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उत्तराखंड में गजब एक्सन, 2 IAS, 1 PCS सहित 12 अफसर निलंबित

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रिपोर्टर: Author August 5, 2026

उत्तराखंड में गजब एक्सन 2 IAS, 1 PCS सहित 12 अफसर निलंबित 

हरिद्वार ज़मीन घोटाले में धामी सरकार की सख्त कार्रवाई 




  उत्तराखंड धामी सरकार का अब तक का सबसे धमाकेदार फैसला आया है जिसने जहां नौकरशाहों के खेमे में खलबली मचा दी वहीं राज्य की जनता को भी राज्य सरकार की कार्यशैली पर विश्वास की उम्मीद जगाई है। उत्तराखंड सरकार ने राजनीति और प्रशासन में बड़ा बदलाव लाने वाली कार्रवाई करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार ज़मीन घोटाले में बड़ी कार्रवाई कर चौंकाते हुए करीब 54 करोड़ रुपये के इस भूमि घोटाले में 2 IAS और 1 PCS अफसर सहित कुल 12 अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। मामले की जांच अब विजिलेंस विभाग को सौंप दी गई है, और दोषी पाए गए अफसरों पर विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू हो चुकी है।

     निलंबित अधिकारियों की सूची

  1. कर्मेन्द्र सिंह (जिलाधिकारी, हरिद्वार) — भूमि क्रय की अनुमति और प्रशासनिक मंज़ूरी में संदेहास्पद भूमिका।
  2. वरुण चौधरी (पूर्व नगर आयुक्त, हरिद्वार) — पारदर्शी प्रक्रिया के बिना भूमि प्रस्ताव पारित करने और वित्तीय अनियमितता में संलिप्तता।
  3. अजयवीर सिंह (एसडीएम) — भूमि निरीक्षण में लापरवाही और गलत रिपोर्ट शासन को भेजना।
  4. निकिता बिष्ट (वरिष्ठ वित्त अधिकारी, नगर निगम)
  5. विक्की (वरिष्ठ वैयक्तिक सहायक)
  6. राजेश कुमार (रजिस्ट्रार कानूनगो)
  7. कमलदास (मुख्य प्रशासनिक अधिकारी, तहसील हरिद्वार)

पूर्व में निलंबित अधिकारियों की सूची:

  • रविंद्र कुमार दयाल (प्रभारी सहायक नगर आयुक्त)
  • आनंद सिंह मिश्रवाण (प्रभारी अधिशासी अभियंता)
  • लक्ष्मीकांत भट्ट (कर एवं राजस्व अधीक्षक)
  • दिनेश चंद्र कांडपाल (अवर अभियंता)

इसके अलावा संपत्ति लिपिक वेदवाल का सेवा विस्तार रद्द कर दिया गया है, और उनके विरुद्ध सिविल सर्विसेज रेगुलेशन के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। 

   ज़मीन घोटाले की पृष्ठभूमि 

जमीन घोटाले की यह पृष्ठभूमि हरिद्वार नगर निगम ने शहर के बाहरी क्षेत्र में स्थित अविकसित और अनुपयुक्त कृषि भूमि, जिसे कूड़े के ढेर के पास बताया गया है, को 54 करोड़ रुपये में खरीदा। बताया जा रहा है कि इस जमीन की वास्तविक कीमत लगभग 15 करोड़ रुपये थी। इस खरीद में न केवल भूमि की आवश्यकता संदिग्ध थी, बल्कि बोली प्रक्रिया में भी पारदर्शिता का अभाव पाया गया। शासन के स्पष्ट निर्देशों को दरकिनार कर यह सौदा संपन्न हुआ। इस घोटाले में जमीन से जुड़े निचले कर्मचारियों से लेकर उच्च स्तर के आपसी गठबंधन ने इस घटनाक्रम की नींव मजबूत क

 धामी की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का हंटर

 उत्तराखंड में भाजपा सरकार लगातार जीरो टॉलरेंस पर काम करने  की बात कहते हुए आई है। सीएम धामी की यह कार्रवाई केवल एक घोटाले के खिलाफ कदम नहीं है, बल्कि यह संदेश भी है कि अब उत्तराखंड में ‘पद नहीं, कर्तव्य और जवाबदेही’ महत्वपूर्ण हैं। चाहे अफसर कितना भी वरिष्ठ क्यों न हो, यदि वह जनहित और नियमों की अनदेखी करेगा तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई तय है। यही उत्तराखंड भाजपा और युवा मुख्यमंत्री पुष्कर धामी की जीरो टॉलरेंस नीति है।

धामी सरकार के इस सख्त और कठोर निर्णय को उत्तराखंड में भ्रष्टाचार के विरुद्ध निर्णायक प्रहार के रूप में देखा जा रहा है। यह पहली बार है जब किसी सत्तारूढ़ सरकार ने इतनी बड़ी संख्या में शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ इतनी कठोर सख्ती दिखाई है। 

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के इस ऐतिहासिक फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि अब उत्तराखंड में भ्रष्टाचार के लिए कोई स्थान नहीं। सरकार केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं, बल्कि व्यवस्था की शुद्धि और जवाबदेही को सर्वोपरि मान रही है। मुख्यमंत्री धामी के इस फैसले ने समस्त विभागों के भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारी, कर्मचारियों की आंखों से नींद उडा़ दी है।

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