जंगली जानवरों के साथ अब बंदर लंगूर भी हुए हिंसक,लोग दहशत में
लोगों को घरों में के अंदर ही काट रहे जंगली बंदर और लंगूर, लोगों का घर से निकलना हुआ मुश्किल
वन विभाग से कई बार गुहार लगाने के बावजूद भी वन विभाग हवाई फायर करने तक सीमित, नहीं लगा पा रहा हिंसक बंदरों और लंगूरों पर लगाम
कोटद्वार नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत वार्ड नंबर 3 कोटडीढांग में इन दिनों जंगली जानवरों के अलावा बंदर और लंगूरों ने भी अपना हिंसक रूप दिखाना शुरू कर दिया है। जहां जंगली जानवर लोगों के खेतों को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं वहीं बंदर और लंगूर ने लोगों को घरों में घुसकर काटना शुरु कर दिया है। जिसके चलते कई लोग अब तक सरकारी अस्पताल में इलाज कराते हुए परेशान हो चुके हैं। वन विभाग इन हिंसक बंदरों और लंगूरों पर लगाम लगाने में नाकाम साबित हो रहा है, वहीं नगर निगम भी इन शहरी बंदरों को नगरनिगम क्षेत्र की आबादी से बाहर करने में लगातार असफल होता दिख रहा है। कोटडीढांग वार्ड नंबर 3 के लोगों के अनुसार अब जंगली बंदर और लंगूरों ने लोगों को घरों में ही काटना शुरू कर दिया है। घरों में महिलाएं खाना बनाते समय, अपने खेतों में निराई गुड़ाई करते समय, तथा बृद्व अपने नाती पोतों को घुमाते समय तथा बच्चे अपने खेलने और पढ़ाई के ट्यूशन आदि जाते समय जंगली लंगूर और बंदर के हिंसक स्वभाव का शिकार हो रहे हैं। लगातार अप्रैल माह से बंदरों का आतंक कोटडीढांग में बना हुआ है। कोटडीढांग निवासी जगदीश गुसाईं जिन्हें जंगली बंदरों ने घर पर ही बुरी तरह से घायल कर दिया था अभी तक अपना इलाज कराने को मजबूर हैं, वही कोटडीढांग निवासी जगदीश सिंह रावत की पत्नी को घर में खाना बनाते समय और बच्चे को भी बंदरों ने उनके घर के अंदर ही नोच डाला। जिसके चलते अब इस क्षेत्र के लोगों में इन जंगली बंदरों और लंगूरों का भारी आतंक बना हुआ है। बताते चलें कि कोटडीढांग क्षेत्र में अधिकांश कृषको के आम लीची कटहल आदि फलदार वृक्षों के बगीचे हैं जिनमें बंदरों ने अपना अड्डा बनाया हुआ है, जब भी महिलाएं और बच्चे घर से निकलते हैं यह उन पर हिंसक रूप से टूट पड़ते हैं जब तक आदमी घर पर रहते हैं यह पेड़ों से उतरते ही नहीं। वन विभाग से कई बार लिखित और मौखिक रूप से सूचना दी जा चुकी है परंतु वन विभाग अपना पल्ला नगर निगम पर झाड़ देता है, नगर निगम पर जाओ तो नगर निगम जंगली जानवरों की जिम्मेदारी वन विभाग की मानता है। वन विभाग के कृषकों को इन बंदरों और जंगली जानवरों के मारने के आदेश देता नहीं तो अब किसान कैसे अपने अपने परिवार की रक्षा करें।

