आठ साल से घर छोड़ पशु पक्षियों की सेवा कर रही रानी
बांदा: जिसके मन में सेवा भाव,प्रेम, करूणा और ममता हो वह किसी को भी अपना बना सकता है । ऐसा ही एक वाकया बांदा जिले में देखने को मिला जह एक ममतामई मां ने बेजुबान पशु पक्षियों को जीवन जीना सिखा दिया है।
भीषण गर्मी में सभी का हाल बेहाल है. नदियां, तालाब और नहर में पानी सूख रहे हैं. पानी कम होने से जंगलों में रह रहे पशु-पक्षियों की पहुंच से दूर हैं. ऐसे में यूपी के बांदा जिले में एक बुजुर्ग महिला का काम काबिले तारीफ़ है। जो अपना घर छोड़कर जानवरों के बीच जंगलों में अपना एक कुटिया बनाया हुआ है. वहां उनके खाने-पीने से लेकर उनका ध्यान रखती हैं।

खबरों के मुताबिक रानी पिछले 8 सालों से जंगल में अपनी एक झोपड़ी में रहते हुए इन बंदरों की सेवा कर रही हैं. रानी कहती हैं कि जब तक वह जीवित हैं वह इस काम को करती रहेंगी. रानी का परिवार कालिंजर क्षेत्र के कटरा में रहता है. कुछ दिन पहले इनके एक बेटे की मौत हो गई. वहीं तीन बेटे गांव में अपने परिवार के साथ रहते हैं. जंगल में वे इनसे मिलने आते रहते हैं।

बता दें कि रानी के इस काम में स्थानीय लोग भी मदद करते हैं। वे जीव-जंतुओं के खाने के सामान रानी को देकर जाते हैं. वहीं रानी के साथ ये बंदर भी बहुत घुल मिल गए हैं। वो ज्यदातर इन्हीं के आस-पास रहते हैं. जंगल के करीब रानी के पास 2 बीघा खेत है, जब रानी वहां जाती हैं तो बंदर भी इनके पीछे-पीछे चले जाते हैं. एक मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रानी ने इन बंदरों का नाम भी रखा है. वो जब हैंडपंप पर इन बंदरों को पानी पिलाती हैं तब वो उनका नाम पप्पू, चुन्नू, मुन्नू कालू आदि कहकर पुकारती है. जिसको सुनकर वह बंदर ऐसे भागे चले आते हैं जैसे उन बंदरों की मां उन्हें बुला रही हों.
घर छोड़ जंगल में जानवरों की सेवा करती हैं बुजुर्ग।
बांदा में कटरा की रहने वाली 60 वर्षीय बुजुर्ग महिला रानी उर्फ कुशमा एक सराहनीय काम को अंजाम दे रही हैं. रानी कई सालों से बागै नदी के करीब देवी स्थान के पास अपनी एक कुटिया में रहती हैं. वो इस भीषण गर्मी में जानवरों की खूब सेवा कर रही हैं. रानी का मानना है कि यूपी और एमपी के जंगलों में बंदरों का जीवन पानी की कमी से संकट में न पड़ जाए. इसीलिए वो अपना घर छोड़कर जंगलों में उनकी जी जान से सेवा कर रही हैं. रानी का यह जुनून देखते ही बनता है.
बुजुर्ग महिला के इस काम की हर कोई सराहना कर रहा है. लोग भी उनके इस प्रयास में उनकी मदद करते हैं. वहीं आज के युग में जब इंसान दूसरे इंसान की नहीं सोच रहा है. ऐसे में बुजुर्ग महिला का बंदरों के साथ अन्य जानवरों के लिए सेवा करना काबिले तारीफ है जो लोगों के लिए प्रेरणास्रोत हैं.