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उत्तराखंड में मुख्यमंत्री का पहली बार लापरवाही पर कठोर निर्णय

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रिपोर्टर: Author August 5, 2026

  उत्तराखंड में मुख्यमंत्री का पहली बार लापरवाही पर कठोर निर्णय 

 कुमाऊं विनसर, अल्मोड़ा में वनाग्नि हादसे के बाद अफसरशाही पर जड़ा चाबुक 

 उत्तराखंड। अल्मोड़ा जिले के विनसर वन संभाग में वनाग्नि से चार वन कर्मियों के जिंदा जलने की घटना ने उत्तराखंड सहित पूरे देश को दहला दिया। वनाग्नि की इस घटना में वन-विभाग के उच्चाधिकारियों गैरजिम्मेदाराना रवैए ने चार निर्धन परिवारों के चिराग बुझाने के साथ परिवारों के बच्चों के सर से उनके सरपरस्त को भी छीन लिया। 

 वनाग्नि मामलों में सबसे अधिक गैरजिम्मेदाराना और लापरवाही अधिकारियों की ही देखने को मिलती है। वन-विभाग के रेंजरों से लेकर सभी उच्चाधिकारियों में अधिकांश को अपने अधिकार क्षेत्र की रेंजों की बीट क्षेत्रफल का अता-पता तक नहीं होता,एसी में बैठकर वन क्षेत्रों का आंकलन किया जाता है कभी कभार अगर वन क्षेत्र में चले भी गए तो फारेस्ट रेंज के बंगलों में मौज-मस्ती कर वापस लौट गए।

 वन-विभाग के उच्चाधिकारियों द्वारा वन मजदूरों, दैनिक मजदूरों और फारेस्टर व फारेस्ट गार्डो का जमकर शोषण किया जाता है। इन गैरजिम्मेदार अधिकारियों द्वारा दैनिक व संविदा वन कर्मियों को सात आठ महीनों तक बिना वेतन/मजदूरी के काम करवाया जाता है। फायर सीजन से पहले सैकड़ों हेक्टेयर वन क्षेत्रों के लिए दो-चार फायर वानरों से काम करवाने का दबाव बनाया जाता है। फायर सीजन से पहले न तो उच्चाधिकारियों द्वारा फायर लाईनों का स्थलीय निरीक्षण किया जाता है न ही फायर वाचरों को सुरक्षा उपकरण और आवश्यक जरुरतों को उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाती है।

 वन विभाग के शहरों में बैठे अधिकारियों के विषय में एक माह पूर्व लैंसडाउन विधानसभा के विधायक दलीप सिंह रावत की चर्चित विडियो ने भी गैरजिम्मेदार और लापरवाह अधिकारियों के विषय में वास्तविक और व्यवहारिक बात कही थी जिसका शायद मुख्यमंत्री ने संज्ञान लिया होगा और आज वनाग्नि लापरवाही पर उच्च स्तर के अधिकारियों पर कार्रवाई करते हुए पूरे राज्य के उच्चाधिकारियों को कठोर संदेश दिया है कि अब गैरजिम्मेदाराना रवैए और लापरवाही पर स्थानीय कर्मचारियों के बजाय उच्चाधिकारियों पर कठोर कार्यवाही होगी।

  वनाग्नि की लापरवाही पर गढ़वाल मंडल में भी भारी तबाही और नुकसान हुआ इस बात का संज्ञान लेते हुए पौड़ी जिले और चमोली जिले के अधिकारियों पर भी कठोर कार्यवाही कर ब्यूरोक्रेसी को हंटर जड़ा जाए जिससे स्थानीय स्तर के कर्मचारियों को भी प्रोत्साहन मिल सके कि वे ही बली का बकरा नहीं है….।

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