आखिर सतपाल महाराज ने शहीद मनदीप को क्यों नहीं दी श्रद्धांजलि……?
सतपाल महाराज का अपने विधानसभा क्षेत्र के शहीदों की उपेक्षा, बन रहा राजनीतिक हलके में चर्चा का विषय
कोटद्वार/ पोखड़ा। उत्तराखंड सरकार में उसके मंत्री, विधायक आए दिन अपने बयान बाजी, अपने क्रियाकलापों और अनोखे बोलो की वजह से कुछ ना कुछ मजाक का कारण या फिर शर्मशार हो जाते हैं। ऐसा ही एक मामला आजकल पौड़ी गढ़वाल से लेकर देहरादून तक काफी चर्चा में है। कुछ दिन पूर्व जम्मू कश्मीर के गुलमर्ग में शहीद हुए सतपाल महाराज के विधानसभा क्षेत्र के शहीद मनदीप को श्रद्धांजलि देने का भी सतपाल महाराज के पास समय नहीं है, जबकि मनदीप को श्रद्धांजलि देने के लिए सूबे के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत, पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत सहित कई अन्य मंत्री और विधायक उनके गांव पहुंचे और शहीद मनदीप सिंह को श्रद्धांजलि दी। लेकिन पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज जिनका कि वह विधानसभा क्षेत्र है साथ ही उनका पुस्तैनी गृहक्षेत्र भी। अपनी आपसी राजनीतिक खींचतान के चलते महाराज द्वारा अपने विधानसभा क्षेत्र के एक शहीद को भी उपेक्षित कर दिया। कहने को तो सतपाल महाराज एक संत हैं जो कि समाज को सही राह दिखाने का काम भी करते हैं लेकिन एक शहीद को श्रद्धांजलि न देना शायद उनके संत परंपरा या उनकी गुरु परंपरा में शामिल नहीं है। शहीद मनदीप के परिजनों और पोखड़ा विधानसभा क्षेत्र के लोगों को सतपाल महाराज का यह रवैया गले नहीं उतर रहा है, वहीं महाराज के इस तरह के व्यवहार मनदीप के परिजनों सहित क्षेत्र की जनता बहुत आहत है। ऐसे में सतपाल विरोधी खेमे के लोग गली मोहल्ले और चौराहों में खूब चुटकियां लेकर महाराज का मजाक बनाने में लगे हुए हैं। मखौल बनाने वालों के अनुसार शायद महाराज की संत परंपरा यह एक शैली है कि किसी शहीद को श्रद्धांजलि न दी जाए। एक युवा जो सीमाओं पर आम आदमी से लेकर वीआईपी की रक्षा के लिए अपनी जान खेल जाता है परंतु राजसी ठाठ बाट पाने वाले, संत से राजनीति में प्रवेश करने वाले संत परंपरा के लोग जो अब राजनीति में पहुंचकर राजसत्ता का सुख भोग रहे हों और समाज को सुख न भोगने का प्रवचन देते हैं, लेकिन अपने राजसी ठाट बाट घमंड में शहीदों के खून को मजाक बनाने पर तुले हुए हैं उनके पास दो शब्द सांत्वना के नहीं। आम जनता को सोचना होगा कि ऐसे संत महात्माओं को रोका जाए जो राजनीति का उपयोग सत्ता सुख पाने के लिए करते हैं। ऐसे हर राजनीतिक व्यक्ति को भी रोका जाए जो शहीदों का अपमान करते हो, जो अपनी विधानसभा के लोगों की उपेक्षा करते हो, जो अपने राजसी ठाट बाट के लिए जनता की भावनाओं से खेल रहे हो, उन्हें सबक सिखाने के लिए जनता को कठोर निर्णय लेना होगा।


