कोटद्वार की बर्बादी के खलनायक
डबल इंजन सरकार की कार्यप्रणाली
बेलगाम खनन माफ़िया
लाचार बेबस प्रशासन
कमजोर वन विभाग और एनजीटी विभाग
कोटद्वार का चापलूस, निकम्मा जनप्रतिनिधित्व
जाति और राजनीतिक दलों की तलवे चाटती स्थानीय जनता
कोटद्वार। सप्ताह भर से चली आ रही भारी बरसात ने कोटद्वार में तबाही मचाकर रख दी। बारीश की तबाही का मंजर यह है कि उसने अमीर गरीब की खाई को भी समतल बना दिया। कोटद्वार की जनता पिछले दो दिनों की वरुण देव के कोप का शिकार बनी हुई है।
गुरुवार को वरुण देव के कोपभाजन का शिकार भाबर और कोटद्वार को जोड़ने वाला प्रमुख मालन पुल स्थानीय प्रशासन, वन विभाग, एनजीटी, खनन माफियाओं व डबल काले चश्मे पहने जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली की भेंट चढ़ गया। गौरतलब है कि कोटद्वार का मालन नदी पर बना पुल भाबर और कोटद्वार को जोड़ने का काम करता है। मालन पुल के ध्वस्त होने से कोटद्वार की आर्थिकी से लेकर आमजन जीवन तो प्रभावित हुआ ही है साथ ही कोटद्वार में काम कर रही जिम्मेदार प्रशासनिक ईकाइयों सहित सत्ताधारी जनप्रतिनिधियों की लालची प्रवृत्ति ने कोटद्वार को बर्बाद करने में कोई कोर कसर नहीं छोडी़। कोटद्वार का मालन नदी का पुल, खोह नदी का झूला पुल, प्रेमनगर झंडी़चौड की पुलिया, सत्तीचौड़ की सुखरौ नदी से जुड़ी सड़क, बीईएल के समीप का पुल, गाड़ी घाट व गूलरपुल के समीप का पुल स्थानीय प्रशासन और खनन माफियाओं की आंख का कांटा बना हुआ है। स्थानीय जनता के आंशिक शिकायतों का प्रशासन द्वारा संज्ञान न लेना आज की मालन पुल की ध्वस्तीकरण की कहानी बयां करता है।
लोक संवाद टुडे की ओर से पुष्कर सिंह पवार ने कोटद्वार के बरसाती प्रकोप और कोटद्वार प्रशासन की कार्यशैली पर प्रश्न चिन्ह उठाए हैं वहीं कोटद्वार विधायक और राज्य की विधानसभा अध्यक्ष की खनन माफियाओं और प्रशासन को लगाम में रखने हवाई घोषणा की कलई खोलकर रख दी है। मुझे तो लगता है कोटद्वार की बर्बादी के मुख्य खलनायक डबल इंजन की सरकार के प्रतिनिधि, प्रशासन और बेलगाम खनन माफ़िया है।
