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August 5, 2026
उत्तराखंड राज्य में समान नागरिकता संहिता लागू हेतु प्रस्तावित प्रारूप पर चर्चा
हेमवती नंदन बहुगुणा विश्वविद्यालय के सभागार में उत्तराखंड राज्य में समान नागरिकता संहिता लागू हेतु प्रस्तावित प्रारूप पर चर्चा की गई। समिति के विशेषज्ञ सदस्य व उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह द्वारा मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग करते हुए उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता विषय से संबंधित क्षेत्रिय भ्रमण के दौरान लोगों से इस विषय पर सुझाव तथा प्रतिक्रिया प्राप्त किये गये। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता प्रारूप को तैयार करने से पहले परिचर्चा का यह अंतिम दौर है। बताया कि लोगों के साथ इस विषय पर चमोली जनपद के माणा गांव से शुरू कर श्रीनगर पर समाप्त हुआ है।
समिति के विशेषज्ञ सदस्य ने कहा कि समान नागरिक संहिता में सभी स्टैक होल्डर्स की भागीदारी आवश्यक है। कहा कि विवाह उत्तराधिकार तथा व्यक्तिगत मामलों को नियंत्रित करने वाली विधियों को सार्वभौमिक रूप से लागू करने का प्रयास किया जाना चाहिए, परन्तु समिति के सम्मुख सबसे बड़ी चुनौती है कि विविधताओं से भरे भारतीय समाज में इस प्रकार की सार्वभौमिक भूमि कैसे लागू की जा सकती है। उन्होंने विशेषकर बौद्धिक वर्ग से आग्रह किया कि वह समिति के कार्यों को आसान बनाने के लिए तथा उत्तरदायी नागरिक का कर्तव्य निभाने के लिए बढ़-चढ़कर समिति को समान नागरिक संहिता पर सुझाव दें। कहा कि हमारा मकसद समान नागरिक संहिता के विभिन्न बिदुंओं तथा लैंगिक समानता, विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संरक्षण, उत्तरादायित्व, भरण-पोषण इत्यादि के संबंध में लोगों के विचारों को सुनना है, जिससे सभी के सहयोग व विचार कर आवश्यक कार्यवाही की जा सकेगी।
उत्तराखंड राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने हेतु परिचर्चा में छात्र-छात्राओं द्वारा विवाह में समान वर्ष, विवाह पंजीकरण, महिलाओं की सुरक्षा, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रशिक्षण सहित अन्य मुद्दे समिति के सम्मुख रखें।
इस अवसर पर गौ सेवा आयोग के जिलाधिकारी गढ़वाल डॉ0 आशीष चौहान, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्वेता चौबे, समिति के सदस्य मनु गौड, उपजिलाधिकारी श्रीनगर अजयबीर सिंह, सीओ श्रीनगर श्याम दत्त नौटियाल सहित अन्य अधिकारी व छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।
दो दिवसीय पंचायत विकास योजना विषय पर त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों की कार्यशाला
चौरास परिसर स्थित स्वामी मनमंथन प्रेक्षागृह में शुक्रवार को पंचायतीराज विभाग उत्तराखंड की ओर से दो दिवसीय प्रशिक्षण एवं कार्यशाला का शुभारंभ मुख्य अतिथि पंचायतीराज मंत्री सतपाल महाराज ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। आयोजित कार्यक्रम में ग्रामीण क्षेत्रों के जनप्रतिनिधियों ने शिरकत की। कार्यक्रम के माध्यम से सतत विकास लक्ष्यों के स्थानीयकरण एवं ग्राम पंचायत विकास योजना विषय पर त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों एवं कार्मिकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
दो दिवसीय कार्यशाला के पहले दिन कार्यक्रम को संबोधित करते हुये पंचायती राज मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि हमारा प्रयास है कि प्रदेश में जिला पंचायत अध्यक्ष और क्षेत्र पंचायत प्रमुख का चुनाव आम चुनाव के माध्यम से हो। राज्य स्तरीय अभिमुखीकरण कार्यशाला में पांच जनपदों के प्रतिनिधि प्रतिभाग कर रहे है। कार्यशाला के माध्यम से सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति, ठोस तरल अपशिष्ट प्रबंधन और जल जीवन मिशन को कैसे सफल किया जा सके इसी मंशा से कार्यशाला आयोजित की गई है। इस दौरान उन्होंने स्थानीय जरूरतों को देखते और समझते हुए जनप्रतिनिधियों को ग्रामीणों के सतत विकास की रूपरेखा बनाने का सुझाव दिया।
कार्यक्रम को संबोधित कर हुए संयुक्त निदेशक पंचायती राज राजीव कुमार त्रिपाठी ने कहा कि त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों की कार्यशाला जनप्रतिनिधियों के क्षमता विकास के लिए आयोजित की गई है ताकि सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सके। कहा कि विकास योजनाओं को बनाने और योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए कैसे कार्यनीति बने, यह इस अभिमुखीकरण कार्यशाला का उद्देश्य है।
आयोजित कार्यक्रम में पाणी राखो आंदोलन के प्रणेता सच्चिदानंद भारती ने कहा कि ग्रामीण अंचल में पंचायती राज को सशक्त बनाने के लिए ऐसी कार्यशालाओं का अत्यधिक महत्व है। सरकार का गांव की सरकार को स्वराज की ओर ले जाने का यही सबसे बेहतरीन तरीका है।
कार्यक्रम को बोझिल बनने से रोकने हेतु लोक गायक अनिल बिष्ट व श्रीमती हेमा नेगी करासी ने अपने सूरों से कार्यक्रम में रंगारंग प्रस्तुति देकर उपस्थित जन समूह मंत्र मुग्ध कर भरपूर मनोरंजन कर कार्यशाला में भाग ले रहे लोगों को तरोताज़ा कर दिया।