कोटद्वार का सुखरौ नदी का पुल ध्वस्त होने की कगार पर
सरकारी संरक्षण में हो रहे खनन ने सुखरौ पुल पर बरसाई सामत

पिता के सरकारी आशीर्वाद से बना था पुल,बेटी के कार्यकाल में होने लगा ध्वस्त
कोटद्वार में खनन माफियाओं के हौसले बुलंद,मालन,खोह नदी के पुल भी ध्वस्त होने की कगार पर
विधानसभा अध्यक्ष की कोटद्वार कानून व्यवस्था पर पकड़ ढीली
बेखौप होकर दिन दहाड़े खनन माफिया ने खोह,मालन और सुखरौ नदियों में सरकार की खोद डाली कबर
राजस्व विभाग,वन विभाग खनन विभाग से लेकर पुलिस प्रशासन बटोर रहा चांदी ही चांदी
दिन दहाड़े कोटद्वार की सड़कों पर दौड़ रहे अवैध खनन से भरे डम्पर, ट्रैक्टर।
नदियो का सीना चीर रहे पोकलैंड और जेसीबी, कोटद्वार प्रशासन घोड़े बेचकर सोया।
कोटद्वार नगरनिगम क्षेत्रांतर्गत बहने वाली सुखरौ नदी पर बने पुल धंसने की सूचना ने पूरे भाबर सहित कोटद्वार वासियों को भौचकक तो कर ही दिया साथ ही लोगों में दहशत भी जगा दी। शुक्रवार सुबह जब कोटद्वार आने जाने वाले लोगों ने सुखरौ पुल को धंसा हुआ पाया तो गुजरने वाले लोगों ने इसकी सूचना अपने अपने परिचितों को दी, देखते ही देखते यहखबर आग की तरह शहर में फैल गई, देखने वालों का जमावड़ा पुल पर एकत्रित होने लगा।
गौरतलब है कि कोटद्वार के खोह,सुखरौ व मालन नदी में लम्बे समय से वैध अवैध खनन जोरों पर है।खनन कारोबारियों और माफियाओं ने सरकारी संरक्षण में तीनों नदियों में बने पुलो की बुनियाद तक खोद डाली। वहीं नदियों में खनन मानकों के विपरित कर कहीं झील बना डाली, कहीं कुंए खोद डाले तो कहीं……..! बताते चलें कि खनन माफियाओं को राज्य सरकार का संरक्षण के साथ साथ स्थानीय सत्तासीन जनप्रतिनिधियों, पुलिस, प्रशासन का आशीर्वाद भी मिलता रहा जिसके चलते खनन माफिया बेखौफ हो गए। वहीं जब कोटद्वार के मालन और सुखरौ नदियों में पूर्व सड़क परिवहन मंत्री रहते हुए बीसी खंडूड़ी ने पुलों का निर्माण करवाया तो कोटद्वार को तो नव जीवन मिला ही साथ भाबर का विकास भी बुलंदियों के साथ हुवा। लेकिन इन पुलों की परिणति उनकी बेटी और वर्तमान कोटद्वार विधायक तथा सूबे की विधानसभा अध्यक्ष के कार्यकाल में उनके पिता की विरासत नष्ट होने को है। वहीं सरकार की कोताही और भाबर क्षेत्र के लोगों की अनदेखी के चलते भी आज सुखरौ पुल धंसने की कगार पर आ गया। अभी तो सुखरौ पुल खनन माफियाओं की लालच का शिकार हुवा है बाकी इन माफियाओं की ललचाई गिद्ध दृष्टि मालन पुल,खोह नदी पर बने तीनों पुल और बीईएल के समीप सुखरौ पुल पर भी है। हो न हो इन पुलों के ढहने और धंसने की खबर भी कोटद्वार के लोगों को शीघ्र ही न मिल जाए। अब कोटद्वार के नागरिकों को शायद अपने को और भविष्य की पीढ़ी को बचाने के लिए सरकार की हिटलरशाही, कानून की अनदेखी और प्रशासन की सोई नीद जगाने के लिए स्वयं आगे आकर लडाई लड़नी होगी।

पिता के सरकारी आशीर्वाद से बना था पुल,बेटी के कार्यकाल में होने लगा ध्वस्त
कोटद्वार में खनन माफियाओं के हौसले बुलंद,मालन,खोह नदी के पुल भी ध्वस्त होने की कगार पर
विधानसभा अध्यक्ष की कोटद्वार कानून व्यवस्था पर पकड़ ढीली
बेखौप होकर दिन दहाड़े खनन माफिया ने खोह,मालन और सुखरौ नदियों में सरकार की खोद डाली कबर
राजस्व विभाग,वन विभाग खनन विभाग से लेकर पुलिस प्रशासन बटोर रहा चांदी ही चांदी
दिन दहाड़े कोटद्वार की सड़कों पर दौड़ रहे अवैध खनन से भरे डम्पर, ट्रैक्टर।
नदियो का सीना चीर रहे पोकलैंड और जेसीबी, कोटद्वार प्रशासन घोड़े बेचकर सोया।
कोटद्वार नगरनिगम क्षेत्रांतर्गत बहने वाली सुखरौ नदी पर बने पुल धंसने की सूचना ने पूरे भाबर सहित कोटद्वार वासियों को भौचकक तो कर ही दिया साथ ही लोगों में दहशत भी जगा दी। शुक्रवार सुबह जब कोटद्वार आने जाने वाले लोगों ने सुखरौ पुल को धंसा हुआ पाया तो गुजरने वाले लोगों ने इसकी सूचना अपने अपने परिचितों को दी, देखते ही देखते यहखबर आग की तरह शहर में फैल गई, देखने वालों का जमावड़ा पुल पर एकत्रित होने लगा।
गौरतलब है कि कोटद्वार के खोह,सुखरौ व मालन नदी में लम्बे समय से वैध अवैध खनन जोरों पर है।खनन कारोबारियों और माफियाओं ने सरकारी संरक्षण में तीनों नदियों में बने पुलो की बुनियाद तक खोद डाली। वहीं नदियों में खनन मानकों के विपरित कर कहीं झील बना डाली, कहीं कुंए खोद डाले तो कहीं……..! बताते चलें कि खनन माफियाओं को राज्य सरकार का संरक्षण के साथ साथ स्थानीय सत्तासीन जनप्रतिनिधियों, पुलिस, प्रशासन का आशीर्वाद भी मिलता रहा जिसके चलते खनन माफिया बेखौफ हो गए। वहीं जब कोटद्वार के मालन और सुखरौ नदियों में पूर्व सड़क परिवहन मंत्री रहते हुए बीसी खंडूड़ी ने पुलों का निर्माण करवाया तो कोटद्वार को तो नव जीवन मिला ही साथ भाबर का विकास भी बुलंदियों के साथ हुवा। लेकिन इन पुलों की परिणति उनकी बेटी और वर्तमान कोटद्वार विधायक तथा सूबे की विधानसभा अध्यक्ष के कार्यकाल में उनके पिता की विरासत नष्ट होने को है। वहीं सरकार की कोताही और भाबर क्षेत्र के लोगों की अनदेखी के चलते भी आज सुखरौ पुल धंसने की कगार पर आ गया। अभी तो सुखरौ पुल खनन माफियाओं की लालच का शिकार हुवा है बाकी इन माफियाओं की ललचाई गिद्ध दृष्टि मालन पुल,खोह नदी पर बने तीनों पुल और बीईएल के समीप सुखरौ पुल पर भी है। हो न हो इन पुलों के ढहने और धंसने की खबर भी कोटद्वार के लोगों को शीघ्र ही न मिल जाए। अब कोटद्वार के नागरिकों को शायद अपने को और भविष्य की पीढ़ी को बचाने के लिए सरकार की हिटलरशाही, कानून की अनदेखी और प्रशासन की सोई नीद जगाने के लिए स्वयं आगे आकर लडाई लड़नी होगी।