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उत्तराखंड चुनाव, अलग अलग विचारधाराओं के प्रत्याशी

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रिपोर्टर: Author August 5, 2026

 उत्तराखंड  चुनाव, अलग अलग विचारधाराओं के प्रत्याशी 

  दयानंद सरस्वती की  1870 में  राजा और प्रजा की ताकत के विषय  में  कही  बात  आज अक्षरशः सही  साबित होती नजर  आ रही  है ।सरस्वती जी के अनुसार _ ” राजा को जनता के अधीन  होना  चाहिए, वर्ना राजा जनता को लूटने में कोई कमी नहीं  छोड़ेंगे,और राज्य के  विनाश में  देर नहीं  लगेगी ।”


हम जिस गणराज्य की स्थापना करना चाहते हैं, उसमें नागरिकों के पास वोट वापस लेने का अधिकार होगा । यदि भारतीयों के पास वोट वापस लेने का अधिकार नहीं  हुवा तो लोकतंत्र एक मजाक

भारत एक लोकतांत्रिक देश  है  जहाँ  देश  के  प्रत्येक  नागरिक को चुनाव में  भागीदारी करने का मौका  मिलता  है । इस लोकतांत्रिक देश में   लोग अपने अपने तरीके से लोकतंत्र का उपयोग करते नजर आते हैं।

लोकतंत्र के महापर्व चुनाव में कई प्रतिभाशाली, महत्वाकांक्षी, धनकुबेर, अपराधिक प्रवृत्ति, और प्रयोगधर्मी मानसिकता के लोग जनता के बीच अपनी अपनी प्राथमिकता के बलबूते सत्ता में भागीदारी चाहते हैं ।

 वर्तमान  में  देश के  पांच राज्यों में लोकतंत्र के त्यौहार का मेला लगा हुआ है ।इस मेले  में कई सामाजिक राजनीतिक, सास्कृतिक, अपराधिक पृष्ठभूमि के लोग चुनावी दंगल में  भागीदारी कर रहे  हैं । वही विभिन्न राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दल भी  अपने अपने प्रत्याशियों के साथ  चुनावी दंगल में  है ।

उत्तराखंड की कोटद्वार  विधानसभा में  बुजुर्ग राजनीतिक हस्तियों के  साथ स्कूली  युवा ने भी दस्तक दी है । स्कूली युवा प्रत्याशी  आकाश नेगी ने भविष्य की राजनीतिक जरूरत को देखते हुए एक ऐसे दल को चुना है  जिसे वर्तमान राजनीति में बड़ते भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद, जातिवाद और धार्मिक साम्प्रदायिक का हित से   जुडने के बजाय  स्वच्छ राजनीति  के  द्वारा लोकतंत्र  की ताकत से  जनता  को जोड़ने का काम करना  है ।  उत्तराखंड  सहित पांचो राज्यों में  हार जीत की भावनाओं से हटकर लोकतंत्र की पवित्रता के लिए संघर्ष करने वाले राजनीतिक दल ” राईट टू रिकाल पार्टी  ” के वैनर तले आजादी  के  मूल स्तम्भों में से एक,,’चंद्रशेखर आज़ाद के 1925 में  दिए गणराज्य की सोच के  विचार _ “हम जिस गणराज्य की स्थापना करना चाहते हैं, उसमें नागरिकों के पास वोट वापस लेने का अधिकार होगा । यदि भारतीयों के पास वोट वापस लेने का अधिकार नहीं  हुवा तो लोकतंत्र एक मजाक बनकर रह जाएगा ।” कोटद्वार गढ़वाल में  भी  राज्य में  क्रांतिकारी देश भक्तों की प्रेरणा  से राज्य में  ज्यूरी कोर्ट, वोट वापसी, रिक्त भूमि कर एवं धन वापसी कानून के लिए  संघर्ष कर रहे  पार्टी के  समर्पित कार्यकर्ता विधानसभा की दावेदारी  ठोक  रहे  हैं । स्वच्छ और सही  सरकार चुनने के  लिए  जनता  को  ही पहल करनी होगी ।

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