उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री के जिले की लाचार शिक्षा व्यवस्था
शिक्षा के मंदिर बन रहे यमराज
शिक्षा का स्तर, बद से बदहाल
जीरो टॉलरेंस की सरकार का, जीरो परिणाम
प्रधान से लेकर शिक्षा मंत्री शहरों में रहकर पहाड़ के नागरिकों की शिक्षा व्यवस्था को चौपट कर पलायन पर कर रहे लाचार
उत्तराखंड शब्द का नाम आते ही पूरे भारत वर्ष में बद्री केदार का दर्शन हो जाता है, भोले भाले, सीधे सच्चे और ईमानदार उत्राखंडी जनमानस का चेहरा उभर आता है. वर्तमान दौर में पहाड़ के इन भोले भाले ईमानदार पहाडि़यों का कुछ चालाक, चतुर और भ्रष्ट जनप्रतिनिधियों ने पहाड़ से पलायन कर शहरों में रहकर भोलेपन का फायदा उठाकर पहाडों को बर्बाद कर जबरन पलायन करने के लिए विवशता की स्थिति बना दी है.
आज हम पहाड़ के उस जिले की बात कर रहे हैं जिसने राज्य बनने के बाद सबसे ज्यादा मुख्यमंत्री दिए हैं. वर्तमान में इस जिले का केन्द्र में भी ब्योरेक्रेट में भी काफी असरदार दबदबा है. जी हाँ यह जिला है पौड़ी गढ़वाल. वर्तमान में इस जिले से शिक्षा मंत्री, पर्यटन मंत्री जैसे कैबिनेट मंत्री राज्य सरकार का हिस्सा हैं.
बात करते हैं जिले के एक समृद्ध गाँव अंदर गाँव ( कोटडी़सैंण) रिखडी़खाल विकास खंड की प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था की. रा. प्राथमिक विद्यालय अंदर गाँव की स्थिति वर्तमान में शिक्षा मंदिर के वजाय यमराज का मंदिर की बनी हुई है. विद्यालय का भवन देखकर लगता है कि शिक्षा विभाग के शिक्षकों से लेकर अधिकारी, जनप्रतिनिधियों में प्रधान से लेकर शिक्षा मंत्री नहीं चाहते कि अंदर गाँव के लोग शिक्षित बने. जनप्रतिनिधियों की स्कूल के प्रति उपेक्षा से विद्यालय भवन शमशान भवन की तरह नजर आ रहा है तो शिक्षकों का विद्यार्थियों को शिक्षित करने का स्तर भी शिक्षकों की काबिलियत पर चार ग्रहण ग्रसित चांद लगा रहा है. स्थानीय निवासियों के अनुसार विद्यालय की सुध लेने के लिए न अधिकारियों पर समय है और न ही जनप्रतिनिधियों को. कई बार मौखिक और लिखित सूचना विद्यालय की स्थिति को लेकर दी गई, जनता दरबार में मौका मुयायना भी करवाया. हां जरूर मुंगेरी लाल का सपना और आश्वासन मिला. अब देखना यह है आने वाले समय में विद्या का बाल मंदिर अपना वास्तविक स्वरूप में आता है या फिर अंदर गाँव के लोगों के लिए यह यमराज का मंदिर बनेगा.
