कोटद्वार में निर्दलीय और नए दल तो नहीं बिगाड़ेगा बड़े दलों का सियासी गणित ….?
भारत एक लोकतांत्रिक देश है और लोकतंत्र का त्यौहार चुनाव होता है। लोकतंत्र के इस त्यौहार का समय भी आ गया है। उत्तराखंड सहित चार अन्य राज्यों में लोकतंत्र के त्यौहारी मौसम में त्यौहार में भागीदारी करने वाले राजनीति के विभिन्न संगठनों, दलों और स्वतंत्र नेताओं के लिए अपना जौहर, प्रतिभा व राजनीतिक कौशल का परिचय देने का मौका मिला है, जिसे वे कैसे लोकतंत्र की असली मलाई को अपने लिए समेटने में कामयाब होते हैं यह तो 10 मार्च को ही पता लग पाएगा।
उत्तराखंड का कोटद्वार विधानसभा राज्य बनने के बाद से उत्तराखंड की राजनीति को अपने भौचक करने वाले चौंकाने वाले परिणाम देते आया है जिससे उत्तराखंड की राजनीति की जन्मपत्रिका वनाने वाले ज्योतिष भी अपने बाल नोचते आने लगते हैं। 2022 विधानसभा में इस बार मजबूत सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि के निर्दलीय और नए दलों के प्रत्याशियों की दस्तक ने इस बार कोटद्वार विधानसभा का लोकतंत्र के त्यौहार को खूब रंग-बिरंगे और रोमांचक बना दिया जिससे लोगों में इस बार चुनाव को बहुत भावनात्मक रूप में लेना शुरू कर दिया है। कोटद्वार में ने दल के रूप में आम आदमी पार्टी ने युवा और सामाजिक, धार्मिक सेवा व कानूनी की पृष्ठभूमि के जुड़े प्रत्याशी को मैदान में उतारा है वहीं कानूनी पृष्ठभूमि से जुड़े युवा को डेमोक्रेटिक उत्तराखंड दल ने भी अपना प्रत्याशी बनाया है। इसके अलावा उत्तराखंड की सैन्य परम्परा की पृष्ठभूमि व बहादुर, निडर देशसेवा के बाद जनसेवा से जोड़ने के लिए मिशन सांस्कृतिक ने कोटद्वार विधानसभा में पूर्व सैनिक को मैदान में उतारकर बड़े दलों की मुसीबतें बढ़ा दी है। इसके अलावा कोटद्वार में अपने महिला सशक्तिकरण और जरूरतमंद बच्चों को श्रेष्ठ शिक्षा के सामाजिक कार्यों के बलबूते कोटद्वार में विधानसभा चुनाव में पुरुषों के चुनौती देने का निर्णय लिया है। कोटद्वार में बड़े दलों को चुनौती पेश करने वाले दावेदारों में आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार एंड. अरविंद वर्मा जिनका कोटद्वार में कानूनी क्षेत्र में बहुत लोकप्रिय नाम है वहीं सामाजिक और धार्मिक क्रियाकलापों में बढ़-चढ़कर भागीदारी जिससे कोटद्वार में अच्छा प्रभाव है वहीं केजरीवाल की टीम का दिशा निर्देशन उनकी चुनावी वैतरणी पार करवाने में काफी सहायक हो सकती है। पूर्व सैनिकों के राजनीति संगठन मिशन सांस्कृतिक के प्रत्याशी सुनील बहुखंडी सेना में इंटेलिजेंस,कमांडो जैसे कार्यों से जेसीओ के पद पर काम कर चुके हैं । सेवा निवृत्त होने के बाद अपने सैनिक संगठन, महिला शक्ति के साथ मिलकर कोटद्वार में महिला अपराध, सैनिक स्कूल की मांग की लड़ाई,गौसंरक्षण और नशे के खिलाफ संघर्षरत हैं। सैनिक संगठन के बलबूते और सहयोग से कोटद्वार को श्रेष्ठ शहरों की श्रेणी में लाने के लिए चुनावी समर में खड़े हैं। वहीं महिलाओं को आत्मनिर्भर, स्वावलंबी और स्व-रोजगार के लिए प्रेरित कर जरुरतमंद परिवारों के बच्चों को शिक्षित करने के लिए निजी संसाधनों के बलबूते आर्थिक सहायता, निजी स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराकर स्वावलंबी बनाने का काम कर रही महिमा चौधरी ने कुछ ही समय में लोगों के बीच अपनी पहचान बनाई है ने भी महिला दावेदार के रूप में चुनौती पेश की है।
अब देखना यह होगा कि कोटद्वार विधानसभा से बड़े दलों के कौन बड़े चेहरे हैं जो कोटद्वार की जनता को पिछले 20 सालों से लाया लप्पा देने वाले या ने चेहरे या फिर ……. जो बदल-बदल कर आते रहते हैं । निर्णय तो कोटद्वार की क्रांतिकारी जनता को ही करना है।
पुष्कर पवार”पदम”