथे खम्बे को सेठों सरमायदारों का सहारा बना रखा है
गली मुहल्ले के दुख कभी दिखते थे अखबार के पन्नो पर
अब देखिए पूरे अखबार को सदर बाजार सा बना रखा है
माल खरा है चमकता है जो चाहै जैसी खरीद ले खबर
प्रोडक्ट है ग्लोबल अखबार को शोरूम सा सजा रखा है
छपा रखा था अखबार में कि ये है बेजुबानों की आवाज
और खुद अपने अहलकारों के मुंह पे ताला लगा रखा है
कभी बच भी जाती है कातिलों से कुछ मासूम सी खबरें
पहले पन्ने पर तो जालिमों ने कबसे कब्ज़ा जमा रखा है
कभी हम भी कहते थे के यह है हमारा अपना अख़बार
अब तो इसे गलीज़ सियासत का हथियार बना रखा है
दिल की बात ज़ुबां पे लाने से ‘शेरी’ अब डर लगने लगा है
मेरे महबूब को धन्नासेठों ने ज़रख़रीद गुलाम बना रखा है
-इस्लाम ‘शेरी’
