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कोटद्वार गढ़वाल में अस्तित्व आया “कुमाऊं सामाजिक, सांस्कृतिक मैत्री संगठन”

रिपोर्टर: Author August 5, 2026

 कोटद्वार गढ़वाल में अस्तित्व आया “कुमाऊं सामाजिक, सांस्कृतिक मैत्री संगठन”

  कार्यकारिणी हुई गठित, हुकुम सिंह नेगी बने पहले अध्यक्ष 

गैर राजनीतिक संगठन की भूमिका में काम करेगा कुमाऊनी संगठन

  कोटद्वार गढ़वाल में अंग्रेजी शासन काल से बसीगत  करने वाले कुमाऊं मंडल के कुमाऊनी लोगों ने नई भावी पीढ़ी को कुमाऊं के इतिहास, सामाजिक ताने-बाने, सांस्कृतिक धरोहर, कर्मकांड, रीति रिवाज, खान-पान, बोली भाषा और कुमाऊनी परिधान को हस्तांतरित और पहचान दिलाने के उद्देश्य से कोटद्वार सहित कुमाऊं से बाहर प्रवास कर रहे कुमाऊनी लोगों को संगठित करने के उद्देश्य से गैर राजनीतिक संगठन “कुमाऊं सामाजिक, सांस्कृतिक मैत्री संगठन” का गठन कर कार्यकारिणी घोषित कर दी।

 कोटद्वार के उमरावपुर,मोटाढांग में नवयुग पब्लिक स्कूल के सभागार में आहुति हुई बैठक में कोटद्वार के सनेह क्षेत्र से लेकर चिल्लरखाल सिगड्डी तक के लोगों ने भागीदारी कर संगठन को मजबूती से आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। कुमाऊं के लोगों के अनुसार भावी नई पीढ़ी आधुनिकता की धमाचौकड़ी में कुमाऊं की मजबूत सामाजिक, सांस्कृतिक, बोली भाषा, खान-पान, रीति-रिवाजों को भूलती जा रही है । वर्तमान अविभावक पीढ़ी का दायित्व बनता है कि वह अपनी भावी पीढ़ी को अपने पूर्वजों के विषय में, संस्कृति, रहन-सहन, क्षेत्रों, रीति-रिवाजों की जानकारी दें। संगठन के अध्यक्ष हुकुम नेगी ने कहा कि कुमाऊं से बाहर लाखों कुमाऊनी परिवार विभिन्न क्षेत्रों में प्रवास कर रहे हैं उनमें से एक कोटद्वार भी है। कोटद्वार में कुमाऊं से लोग उस समय आए जब भाबर के नाम से पहाड़ के लोग डर जाया करते थे। हमारे कुमाऊनी पूर्वजों ने कोटद्वार को बसाने और पहचान दिलाने में अपना खून-पसीना एक कर दिया। सचिव भास्कर पोखरिया ने कहा कि कुमाऊं की संस्कृति और समाजिक ताना-बाना बहुत ही समृद्ध है। देश की आजादी से लेकर वर्तमान तक कुमाऊनी लोगों ने अपनी संस्कृति रीति-रिवाजों और परिधान में पूरे विश्व में अपनी छाप छोड़ी है। इसी परम्परा को आगे बढ़ाने के लिए कुमाऊं के लोगों का संगठित होना जरूरी है। संगठन की उपाध्यक्षा प्रेरणा रावत ने कहा कि सभी जाति, धर्म के लोग अपने अपने क्षेत्र को लेकर संगठित हो रहे हैं और अपने क्षेत्रों के लोगों के लिए मजबूती से  मददगार हो रहे हैं तथा अपनी सांस्कृतिक, सामाजिक पृष्ठभूमि को बढ़ावा दे रहे हैं इसलिए हमें भी एकजुट होना होगा। कार्यक्रम का संचालन पुष्कर सिंह पवार ने किया। “कुमाऊं सामाजिक, सांस्कृतिक, मैत्री संगठन” में पहली बार अध्यक्ष पद पर हुकुम सिंह नेगी, उपाध्यक्ष पद पर प्रेरणा रावत, महासचिव पद पर जगदीश प्रसाद पाण्डेय, सचिव पद पर भाष्कर पोखरिया, कोषाध्यक्ष पूरन सिंह अधिकारी, सांस्कृतिक सचिव सुधीर पांडेय, संगठन सचिव शंकर दत्त जोशी, और प्रचार सचिव पुष्कर सिंह पवार को जिम्मेदारी मिली।

 सभी पदाधिकारियों और सदस्यों ने संगठन को पूर्णतया गैर राजनीतिक तौर संचालित करने का संकल्प लिया। संगठन के सभी सदस्यों ने घुघुतिया संक्रांति (मकर संक्रांति) को सामुहिक और कुमाऊनी परम्परा के अनुसार मनाने का निर्णय लिया।


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