कोटद्वार नगर निगम, अनियमितताओं के साथ दोस्ती
नगरनिगम में कुछ पार्षदों के परिजनों की नियुक्ति को लेकर कानूनी नोटिस
कोटद्वार नगरनिगम की राज्य सरकार की पहली गंभीर और चिंताजनक अनियमितता- कोटद्वार नगरनिगम में शामिल नए ग्रामीण क्षेत्रों का लगभग पांच साल पूर्ण होने के वावजूद शहरी मंत्रालय में ट्रांसफर न होना जिस कारण लोगों को बैकिंग, कृषि, बागवानी, सिंचाई, पेयजल, बिजली व स्वास्थ्य जैसे विभागों की तकनीकी खामियों के चलते विभागों के चक्कर में घनचक्कर बनना।
नगरनिगम बनने के बाद कोटद्वार में कुछ जनप्रतिनिधियों और कर्मचारियों की जुगलबंदी से आमजनमानस को भारी शिकायतें। यही नहीं इनकी जुगलबंदी के चलते निगम में भाई भतीजावाद, चहेतों की मलाई, भ्रष्टाचार, घोटालो ं की बाढ। जिसमें कुछ जनप्रतिनिधि और कर्मचारी आजकल सरकारी ससुराल के मेहमान बने हैं तो कुछ शीघ्र ही तैयारी में जुटे हैं।
ताजतरीन मामला सूचना के अधिकार से मिली जानकारी का जिसमें कानून और विभागीय सेवा नियमावली को ठेंगा दिखाकर निगम के कुछ पार्षद जनप्रतिनिधियों द्वारा अपने बच्चों और नातेरिशतेदारों को रेवडियों की भांति नगरनिगम में नियुक्त करने का है।
इसी नौकरियों की नगरनिगम के कुछ पार्षदों द्वारा रेवडियों की तरह बंदरबाँट को लेकर कोटद्वार के सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा सूचना अधिकार से मिली जानकारी के आधार पर अपने अधिवक्ता के माध्यम से कानूनी नोटिस भिजवाया है। कानूनी नोटिस मिलने से नगरनिगम में पार्षदों और जनप्रतिनिधियों के परिजनों में हडकंप मच गया है तो विभाग में भी भूकंप आने लगे हैं।
