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कोटद्वार का अधिवक्ता रघुवंशी हत्याकांड, अब किस पर गिरेगी गाज…?

रिपोर्टर: Author August 5, 2026

  कोटद्वार का अधिवक्ता रघुवंशी हत्याकांड, अब किस पर गिरेगी गाज…? 

  हाईकोर्ट की टिप्पणी प्रमुख सचिव न्याय की सर्विस बुक में दर्ज करने के आदेश

  एडवोकेट रघुवंशी हत्याकांड में हाई कोर्ट के आदेश ने कोटद्वार में ताकतवर भूमाफियाओं में मचाया भूचाल 

रिपोर्ट- पुष्कर सिंह पवार

  माननीय उच्च न्यायालय नैनीताल द्वारा एडवोकेट सुशील कुमार रघुवंशी हत्याकांड मामले में एडवोकेट की पत्नी रेखा रघुवंशी द्वारा दायर अपील की सुनवाई करते हुए प्रमुख सचिव न्याय के खिलाफ विशेष टिप्पणी तो की ही, साथ ही उक्त आदेश को प्रमुख सचिव न्याय नरेंद्र दत्त की सर्विस बुक में दर्ज करने के आदेश ने केस से जुड़े तमाम आरोपियों सहित आरोपियों को संरक्षण देने वालों की नींद उड़ा दी है ।

कोटद्वार के एडवोकेट बहुचर्चित रघुवंशी हत्याकांड ने गढ़वाल सहित कोटद्वार में सनसनी मचा दी थी, हत्याकांड को लेकर कोटद्वार पुलिस सहित पौड़ी प्रशासन व सत्ताधारी राजनीतिक लोगों पर आरोप लगने शुरू हो गए थे। इस हत्याकांड व्यापारिक संगठनों व धन्ना सेठों के दबाव में हत्या के एक साल तक पुलिस ने इस मुद्दे को उलझाए रखा था, और तमाम सबूतों को नजरंदाज कर दिया था, जिससे नाराज उत्तराखण्ड विकास पार्टी समेत कोटद्वार के विभिन्न सामाजिक, पत्रकार संगठनों व एडवोकेट की पत्नी रेखा रघुवंशी द्वारा हत्यारों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर 273दिनों का धरना दिया गया था। वहीं माननीय उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर इसकी जॉच सीबीआई को सौंपने की मांग की थी।

 जब पुलिस को अपनी कमजोरी का अहसास हुआ कि मामला सीबीआई को जा सकता है तो उसने आनन फानन में हत्यारों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस एवम अभियोजन पक्ष की लापरवाही व हीलाहवाली के कारण निचली अदालत द्वारा आरोपियों को दोष मुक्त कर दिया गया। निचली अदालत से न्याय न मिलने पर रेखा रघुवंशी की अपील माननीय उच्च न्यायालय में करने को न्याय विभाग ने मना कर दिया। रेखा रघुवंशी द्वारा दायर याचिका में माननीय उच्च न्यायालय ने इस मामले को पूरी तरह अपील करने के लिए उपयुक्त साक्ष्य और कारण पाए और न्याय विभाग से इसे खारिज करने के कारण पूछे ,जिसमें न्याय विभाग ने जिला गढ़वाल के डीजीसी क्रिमिनल के ऊपर दोष डालने का प्रयत्न किया । हाई कोर्ट ने कहा कि प्रमुख सचिव न्याय या तो निर्णय लेने में सक्षम नहीं हैं या निर्णय लेने की जिम्मेदारी अपने ऊपर नहीं लेना चाहते हैं। उन्हें भविष्य में सचेत रहने की चेतावनी दी जाती है और इसे उनके सर्विस रिकॉर्ड में दर्ज किया जाय।

रेखा रघुवंशी ने कहा कि माननीय उच्च न्यायालय के आदेश से इंसाफ की उम्मीद तो जगी है। वहीं उच्च न्यायालय के न्याय विभाग द्वारा प्रमुख सचिव न्याय पर की गई सख्त टिप्पणी सर्विस बुक में दर्ज करने के आदेश ने आरोपियों सहित आरोपियों को सहयोग करने वाले तत्वों की नीद उडा़ दी है। 

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