रिपोर्टर: Author
August 5, 2026
उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष कितना सच बोलती …..?
कितना जनता का भरोसा मंद है उत्तराखंड का विधानसभा मंत्रीमंडल और उनके स्टाफ….?
अंकिता भंडारी मामले को हाई प्रोफाइल बनाकर विधानसभा नियुक्तियों को ठंडे बस्ते में डालने का सरकार का कुचक्र
आजकल उत्तराखंड में बैकडोर और फ्रंट डोर से हुई नियुक्तियों ने उत्तराखंड में ही नहीं पूरे देश में चर्चाओं का बाजार गर्म किया हुआ है। नियुक्तियों के मामले को ठंडा करने के लिए उत्तराखंड में गोदी मीडिया के माध्यम से अंकिता भंडारी मामले को हाई प्रोफाइल पब्लिसिटी दी जा रही है कहीं न कहीं राजनीतिक दल बीजेपी के मायाजाल में उलझते नजर आने लगे हैं। रविवार गांधी जयंती के दिन जब सार्वजनिक छुट्टी होती है बीजेपी ने उत्तराखंड क्रांति दल के कंधों पर बंदूक रखकर मामले को उलझाने काम कर दिया है।
बात करते हैं वर्तमान उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष ऋतु भूषण खंडूरी के निजी सटाफ की नियुक्तियों को लेकर जिनमें विधानसभा अध्यक्ष ने निजी स्टाफ के नाम पर उत्राखंडियों को नियुक्ति में ठेंगा दिखाते हुए बाहरी राज्यों के लोगों को नियुक्ति देकर अपनी पैराशूट छवि पर मुहर लगाई है। वहीं बाहरी राज्यों के लोगों को निजी स्टाफ में नियुक्ति देकर देकर बहुत बड़े खेल पर पर्दा डालने का काम किया है। विधानसभा अध्यक्ष जिसे निजी स्टाफ की संज्ञा दे रही है वह उनका निजी स्टाफ कैसे हो सकता है जब स्टाफ का वेतन सरकारी खजाने यानि जनता के पैसे से हो रहा है…? अगर निजी स्टाफ है तो अपने खर्चे से स्टाफ रखना चाहिए।
विधानसभा अध्यक्ष ऋतु भूषण खंडूरी का सफेद झूठ
माननीय विधायक और विधानसभा अध्यक्ष ऋतु भूषण द्वारा अपने को पाकसाफ बताते हुए शुक्रवार को समाचार पत्रों के माध्यम से बताया कि उनका निजी स्टाफ 30-40 का अनुभवी हैं जबकि जारी लिस्ट में शामिल स्टाफ की आयु 50 वर्ष से कम अर्थात किसी की 35 तो किसी की 40 के लगभग दिखाई दे रही है। विधानसभा अध्यक्ष के शब्दों में जन्म से या 10 वर्ष की आयु से उनके द्वारा नियुक्त लोग नौकरी या राजनीतिक सेवा कर रहे हैं….!
