मेनू
News

कोटद्वार में निर्दलीय प्रत्याशियों का दबदबा

रिपोर्टर: Author August 5, 2026

  कोटद्वार में निर्दलीय प्रत्याशियों का दबदबा

 राष्ट्रीय पार्टियों से दूर होती कोटद्वार की जनता


कोटद्वार में वर्तमान विधानसभा चुनाव में जिस तरह चुनावी समीकरण बन रहे हैं उससे तो लगता है इस बार विधानसभा चुनाव उत्तराखंड के लोगों को चौंकाने में कामयाब हो जाएंगे। कोटद्वार विधानसभा में राज्य बनने के बाद से भाजपा कांग्रेस बारी-बारी से सत्ता का सुख भोगा है। बीस साल के युवा उत्तराखंड की कोटद्वार विधानसभा हमेशा चर्चाओं में रही। कोटद्वार विधानसभा को इन बीस सालों में जो विकास मिला है वह है सबसे बड़ा कोटद्वार रामनगर कालागढ़ मोटर मार्ग को विवादों और कानूनी पचड़े में फंसाना, कोटद्वार का मोटर नगर का गड्ढा, कोटद्वार में मेडिकल कॉलेज की स्थापना का झुनझुना, कोटद्वार को जिला बनाने का मुंगेरी सपना, कोटद्वार के लोगों को टैक्स के दायरे में लाने के लिए नगर निगम थोपना, कोटद्वार में आपसी भाईचारे को जातिवाद में बांटना जैसे विकास होना।

 वहीं कोटद्वार में राष्ट्रीय पार्टियों की सोच देखिए एक पार्टी को को तो बीस साल बाद भी दूसरा नेता नहीं मिला वहीं दूसरी पार्टी पिछले दस वर्षों से पैराशूट नेताओं के भरोसे जिंदा है। वर्तमान में कोटद्वार विधानसभा में एक नेता को तो नगरनिगम भी चाहिए और विधानसभा भी। वहीं दूसरी पार्टी को बदले की राजनीति करनी है चाहे किसी भी दमदार कार्यकर्ता की बलि ही क्यों न लेनी पड़े। दोनों दलों को कोटद्वार की जनता तो उन्हें  अपनी बंधुवा मजदूर नजर आती है! 

इसी से नाराज़ कोटद्वार विधानसभा की जनता ने दोनों दलों को आईना दिखाने के वास्ते निर्दलीयों पर विश्वास जताना बेहतर समझा है। कोटद्वार विधानसभा में जनता को इस बार तीन निर्दलीय चेहरे ऐसे नजर आ रहे जो कोटद्वार विधानसभा की तस्वीर बदलने का दम रखते हैं। सबसे पहला नंबर 2002 से कोटद्वार में राजनीति कर रहे मृदुभाषी, सामाजिक समाजसेवी और कोटद्वार के उद्योगपति जिसे भाजपा हम से छलती आई है वह है सैनिक पृष्ठभूमि से धीरेन्द्र चौहान जिन्हें कोटद्वार विधानसभा की जनता भली-भांति परिचित है। अपने सामाजिक समाजसेवी कार्यो से कोटद्वार की जनता में मजबूत पैठ बनाई है जिससे कोटद्वार की जनता की सिम्पैथी भी मिल रही है। दूसरे नंबर पर सैनिक पृष्ठभूमि के ही सामाजिक कार्यकर्ता और कोटद्वार में धर्मांतरण, गौसेवा, सैनिक/केंद्रीय स्कूल के लिए संघर्षरत व्यवहारिक सुनील बहुखंडी है जो अपने मिशन सांस्कृतिक संगठन के बैनर से कोटद्वार में लोकप्रियता हासिल कर चुके हैं।

तीसरे नंबर पर कोटद्वार के राजनीतिज्ञों को चौंकाने वाली युवा महिला प्रत्याशी महिमा चौधरी हैं जो महिलाओं और निर्धन जरुरत मंद परिवारों मे खासी घुसपैठ बना चुकी है। वहीं अपने सामाजिक कार्यो के चलते कोटद्वार में चर्चाओं में है। अपने क एक केवल एक रोजगार देने के  घोषणापत्र से भी चर्चाओं में आ गई है। अपने सामाजिक कार्यो से निजी संसाधनों से हजारों लोगों को रोजगार भी उपलब्ध करा चुकी है। वहीं शराब और धन बल के बिना जनता से सेवा का अवसर देने के लिए आशीर्वाद मांग रही है। अब देखना यह है कि कोटद्वार की जनता तीनों को निर्दलीय प्रत्याशियों में से किसे आशीर्वाद से देती है।

संबंधित खबरें