कोटद्वार। आवारा पशुओं से मुसीबत झेल रहे कोटद्वार नगर निगम क्षेत्र के आम नागरिकों से लेकर किसानों का जीना दूभर हो गया है। कोटद्वार नगरनिगम से लेकर प्रशासन ने लोगों को सुरक्षा देने के लिए शहर में सरकारी स्तर पर प्रयास भी किया , लेकिन लापरवाह और गैरजिम्मेदाराकप रवैया अपनाया गया है। जिसके चलते ग्रामीणों और स्थानीय लोगो को भारी नुक़सान झेलना पड़ रहा है। जिसके चलते ग्रामीणों और स्थानीय लोगो का जहां खेती से मोहभंग हो रहा है वही शहर में जान बचाने के भी लाले पड रहे हैं। कोटद्वार नगरनिगम क्षेत्र में चार गौशाला पशुधन को संरक्षित करने का जिम्मा उठाए हुए हैं, लेकिन अधिकतर गौशाला जमीन कब्जाने और पशुपालन और और संरक्षण के नाम पर चंदा वसूलने तथा डेयरी संचालन मे लिप्त है। कोटद्वार नगरनिगम क्षेत्र में जिस प्रकार से आवारा पशु धन बढ़ता जा रहा है। उससे तो नहीं लगता कि को संचालकों को संचालन करने वाले संस्थाओं के मन में स्थानीय लोगों और किसानों के प्रति कोई पीड़ा है, और नहीं नगर निगम और प्रशासन के मन में। जिस प्रकार लगातार को संचालन करने वाली संस्थाओं मनमाने रूप से अपने गौशालाओं में केवल गाय ही रख रहे हैं और सांडों को स्थान नहीं दे रहे हैं। आने वाले समय में कोटद्वार के लिए यह एक गंभीर समस्या बन सकता है। स्थानीय समाजसेवी और किसान आलोक रावत का कहना है कि जब से बीजेपी सरकार आई है उसके द्वारा पशु सुरक्षा के नाम पर लोगों का उत्पीड़न किया जा रहा है और किसानों को बर्बाद किया जा रहा है। वही ग्राम पंचायत क्षेत्र जुडडा के पंचायत सदस्य भरत नेगी का मानना है कि सरकार को पशु संरक्षण के लिए उचित धन का प्रबंधन करना चाहिए जिससे कि को संचालन करने वाली संस्थाएं सही ढंग से उनकी व्यवस्था कर सकें।कोटद्वार के आरटीआई कार्यकर्ता पत्रकार और समाजसेवी उमेद सिंह रावत का कहना है कि नगर निगम प्रशासन प्रशासन और को संचालन करने वाली संस्थाएं जनता को मूर्ख बनाकर सरकारी धन का दुरुपयोग कर रहे हैं।एसे गौशाला संचालकों को संचालन के नाम पर डेरिया संचालित कर रहे हैं और लोगों की नुकसान की जिम्मेदारी का कारण बन रहे हैं उमेद सिंह रावत का यहां तक कहना है कि शहर में और शहर के आसपास जितना भी गोवंश आवारा घूम रहा है उसकी जिम्मेदारी पूरी को संचालकों की बनती है ,और अगर गोवंश सड़कों पर आवारा पाया जाता है तो इसकी भरपाई गो संचालकों और गौ संरक्षण के नाम पर संचालन करने वाली संस्थाओं से वसूली की जानी चाहिए। कोटद्वार के नगर निगम क्षेत्र में पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार द्वारा एक पशु प्रेमी संस्था को पशु संरक्षण के लिए 3 बीघा भूमि आवंटित की गई परंतु मोटाढांग और उसके आसपास के क्षेत्र के लोगों का कहना है कि वहां पर दो चार पशु ही गौशाला में हैं ,जबकि वहां पर दो सौ ढाई सौ पशुओं की रहने की व्यवस्था है और उसी संस्था को काशीरामपुर तल्ला में फिर से गौ संचालन का जिम्मा सौंप दिया गया है। जहां पर नगर निगम और राज्य सरकार का ₹ 2500000 लाख तक की राशिआवंटित करने की घोषणा पशु सेवा आयोग के उपाध्यक्ष द्वारा की गई थी ,परंतु वहां पर भी दो-चार पशुओं के अलावा कोई पशुअगर नहीं नजर आ रहा है ।इसके अलावा सती चौक में सिद्धबली मंदिर समिति के नाम से भी गौ सेवा संचालित है जहां पर 20 बीघासे अधिक भूमि गौ संरक्षण के नाम पर संचालित है, लेकिन वहां पर भी बहुत कम पशुओं को भूमि के हिसाब से संरक्षण दिया जा रहा है । इसके अलावा कोटद्वार के मुक्तिधाम में भी गौ सेवा संचालित की जा रही है लेकिन वहां पर भी डेयरी संचालन के अतिरिक्त सांडों के लिए कोई व्यवस्था ना होना एक गंभीर विषय है ।जबकि वह भूमि भी पूर्व नगरपालिका द्वारा आवंटित की गई थी अब ऐसे में अगर गौ संस्था संचालक केवल गौ पशु संरक्षण के नाम पर भूमि को कब्जाते रहेंगे तो कैसे पशुओं का संरक्षण होगा और कैसे किसान इन आवारा पशुओं से अपनी भूमि पर फसल को बचा पाएंगे यह देखने वाली बात है।

आवारा पशुओं से मुसीबत झेल रहे कोटद्वार नगर निगम क्षेत्र के आम नागरिकों से लेकर किसानों का जीना दूभर
रिपोर्टर: Author
August 5, 2026





