दिव्यांग बालिका को देवभूमि ट्रस्ट ने उपलब्ध कराई व्हीलचेयर
कोटद्वार। पैरों से दिव्यांग, लेकिन जीने की चाह और जीवन में कुछ करने की चाह रखने वाली दिव्यांग बालिका की मददगार बनकर देवभूमि चेरिटेबल ट्रस्ट ने मानवता की मिशाल पेश की है। एक दिव्यांग बालिका को आने जाने और अपने दैनिक जीवन के संघर्षों से जूझने के लिए व्हीलचेयर उपलब्ध कराई है। अब बालिका को अस्पताल आने जाने में कठिनाई नही आएगी। ट्रस्ट की संस्थापक व पैरा अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी नीरजा गोयल को नीरज सेमवाल जी ने बताया कि नरेंद्र नगर निवासी 15 वर्षीय संजना का जौलीग्रांट अस्पताल में डायलिसिस चल रहा है, दिव्यांग होने के चलते संजना को व्हीलचेयर ना हो पाने के कारण काफी दिक्कतें होती है। यह बात नीरजा देवभूमि चैरिटेबल ट्रस्ट को मालूम हुई तो उन्होंने दिव्यांग बालिका को व्हीलचेयर देने का निश्चय किया। नीरजा गोयल ने बताया कि ट्रस्ट की ओर से कोठी गांव नरेंद्र नगर जिला टिहरी गढ़वाल निवासी दिव्यांग बालिका को व्हीलचेयर दी गई। व्हीलचेयर पाकर बालिका के परिजनों ने ट्रस्ट का आभार व्यक्त किया। इस मौके पर ट्रस्ट की सह संस्थापक नूपुर गोयल भी उपस्थित रही।
“गजब जी गजब”
“पुलिस, पुलिस और पुलिस”
उत्तराखंड की पुलिस को अपराधियों के अलावा पकड़ने होंगे अपराधी पशु/आवारा
उत्तराखंड पुलिस को सौंपे गए विशेष मिशन:
आपरेशन मुक्ति- बाल मजदूरी और भीख मांगने से मुक्त करने के लिए।
स्पेशल आपरेशन- फरार वांटेड अपराधियों को पकड़ने के लिए।
आपरेशन मर्यादा- पर्यटकों के उत्तराखंड में प्रवेश पर मर्यादित व्यवहार अपनाने हेतु।
मिशन हौसला- कोशिश काल में जरुरतमंदों को मदद पहुंचाने के लिए।
कामधेनु योजना- अपराधी/आवारा पशुओं को शहरबदर करने के लिए !
“ऑपरेशन कामधेनु” के तहत पशुओं को सड़कों पर आवारा छोड़ने पर अब तक जनपद में 16 व्यक्तियों के विरूद्ध की गयी कार्यवाही
नए बने राज्यों में उत्तराखंड अपनी राजनीतिक, सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक, प्रशासनिक, कृषि बागवानी,पर्यटन, धार्मिक पर्यटन,खनन, पर्यावरण जैसी नीतियों के कारण अक्सर विवादों और मज़ाक का हिस्सा बनता रहा है। राजनीतिक नीतियों में मुख्यमंत्री बनाने में गोल्ड मेडल प्राप्त करने वाला अकेला राज्य है किसी से छिपा नहीं। सामाजिक क्षेत्र में राज्य को पहाड और मैदान का अखाड़ा तो बनाया ही है, जातिवाद, क्षेत्रवाद के साथ अब नया सामाजिक मुद्दा जो विकास के नाम पर क्षेत्र विशेष को महत्व देने का है। पर्यावरण के नाम पर सरकार के हिसाब से जंगलों का दोहन, नदियों को बेमौसम चीर हरण, आर्थिक मामलों में ही लीजिए लगातार,फेल और फेल। जो सरकार आर्थिक संसाधनों का सही सदुपयोग न कर रिजर्व बैंक से कर्ज लेकर कर्मचारियों की वेतन भी समय से न दे पा रहा हो भले ही अपने लिए सुख सुविधाओं का अम्बाला लगाने में अडानी अम्बानी से कम्पटीशन करने में कोई कोताही न हो। अब जो एक गजब निर्णय उत्तराखंड सरकार ने लिया है वह तो सरकार को गोल्ड की जगह हीरे का मेडल पहनाने योग्य कह सकते हैं। जी हां उत्तराखंड सरकार की 2022 में नैया पार लगाने वाली “कामधेनु योजना”। उत्तराखंड सरकार की इस योजना में पुलिस की पहली प्राथमिकता नगरनिगम और नगरपालिकाओं और नगर पंचायतों से पशुओं को पकड़ कर शहरबदर करना होगा, वर्ना जिम्मेदार थाना प्रभारियों को आलाकमान का कोपभाजन के लिए तैयार रहना होगा। बताते चलें कि उत्तराखंड का शायद कोई जिला होगा जहां पूरा पुलिस महकमा पूरा होगा। अब ऐसी स्थिति में पुलिस अपराधियों को पकड़ने या पशुओं को ? आखिर पुलिस कहा कहां ड्यूटी बजाए ? राजस्व विभाग, वन विभाग के खनन हो या लकड़ी चोरी के लिए पुलिस !आबकारी विभाग की वैध अवैध शराब पर लगाम लगाए पुलिस ! मंत्री, विधायक से लेकर छुटभय्यै बत्तधारियोंकी सुरक्षा के लिए पुलिस ! वीआईपी की सुरक्षा के लिए भी पुलिस अपराधियों के लिए पुलिस, कानून व्यवस्था के लिए पुलिस और तो और यातायात दुरुस्त करने के लिए पुलिस, नगर निकायों और नगर निगमों सहित पशु पालन विभाग की भी।नगर निकायों और निगमों, वन,राजस्व और परिवहन जैसे भारी-भरकम वेतनमान देने विभागों की जिम्मेदारी अगर पुलिस विभाग को ही निभानी है तो सरकार क्यों इन विभागों के अधिकारियों, कर्मचारियों का बोझा ढो रही है ? सरकार को चाहिए कि इन विभागों को बंद कर पुलिस विभाग में ही कर्मचारियों की नियुक्ति कर दे। अब देखिए नगरनिगमों और नगरनिकायों सहित पशु पालन विभाग की जिम्मेदारी सरकार ने कितने प्रेम प्यार से पुलिस को कामधेनु योजना के नाम से सौंप दी है। उत्तराखंड सरकार जिस तरह पुलिस को कोल्हू के बैल की तरह उपयोग कर रही है,वह पुलिस के सेवानियमावली के विपरित है। पुलिस का इस तरह का उपयोग उनका मनोबल बढ़ाने के बजाय मानसिक उत्पीड़न होगा।
कोटद्वार।श्रीमान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक महोदया, कु0 पी0 रेणुका देवी जनपद पौड़ी गढ़वाल द्वारा जनपद में सड़कों पर आवारा घूमने वाले पशुओं के कारण अक्सर यातायात अवरुद्ध होने से जाम की स्थिति उत्पन्न होने एवं इन पशुओं के कारण सड़क दुर्घटनायें घटित होने तथा आवारा घूमने वाले पशुओं पर नियन्त्रण लगाये जानेक्षहेतु जनपद में “ऑपरेशन कामधेनु” की शुरूवात की गयी है। जनपद के थाना क्षेत्रान्तर्गत पौड़ी, श्रीनगर, कोटद्वार एवं लक्ष्मणझूला को अपने-अपने थाना क्षेत्रों में आवारा घूमने वाले पशुओं के स्वामियों के विरूद्ध कार्यवाही करने हेतु निर्देशित किया गया है। मंगलवार को थाना श्रीनगर एवं कोटद्वार पुलिस द्वारा थाना क्षेत्रान्तर्गत अपने पशुओं को सड़कों में आवारा छोड़ने पर 06 व्यक्तियों के विरुद्ध उत्तराखण्ड गोवंश संरक्षण (संशोधन) अधिनियम- 2015 व पुलिस अधिनियम के अनुसार कार्यवाही कर जुर्माना किया गया। साथ ही थाना श्रीनगर पुलिस द्वारा सार्वजनिक स्थानों में घूमने वाले 02 आवारा पशुओं को नगर पालिका श्रीनगर द्वारा संचालित गौशाला में पहुँचवाया गया। जनपद पुलिस द्वारा अब तक “ऑपरेशन कामधेनु” के तहत सड़कों में अपने पशुओं को आवारा छोड़ने पर 16 व्यक्तियों के विरूद्ध नियमानुसार कार्यवाही की गयी है।
पुलिसअपीलः-
जनपद पुलिस द्वारा सभी पशु स्वामियों से निवेदन है किः-अपने पशुओं का पशुपालन विभाग में रजिस्ट्रेशन करवाकर टैग अवश्य लगवायें। अपने पशुओं को सड़कों में आवारा न छोड़ें। अन्यथा सम्बन्धित पशु स्वामी के विरुद्ध उत्तराखण्ड गोवंश संरक्षण अधिनियम- 2007 एवं गोवंश संरक्षण (संशोधन) अधिनियम- 2015 के तहत नियमानुसार कार्यवाही की जायेगी।
कोटद्वार। कोटद्वार नगरनिगम क्षेत्रांतर्गत जसोधरपुर औद्योगिक क्षेत्र स्थित फैक्ट्री में एक श्रमिक की करंट की चपेट में आने से मौत हो गई। मिली जानकारी के मुताबिक किरतपुर जिला बिजनौर निवासी घनश्याम पुत्र अशोक उम्र 35 वर्ष जसोधरपुर औद्योगिक क्षेत्र स्थित फैक्ट्री में मेंटेनेंस में कार्य करता था। मंगलवार सुबह 6:00 बजे के लगभग वह कार्य करते हुए करंट चपेट आने से क्रेन से नीचे गिर गया।इस दुर्घटना में घनश्याम के सिर पर गहरी चोट आ गई, अन्य श्रमिकों के द्वारा फैक्ट्री मालिक को इसकी सूचना दी गई। तब तक अन्य श्रमिक घनश्याम को लेकर बेस चिकित्सालय पहुंचे तब तक बहुत देर हो चुकी थी डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।