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उत्तराखंड को शिखर पर ले जाने वाला उद्यान विभाग ने राज्य को कुंए में धकेलने की तैयारियां की पूरी

रिपोर्टर: Author August 5, 2026

 

उत्तराखंड को शिखर पर ले जाने वाला उद्यान विभाग ने राज्य को कुंए में धकेलने की तैयारियां की पूरी 

 अप्रशिक्षित मजदूरों और गैर मान्यता प्राप्त नर्सरियों से हो रही फलदार पौधों की खरीद फरोख्त 

 गैर जिम्मेदार अधिकारियों पर है उत्तराखंड उद्यान विभाग की बागडोर

मनमाने  ठंग से व मनमाफिक कीमतों में बाहरी राज्यों से की जा रही है फल पौधौ की आपूर्ति।

क्या ऐसे ही बनेगा कृषि में उत्तराखंड आत्मनिर्भर ……?

 डा० राजेंद्र कुकसाल- सेवानिवृत उद्यान विशेषज्ञ 

पुष्कर सिंह पवार” पदम   “


  ‌‌उत्तराखंड की भौगोलिक पृष्ठभूमि को देखते हुए राज्य में उद्यान से संबंधित कार्यों को ईमानदारी से करने पर काफी हद पलायन जैसे अभिशाप पर कमी लाई जा सकती है। राज्य का 60 प्रतिशत से अधिक भूभाग भौगोलिक, क्लाईमेट,और कार्य की दृष्टि से सुगम भी है। शायद राज्य के पहाड़ी लोगों ने इसी भावना से राज्य की लड़ाई में अपना बहुत कुछ खोया, परन्तु मिला क्या…? केवल उद्यान विभाग की बात करें तो विभागीय मंत्री से लेकर संत्रियो ने राज्य की जनता की अपेक्षाओं को रौंदते हुए जिस ततह लूट खसोट मचाई है वह अब जग जाहिर हो चुकी है। लेकिन देखिए सरकार सत्ता पर विराजमान पार्टियों की बेशर्मी दागदार जनप्रतिनिधियों को राज्य का मुखिया बना दिया, अधिकारियों को ताज पहना दिया, विदेश यात्राओं का तोहफा दे दिया और किसानों व उद्यान पतियों के खेत बगीचों को बंजर करा दिया, उत्तराखंड की जनता को पलायन करने पर विवश कर दिया।

        विभाग और मंत्रालय की वेशर्मी की करतूत


 सामाजिकक कार्यकर्ता  दीपक करगेती रानीखेत अल्मोड़ा ने उद्यान निदेशक पर विभाग से मांगी गई सूचनाओं को आधार बनाकर आरोप लगाया है कि वर्ष 2021-22 में मनमाने तरीके से 6 माह के भीतर इनके द्वारा कीवी पौंध कटिंग की दरें क्रमशः रू 35.00 से रू 75.00 एवं रू 75 से रू 225 तथा कीवी ग्राफ्टेड पौंध की दर क्रमशः रू 75 से रू 175 एवं रू 175 से रू 275 कर बढ़ाए हुए दरों पर लगभग 77000 कीवी फल के पौधोंं को हिमाचल की व्यक्तिगत पंजीकृत नर्सरी से क्रय कर भारी अनियमितता करते हुए राजकीय धनराशि का गबन किया गया है। यह समस्त प्रक्रिया बिना निविदा की प्रोक्योरमेंट नियमावली का अनुपालन किए बिना की गई है । जबकि हिमाचल प्रदेश उद्यान विभाग द्वारा इसी वर्ष 2021-22 में किवी के कटिंग की दर रू 80 प्रति पौध,तथा किवी ग्राफ्टेड की दर रू 100 प्रति पौध निर्धारित की गई। यदि उद्यान विभाग उत्तराखंड ,उद्यान विभाग हिमाचल के माध्यम से भी पौधों की खरीद करता तो इन्हें कीवी कटिंग रु 80 प्रति पौध,तथा किवी ग्राफ्टेड रु 100 प्रति पौध की दर पर पौधे उपलब्ध हो जाते । करगेती द्वारा इसकी शिकायत मुख्यमंत्री, कृषि एवं उद्यान मन्त्री, मुख्य सचिव, सचिव उद्यान एवं सतर्कता विभाग को की गई है। परन्तु सरकार द्वारा शिकायत पर संज्ञान न लेना बताता है कि जीरो टॉलरेंस की सरकार जनता की शिकायतों पर कितना गंभीर है….?

उत्तराखंड के उद्यानपति और नर्सरी संचालक की शिकायत

वही  उद्यान पति एवं पंजीकृत व्यक्तिगत पौधालय के मालिक  वीरबान सिंह रावत ,जनपद टेहरी गढ़वाल , नैनबाग पंतवाडी ने सचिव उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण सचिवालय उत्तराखंड शासन देहरादून को  शपथ पत्र पर दिनांक 13 – 05 -2022  शिकायत की है कि निदेशक उद्यान द्वारा राज्य की राजकीय व व्यक्तिगत पंजीकृत नर्सरियों को दर-किनार कर कश्मीर से लाखों रुपए के सेब के बीजू पौधे एवं साइनवुड उच्च दामों में क्रय कर मंगाये गये है यही नहीं बल्कि ग्राफ्ट बाधाने हेतु मजदूर भी कश्मीर से आयातित किये गये है। रावत ने शिकायत की है कि वर्तमान में राज्य सरकार नीति के अनुसार किसानों को फल पौध वितरण हेतु जनपद के अन्तर्गत राजकीय व व्यक्ति गत पंजीकृत पौधालयों से क्रय मैं प्राथमिकता देने का प्रावधान है। जनपद मैं पौध उपलब्ध न होने की स्थिति में समीप के जनपद के राजकीय व व्यक्ति गत पंजीकृत पौधशाला से क्रय करने का प्रावधान है इसके अतिरिक्त भारत सरकार के राजकीय संस्थानों कृषि एवं औद्यानिक विश्वविद्यालयों व ICAR संस्था के पौधालय से सीधे क्रय करने का भी प्रावधान है।

 राज्य से बाहर की नर्सरियों से क्या है नियम कानून

राज्य से बाहर स्थित पंजीकृत व व्यक्तिगत पौधालयौ से पौध क्रय करने में निविदा प्रक्रिया अपनाना आवश्यक है साथ ही निविदा में सफल पौधालय से पौध प्राप्त करने से पहले विभागीय समिति द्वारा सत्यापन आवश्यक है। परंतु वर्तमान में उद्यान विभाग द्वारा नियमों का उलंघन करते हुए राज्य से बाहर की व्यक्तिगत पौधालयों से बिना किसी निविदा व बिना समिति के गठन व सत्यापन की प्रक्रिया अपनाते हुए सीधे उच्च दर पर पौध क्रय किए जा रहे हैं जबकि राज्य में 100 के लगभग पंजीकृत व National Horticulture Board से Accredited पौधालयों में पौध उपलब्ध है। पिछले वर्ष गैरसैंण में मुख्यमंत्री द्वारा घोषणा के अनुपालन में बिना निविदा प्रक्रिया अपनाते हुए काश्मीर से सेब व नाशपाती पौध बिना सत्यापन के उच्च दर पर पौधे क्रय किये गये जिनमें लगभग 50% पौधे जीवित नहीं हैं।

   वर्तमान में विभाग ने सेव प्रजातियों की पौध क्रय करने में क्या प्रक्रिया अपनाई

वर्तमान में सेब आदि के साइड वुड बिना निविदा प्रक्रिया अपनाये हुए कश्मीर के पौधालय मै० जावेद नर्सरी से बिना सत्यापन के उच्च दर ( 35,40 व 80 रु ) में क्रय कर विभागीय नर्सरी में काश्मीर के व्यक्तियों द्वारा उच्च दर पर ग्राफ्टिंग करने का कार्य जोरों पर है। जबकि इन्हीं पौधों के साइड वुड राज्य की पंजीकृत पौधशालाओं में (विभागीय दर 15 रु) में उपलब्ध है जिसकी सूचना निदेशक को दिसंबर 2021 में दे दी गई थी। विभाग द्वारा सेब के बीजू पौध भी लाखों की संख्या में महंगे दामों पर कश्मीर से क्रय किए गए जबकि राज्य की पंजीकृत पौधशालाओं में पर्याप्त मात्रा में बीजू पौध उपलब्ध है।

   पौधे ग्राफ्टिंग की क्या है प्रक्रिया

 ग्राफ्टिंग कार्य विभाग के प्रशिक्षित मालियों द्वारा ना करा कर कश्मीर के मै० जावेद नर्सरी अप्रशिक्षित मजदूरों द्वारा महंगे दामों में विभागीय नर्सरी में करवाने का कार्य बड़े जोरों पर है जिससे राज्य में धन की हानि हो रही है व विभागीय मालियों के कौशल का हनन हो रहा है।

उत्तराखंड शासन की फल पौध सब्जी बीज मसाला बीज आदि सभी की आपूर्ति के निर्देश

 उत्तराखंड शासन के स्पष्ट निर्देश है कि सारे निवेश यथा फल पौध सब्जी बीज मसाला बीज आदि सभी की आपूर्ति विभागीय पौधालयों, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के संस्थानों कृषि एवं औद्यानिक विश्वविद्यालयों से ही क्रय किए जाएं यदि इन संस्थानों में उपलब्धता कम है तो अन्तर की पूर्ति निविदा प्रक्रिया के माध्यम से  गोविंद वल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय पंतनगर के विषय विशेषज्ञों के सहयोग से की जाय। आपूर्ति होने वाली सामग्री की गोविंद वल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय पंतनगर के माध्यम से सामग्री/ स्टाक की Sample Testing अनिवार्य रूप से की जाय।

  उत्तराखंड में कृषि एवं उद्यान विभाग के कारनामों से नहीं लगता कि प्रधानमंत्री जी का कृषकों के हित के प्रयास सफल होंगे। मुख्यमंत्री जी आत्मनिर्भर उत्तराखंड की वात कर रहे हैं। क्या ऐसे बनेगा उत्तराखंड आत्मनिर्भर यक्ष प्रश्न ?

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