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“काले कव्वा काले,घुघुती माला खाले” कोटद्वार में कुमाऊं सामाजिक, सांस्कृतिक मैत्री समिति ने परम्परागत तरीके से मनाया घुघुती सज्ञान

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रिपोर्टर: Author August 5, 2026

 “काले कव्वा काले,घुघुती माला खाले” 
 कोटद्वार में कुमाऊं सामाजिक, सांस्कृतिक मैत्री समिति ने परम्परागत तरीके से मनाया घुघुती सज्ञान 

  कोटद्वार। सूर्य के धनु राशि से ममकर राशि में प्रवेश के साथ उत्तराखंड में त्यौहारों और मेलों की परम्परा शुरू हो जाती है। उत्तराखंड में सूर्य की परिवर्तन यात्रा से मकर राशि में प्रवेश को कुमाऊं में मकर संक्रांति, ( घुघुती),मकरैण सहित अन्य नामों से जाना जाता है तो वहीं गढ़वाल में भी यह त्यौहार मकरैण व गिंदी कौथिक से प्रसिद्ध है ।
  मकर संक्रांति पर कोटद्वार के मवाकोट,डाडामंडी व थल नदी पर लगने वाला गिंदी कौथिक मेले में स्थानीय लोगों के साथ पर्यटकों ने खूब मनोरंजन किया वहीं मेले की परम्परा की विरासत को जिंदा रखकर भविष्य की पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक धरोहर की परम्परा से अवगत कराया।
 कोटद्वार गढ़वाल में कुमाऊं मूल के वंशजों की पीढ़ी ने भी “कुमाऊं सामाजिक सांस्कृतिक मैत्री समिति” के सौजन्य से मकर संक्रांति को कुमाउनी रीति-रिवाजों के साथ कुमाऊनी बुजुर्गों के निर्देशन में कुमाऊं के महत्वपूर्ण त्यौहार घुघुती को परम्परागत कुमाऊनी तरीके से मनाया। कुमाऊं सामाजिक सांस्कृतिक मैत्री समिति के संरक्षक श्री शंकर दत्त जोशी के आवास पर समीति के पदाधिकारियों व सदस्यों ने सामूहिक रूप से घुघुती पकवान बनाए। इस अवसर पर सांस्कृतिक सचिव संभव अधिकारी व राम सिंह नेगी ने अपनी मधुर आवाज में कुमाऊनी लोकगीतों से कार्यक्रम में ऊर्जा भर दी। 
 कार्यक्रम को जीवंत बनाने के लिए समीति की उपाध्यक्ष मीना अधिकारी ने अपने संबोधन में कहा कि समीति को मजबूत और सक्रिय बनाने के लिए निरंतर प्रयास करना होगा व कुमाऊं की प्रतिष्ठित सांस्कृतिक विरासत को भविष्य की पीढ़ी को प्रोत्साहित करना होगा। कुबेर सिंह जलाल ने कहा कि समीति को राजनीतिक पचड़ों से दूर रहकर अपनी सामाजिक सांस्कृतिक परम्पराओं को मजबूत करने के लिए गढ़वाल मंडल के समस्त कुमाऊं प्रवासियों को एकजुट करना होगा। कोषाध्यक्ष पूरण सिंह अधिकारी ने बताया कि पिछले तीन सालों से समिति लगातार कुमाऊनी संस्कृति और त्यौहारों को सीमित संसाधनों के वावजूद जिंदा कर रही है। कुंदन सिंह नेगी ने जानकारी दी कि बंसत पंचमी का त्योहार लछमपुर कलालघाटी में मनाया जाएगा। पोखरिया ने कहा कि कुमाऊं परम्परा की सांस्कृतिक व सामाजिक संस्कृति पूरे विश्व में पहचान रखती है हमें इस परम्परा को आगे बढ़ाने के लिए भी काम करना होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता समिति अध्यक्ष हुकुम ने की।संचालन संभव अधिकारी ने कुमाऊनी भाषा में कर भाषा को जीवित कर दिया। कार्यक्रम के अंत में संरक्षक शंकर दत्त जोशी ने सभी आगंतुकों का धन्यवाद करते हुए सभी को आशीर्वाद देते हुए समीति को प्रोत्साहित किया। 
 

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